जम्मू-रामबन में कार के अंदर 2 पुलिसकर्मी मृत मिले:मौत का कारण पता नहीं चल पाया; यह इलाका कश्मीर से जुड़ने वाला जरूरी ट्रांजिट रूट
जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में 22 सितंबर की देर शाम कार के अंदर दो पुलिसकर्मियों की डेड बॉडी मिली। हेड कॉन्स्टेबल फरीद अहमद और सिलेक्शन ग्रेड कॉन्स्टेबल मोहम्मद याकूब, रामबन की डिस्ट्रिक्ट पुलिस लाइंस में तैनात थे। दोनों संदिग्ध हालत में कार के अंदर बेहोश मिले थे। स्थानीय लोग दोनों को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल रामबन ले गए। डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया। दोनों पुलिसकर्मियों की मौत की सही वजह अभी पता नहीं चल पाई है। मौत के कारण और घटना की पूरी परिस्थितियां भी अभी साफ नहीं हैं। पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। रामबन कश्मीर घाटी और जम्मू (डोडा, किश्तवाड़, उधमपुर, रियासी) को जोड़ने वाला मुख्य गलियारा है। रामबन से जुड़ी सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियां जंगल में छिपा घायल आतंकी की तलाश जारी जम्मू-कश्मीर में तीन दिन पहले हुए एनकाउंटर में घायल आतंकी की तलाश जारी है। सेना ने पांच जिलों कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, घायल आतंकी मजालता के जंगलों में छिपा हो सकता है। सेना ने 17 सितंबर को ‘ऑपरेशन सोहन’ चलाया था। मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए थे। एक आतंकी घायल हो गया था। फोरेंसिक टीमें भागने वाले रास्ते पर मिले खून के निशान और अन्य सुरागों की भी जांच कर रही हैं। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… हाफिज सईद के नाम 2 महीने में दूसरा गैर-जमानती वारंट:NIA कोर्ट का आरोप- आतंकवादियों को हथियार और फंड दिया जम्मू की एक स्पेशल NIA कोर्ट ने लश्कर-ए-तैयबा के चीफ और घोषित आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ नया गैर-जमानती वारंट जारी किया है। उस पर कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार, फंड और निर्देश देने का आरोप है। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल जैसा बाढ़ का खतरा लद्दाख में बढ़ा:ग्लेशियर झील से रिसाव; रियल टाइम निगरानी कर रहे हैं वैज्ञानिक; दबाव बढ़ा तो झील को पंक्चर कर पानी निकालेंगे
लद्दाख के सबसे बड़े द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर के मुहाने पर बनी झील से पानी का रिसाव शुरू हो गया है। झील कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। ऐसे में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक जांस्कर में ग्लेशियर के पास ही कैंप कर इस पर लगातार निगाह बनाए हुए हैं। वैज्ञानिक झील में पानी की मात्रा, गहराई और ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार की रियल टाइम निगरानी कर रहे हैं। पानी बढ़ने से झील पर दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंचा तो इसे सुरक्षित तरीके से पंक्चर कर अतिरिक्त पानी निकालने की भी तैयारी है। नेपाल में हाल की आपदा के बाद हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी और तेज की गई है। करीब 24 किमी लंबे द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर के पीछे हटने से उसके मुहाने पर यह प्रो-ग्लेशियर झील बनी है। 2017 में इसका क्षेत्रफल करीब 16.62 हेक्टेयर था, जो 2023 में बढ़कर 39.1 हेक्टेयर हो गया। 2010 के बाद बनी झील, पीछे हटा ग्लेशियर... अध्ययनों के मुताबिक, 2010 के बाद ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी गहरी जगह में पिघली बर्फ का पानी जमा होने लगा और झील बनी। 2021 के बाथिमेट्री सर्वे में 5 हजार से ज्यादा बिंदुओं पर माप लिया गया था। तब झील का जल-आयतन 1.8 लाख घन मीटर पाया गया। औसत गहराई 1.91 मीटर और अधिकतम गहराई 3.85 मीटर थी। 1971 से 2017 के बीच ग्लेशियर 13.84% घटा और अग्रभाग 925 मीटर पीछे चला गया। लद्दाख और द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर पर असर लद्दाख का द्रंग-द्रुंग ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहा है, जिससे इसके मुहाने पर पानी जमा होकर एक बड़ी अस्थिर झील बन गई है। यह झील कमजोर पत्थरों और मलबे के सहारे टिकी है, जिससे इसके टूटने का डर लगातार बना रहता है। इसके अलावा पिघलती बर्फ से स्थानीय नदी तंत्र और जीव-जंतुओं के प्राकृतिक संतुलन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तान में लोगों की जिंदगी पूरी तरह ग्लेशियर के पिघलने वाले पानी पर निर्भर है। अभी तो बर्फ तेजी से पिघलने की वजह से नदियों में पानी ज्यादा दिख सकता है, लेकिन कुछ सालों बाद जब बर्फ कम हो जाएगी तो गंभीर सूखा पड़ सकता है। इससे स्थानीय खेती, पीने के पानी और बिजली परियोजनाओं के लिए पानी की भारी कमी हो जाएगी। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. बाढ़ आई... बाढ़ आई, जान बचाकर दोबारा भागे लोग:30 सेकेंड में मलबे में दफन देवीघाट, 7 हजार लोगों का पता नहीं 30 अगस्त की सुबह हम नेपाल के देवीघाट पहुंचे। हर तरफ मलबा था, जिसमें लोग सामान और अपनों को तलाशते मिले। पूरी खबर पढ़ें…
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