नेपाल जैसा बाढ़ का खतरा लद्दाख में बढ़ा:ग्लेशियर झील से रिसाव; रियल टाइम निगरानी कर रहे हैं वैज्ञानिक; दबाव बढ़ा तो झील को पंक्चर कर पानी निकालेंगे
लद्दाख के सबसे बड़े द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर के मुहाने पर बनी झील से पानी का रिसाव शुरू हो गया है। झील कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। ऐसे में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक जांस्कर में ग्लेशियर के पास ही कैंप कर इस पर लगातार निगाह बनाए हुए हैं। वैज्ञानिक झील में पानी की मात्रा, गहराई और ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार की रियल टाइम निगरानी कर रहे हैं। पानी बढ़ने से झील पर दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंचा तो इसे सुरक्षित तरीके से पंक्चर कर अतिरिक्त पानी निकालने की भी तैयारी है। नेपाल में हाल की आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी और तेज की गई है। करीब 24 किमी लंबे द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर के पीछे हटने से उसके मुहाने पर यह प्रो-ग्लेशियर झील बनी है। 2017 में इसका क्षेत्रफल करीब 16.62 हेक्टेयर था, जो 2023 में बढ़कर 39.1 हेक्टेयर हो गया। 2010 के बाद बनी झील, पीछे हटा ग्लेशियर... अध्ययनों के मुताबिक, 2010 के बाद ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी गहरी जगह में पिघली बर्फ का पानी जमा होने लगा और झील बनी। 2021 के बाथिमेट्री सर्वे में 5 हजार से ज्यादा बिंदुओं पर माप लिया गया था। तब झील का जल-आयतन 1.8 लाख घन मीटर पाया गया। औसत गहराई 1.91 मीटर और अधिकतम गहराई 3.85 मीटर थी। 1971 से 2017 के बीच ग्लेशियर 13.84% घटा और अग्रभाग 925 मीटर पीछे चला गया। लद्दाख और द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर पर असर लद्दाख का द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहा है, जिससे इसके मुहाने पर पानी जमा होकर एक बड़ी अस्थिर झील बन गई है। यह झील कमजोर पत्थरों और मलबे के सहारे टिकी है, जिससे इसके टूटने का डर लगातार बना रहता है। इसके अलावा पिघलती बर्फ से स्थानीय नदी तंत्र और जीव-जंतुओं के प्राकृतिक संतुलन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तान में लोगों की जिंदगी पूरी तरह ग्लेशियर के पिघलने वाले पानी पर निर्भर है। अभी तो बर्फ तेजी से पिघलने की वजह से नदियों में पानी ज्यादा दिख सकता है, लेकिन कुछ सालों बाद जब बर्फ कम हो जाएगी तो गंभीर सूखा पड़ सकता है। इससे स्थानीय खेती, पीने के पानी और बिजली परियोजनाओं के लिए पानी की भारी कमी हो जाएगी। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. बाढ़ आई... बाढ़ आई, जान बचाकर दोबारा भागे लोग:30 सेकेंड में मलबे में दफन देवीघाट, 7 हजार लोगों का पता नहीं 30 अगस्त की सुबह हम नेपाल के देवीघाट पहुंचे। हर तरफ मलबा था, जिसमें लोग सामान और अपनों को तलाशते मिले। पूरी खबर पढ़ें…
टूथपेस्ट, साबुन और शैंपू पर हरा-लाल बिंदु लगाना जरूरी:देखकर पता चलेगा उत्पाद शाकाहारी है या नहीं; नियम का उल्लंघन करने पर 1 साल की सजा संभव
केंद्र सरकार ने टूथपेस्ट, साबुन, शैंपू, कॉस्मेटिक्स और अन्य टॉयलेटरीज के पैकेट पर हरा या लाल बिंदु लगाना अनिवार्य कर दिया है। शाकाहारी सामग्री से बने उत्पादों पर हरा और मांसाहारी सामग्री वाले उत्पादों पर लाल या भूरा बिंदु रहेगा। बिंदु पैकेट के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से में होगा। इसे देखकर उपभोक्ता जान सकेंगे कि रोजमर्रा के इस्तेमाल का उत्पाद शाकाहारी मूल का है या मांसाहारी। सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 में संशोधन कर यह प्रावधान लागू किया है। 21 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ ही ये नियम लागू हो गए था। सामान पर गलत बिंदु दिखने पर शिकायत कैसे करें? यदि किसी मांसाहारी उत्पाद पर हरा निशान या शाकाहारी पर लाल निशान लगा है, तो यह नियमों का उल्लंघन है। इसके लिए आप इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं। पैक पर नाम और लाइसेंस नंबर लिखना जरूरी है पैक पर पहले से ही उत्पाद का नाम, निर्माता का पता, मात्रा, बैच नंबर, लाइसेंस नंबर, निर्माण और एक्सपायरी तारीख, अधिकतम खुदरा मूल्य तथा इस्तेमाल की सावधानियां लिखना जरूरी है। सामग्री उत्पाद की प्रकृति नहीं दिखाती, इसलिए बिंदु जरूरी नारियल, जैतून, एलोवेरा, शीया बटर जैसी सामग्री पौधों से मिलती है। लैनोलिन भेड़ की ऊन से और कोलेजन-जिलेटिन पशुओं से मिलते हैं। ग्लिसरीन, स्टीयरिक एसिड और फैटी एसिड पौधों और पशु वसा, दोनों से बनते हैं। नाम मूल प्रकृति नहीं बताता। ऐसे में, हरा-लाल बिंदु स्पष्ट बताएगा। 60 मिली तक तरल व 30 ग्राम तक ठोस पैक पर घटक नहीं होते। वहां भी बिंदु काम आएगा। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… TRAI का टेलीकॉम कंपनियों को आदेश:लो-इनकम वाले यूजर्स के लिए कम वैलिडिटी के वॉइस और SMS रिचार्ज प्लान लाएं टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने कंपनियों को आदेश दिया है कि वह कम इनकम वाले यूजर्स के लिए छोटी वैलिडिटी के वॉइस और SMS रिचार्ज प्लान लाएं। पूरी खबर पढ़ें…
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