इधर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमला करता रह गया, उधर भाजपा ने बड़ा खेल कर दिया, जारी हो गयी BJP Pradesh Prabharis List
भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम घोषित करने के बाद अब संगठन की अगली कड़ी भी सामने रख दी है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने आज 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों की नई सूची जारी कर दी है। यानी राष्ट्रीय संगठन के पुनर्गठन के बाद अब पार्टी की निगाहें राज्यों की राजनीतिक जमीन पर संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने पर हैं। नई सूची में वरिष्ठ और अनुभवी चेहरों के साथ अपेक्षाकृत नए नेताओं, महिलाओं और अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले नेताओं को जगह दी गई है। हम आपको याद दिला दें कि पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची अगस्त में जारी हुई थी, जिसमें पार्टी ने अनुभव, ऊर्जा और जमीनी जुड़ाव के मिश्रण पर जोर दिया था।
भाजपा की प्रदेश प्रभारियों की सूची को सिर्फ नियुक्तियों की सूची मानना संगठन की इस कवायद के राजनीतिक अर्थ को छोटा करके देखना होगा। दरअसल, पार्टी ने महत्वपूर्ण राज्यों में ऐसे नेताओं को लगाया है जिनके पास संगठन, चुनाव और राज्य स्तर की राजनीति का लंबा अनुभव है। सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश का है, जहां प्रभारी की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह प्रभारी बनाया गया है। विनोद तावड़े को पहले भी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी जा चुकी है और अगस्त में पार्टी ने उन्हें राज्य का प्रभारी नियुक्त किया था। ऐसे में उत्तर प्रदेश में उनकी भूमिका संगठन और चुनावी रणनीति के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में देखी जा सकती है।
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पंजाब में डॉ. सतीश पूनिया को प्रभारी बनाया गया है, जबकि वीरेंद्र सचदेवा और डॉ. अलका गुर्जर को सह प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। पूनिया भाजपा की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें हाल ही में पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी भी मिली है। ऐसे अनुभवी नेताओं का इस्तेमाल उन राज्यों में संगठन को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है जहां सामाजिक समीकरण, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।
गुजरात में तरुण चुग को प्रभारी बनाया गया है, जबकि अजय महावर और गोमती साई सह प्रभारी होंगी। तरुण चुग पहले से राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वहीं पश्चिम बंगाल और तेलंगाना जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में सुनील बंसल को प्रभारी बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में उनके साथ लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा तथा तेलंगाना में अभय पाटिल और रेखा शर्मा को सह प्रभारी बनाया गया है।
सूची में महिला नेतृत्व की मौजूदगी भी साफ दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ और हरियाणा में स्मृति ईरानी को प्रभारी बनाया गया है। महाराष्ट्र में बैजयंत जय पांडा प्रभारी हैं और उनके साथ तीन सह प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। बिहार में हरीश द्विवेदी के साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता, जबकि राजस्थान में संजय भाटिया के साथ कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को जिम्मेदारी दी गई है।
उत्तर-पूर्व को भी सूची में पर्याप्त संगठनात्मक प्रतिनिधित्व मिला है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम जैसे राज्यों में अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। असम में मंगल पांडे के साथ फांग्नोन कोन्याक और मनोज टिग्गा हैं, जबकि मणिपुर में डॉ. राजदीप राय और त्रिपुरा में मृगांका देव बर्मन को जिम्मेदारी मिली है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा ने राष्ट्रीय टीम के बाद अब राज्य स्तर पर भी ऐसा ढांचा खड़ा किया है जिसमें अनुभव और नई ऊर्जा को साथ रखने की कोशिश दिखाई देती है। अगस्त में घोषित राष्ट्रीय टीम में 65 पदाधिकारियों में 51 नए चेहरे थे और पार्टी ने युवा, महिला, क्षेत्रीय तथा सामाजिक प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर दिया था। अब प्रदेश प्रभारियों की सूची उसी संगठनात्मक सोच को राज्यों तक ले जाती दिखती है।
राजनीतिक तौर पर इन नियुक्तियों का बड़ा लाभ यह हो सकता है कि केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच संवाद की एक मजबूत कड़ी बने। अनुभवी प्रभारी स्थानीय गुटबाजी, सामाजिक समीकरण और चुनावी इतिहास को समझकर रणनीति बनाने में मदद कर सकते हैं, जबकि नए और क्षेत्रीय चेहरे संगठन को स्थानीय समाज और कार्यकर्ता स्तर से जोड़ने में उपयोगी हो सकते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों में प्रभारी केवल संगठनात्मक समन्वयक नहीं, बल्कि केंद्रीय रणनीति और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाएंगे।
बहरहाल, भाजपा ने राष्ट्रीय टीम के बाद अब राज्यों में भी संगठन की बिसात बिछा दी है। संदेश साफ है। केंद्र में नई टीम और राज्यों में नई जिम्मेदारियां, दोनों को एक साथ साधकर पार्टी आने वाले राजनीतिक दौर के लिए अपने संगठन को सक्रिय, व्यापक और अधिक क्षेत्रीय रूप से सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में यह नये प्रभारी पार्टी को कितना मजबूत समर्थन दिला पाते हैं।
SIR रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग, Arvind Kejriwal का आरोप
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को मांग की कि मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया रद्द की जाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। केजरीवाल ने अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर का हवाला देते हुए दावा किया कि कुमार निर्वाचन आयोग को अपने स्तर पर चला रहे हैं, जिससे देशभर में की जा रही एसआईआर की पूरी प्रक्रिया ‘‘अवैध’’ हो गई है। खबर के अनुसार, मतदाता सूची को अद्यतन करने की कवायद के दौरान दो निर्वाचन आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार निर्वाचन आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई थी।
केजरीवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘कई महीनों से निर्वाचन आयोग की बैठकें नहीं हो रही हैं, जबकि ज्ञानेश कुमार अपने स्तर पर आदेश जारी करते रहे हैं। इसलिए पूरी एसआईआर प्रक्रिया अवैध है, जिसके तहत देशभर में 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकृति नहीं दी है।’’ ‘आप’ प्रमुख ने कहा, ‘‘इसलिए आज हम मांग करते हैं कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए, एसआईआर के तहत किए गए सभी बदलाव रद्द किए जाएं और तीन साल पहले की मतदाता सूची बहाल की जाए।’’ उन्होंने कहा कि कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। केजरीवाल ने दावा किया कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, कुमार पिछले कुछ वर्षों से निर्वाचन आयोग को अपने स्तर पर चला रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बार-बार लिखित शिकायतें दी हैं कि निर्वाचन आयोग की मंजूरी या अधिकृत अनुमति के बिना उनके अधीनस्थ अधिकारियों को आदेश जारी किए जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस देश में इससे बड़ा घोटाला नहीं हो सकता। यदि पूरी मतदाता सूची निर्वाचन आयोग के केंद्रीय कार्यालय से तैयार की जा रही है और इसे निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) या एसडीएम द्वारा तैयार नहीं किया जा रहा है, तो जरूर पूरे देश की मतदाता सूची से छेड़छाड़ की गयी है।’’ ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के बाद निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची को अद्यतन कर ठीक किए जाने और मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन के दौरान लिए गए फैसलों पर आपत्ति जताई थी। बहरहाल, निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने कहा कि एसआईआर सहित भारत निर्वाचन आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से और दोनों निर्वाचन आयुक्तों तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।
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