खानपान में ‘साइलेंट हीरो’ को नजरअंदाज करने के नुकसान जान लें, स्वास्थ्य के लिए फाइबर कितना जरूरी
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। शरीर को स्वस्थ रखने और सही तरीके से चलाने के लिए कई जरूरी विटामिन और खनिजों की जरूरत पड़ती है। विटामिन और खनिजों की बात तो सभी करते हैं लेकिन शरीर की गंदगी को निकालने के लिए एक ‘साइलेंट हीरो’ की जरूरत पड़ती है, जिसका नाम है फाइबर। फाइबर शरीर के पाचन से लेकर दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
आज की जीवनशैली में सभी प्रोटीन और कैल्शियम की बात करते हैं लेकिन फाइबर को नजरअंदाज कर देते हैं, ये जानते हुए भी कि ये कितना जरूरी है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में ही फाइबर को बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि फाइबर के बिना न तो पाचन ठीक रहता है और न ही शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। इसीलिए इसे ‘साइलेंट हीरो’ कहा जाता है।
अब जानते हैं कि फाइबर क्या है और कहां से मिल सकता है। फाइबर पौधों से मिलने वाला वह कार्बोहाइड्रेट है जो पाचन को सरल बनाने में काम करता है और आंतों की गंदगी को शरीर से निकालने में मदद करता है। इससे खाना टूटकर कब्ज नहीं बनता और न ही आंतों में ज्यादा समय तक जमा रह पाता है। यही वजह है कि यह पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है। आयुर्वेद में फाइबर को आम यानी विषाक्त पदार्थों का दुश्मन माना गया है।
फाइबर दो तरीके के होते हैं। पहला होता है पानी में घुलनशील, जो पानी में मिलकर रक्त में शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है और दूसरा होता है पानी में अघुलनशील, यानी जो मल को कठोर न बनने में मदद करता है, जिससे पेट में कब्ज नहीं बनती।
अगर शरीर में फाइबर की कमी होती है तो पेट से जुड़ी परेशानी जैसे बार-बार कब्ज और गैस बनना, खाने का सही तरीके से न पचना, वजन तेजी से बढ़ना, ब्लड शुगर का असंतुलन, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, थकान और सुस्ती, पाइल्स और फिशर जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
अब सवाल है कि फाइबर कहां से प्राप्त हो सकता है। फाइबर सभी तरह के फल और सब्जियों में पाया जाता है। इसके अलावा, चिया सीड्स, ओट्स, चना, राजमा और चोकर वाले आटे में फाइबर पाया जाता है। रोजाना फाइबर का सेवन करना जरूरी है। कम से कम 100 ग्राम फाइबर युक्त आहार जरूर लें।
--आईएएनएस
पीएस/वीसी
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असम के लिए गेम-चेंजर साबित होगी ‘काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर’, PM Modi ने रखी 6950 करोड़ की परियोजना की आधारशिला
असम का काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट इन दिनों चर्चा में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय असम दौरे के दौरान रविवार (18 जनवरी) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी. इस परियोजना की कुल लागत 6,950 करोड़ रुपये है. इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग NH-715 के कालियाबोर-नुमालीगढ़ सेक्शन को चार लेन का बनाया जाएगा. बता दें कि इस परियोजना को 1 अक्टूबर 2025 को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) से मंजूरी मिली थी. तो आइए जानते हैं इस योजना की विशेषताएं व फायदे और क्यों है असम को इसकी जरूरत.
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
जानकारी के मुताबिक, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर कुल 86 किलोमीटर लंबा होगा. इसमें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरने वाला 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर शामिल है. इसके अलावा 21 किलोमीटर का बाईपास और मौजूदा NH-715 के 30 किलोमीटर हिस्से को दो लेन से चार लेन तक चौड़ा किया जाएगा. यह एक पर्यावरण के प्रति संवेदनशील राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना है.
#WATCH | Kaliabor, Assam | PM Narendra Modi lays the foundation stone of the Kaziranga Elevated Corridor Project (4-Laning of Kaliabor-Numaligarh section of NH-715), worth over ₹6,950 Crore.
— ANI (@ANI) January 18, 2026
The 86 km long Kaziranga Elevated Corridor project is an environmentally conscious… pic.twitter.com/crcT5ypIHO
क्यों जरूरी है यह कॉरिडोर?
आपको बता दें कि यह कॉरिडोर नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगा. इससे ऊपरी असम, खासकर डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. जाखलाबन्धा और बोकाखाट में बाईपास बनने से शहरों में ट्रैफिक कम होगा और लोगों की आवाजाही आसान होगी.
मौजूदा समस्याएं और समाधान
फिलहाल NH-715 का यह हिस्सा दो लेन का है और घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरता है. मानसून के समय काजीरंगा नेशनल पार्क में पानी भरने पर जंगली जानवर ऊंचे इलाकों की ओर जाते हैं और हाईवे पार करते हैं. इससे ट्रैफिक जाम, सड़क हादसे और वन्यजीवों की मौत की घटनाएं होती हैं. एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से जानवर बिना रुकावट सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकेंगे.
VIDEO | Prime Minister Narendra Modi lays the foundation stone for the Rs 6,957-crore Kaziranga Elevated Corridor in Assam.
— Press Trust of India (@PTI_News) January 18, 2026
The corridor is aimed at ensuring safe wildlife movement across the Kaziranga National Park and Tiger Reserve, reduce road accidents on National… pic.twitter.com/KB2XsOpLvZ
असम को क्या होंगे फायदे?
इस परियोजना के पूरा होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार और उद्योग के नए अवसर खुलेंगे और युवाओं को रोजगार मिलेगा. सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, यात्रा का समय कम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी. कुल मिलाकर काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर असम के लिए विकास, पर्यावरण संरक्षण और कनेक्टिविटी का मजबूत आधार बनेगा.
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