Exclusive: डॉ. एन.पी. सिंह बोले- 'भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के मेल से ही संभव है छात्रों का सर्वांगीण विकास'
हरिभूमि विशेष: ज्ञान, विज्ञान, आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम है भारतीय शिक्षा बोर्ड– डॉ. एन.पी. सिंह
शिशिर सोनी | नई दिल्ली
क्या आपको यूपीएससी की परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों ने इस बार हैरान किया था? क्यों ? क्यों कि सवाल भारतीयता से, भारतीय संस्कृति और उसके पुरातन विविधताओं से था? अगर हां तो तय मानिये देश के सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का मूलस्तर एक दशक में बदला बदला सा नजर आएगा। हर प्रतियोगी परीक्षाओं में देश के गर्वित इतिहास से सवाल होंगे। जैसे-जैसे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को तेजी से लागू किया जा रहा है, शिक्षा के क्षेत्र में ‘भारतीय शिक्षा बोर्ड’ एक सशक्त और वैकल्पिक राष्ट्रीय बोर्ड के रूप में तेजी से उभर रहा है। ज्ञान, विज्ञान और गणित के नये पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी फिजिक्स और मैथ्स के नामचीन प्रोफेसर एसी वर्मा और प्रोफेसर हुकुम सिंह को दिया गया है, जो रुचिकर ढंग से नये पाठ्यक्रम को बुन रहे हैं।
बच्चों को, नौनिहालों को इसी बदली शिक्षा व्यवस्था से रूबरू कराने, उन्हें अपेक्षाकृत ज्यादा रोजगारपरक बनाने, किन्हीं वजहों से पढाई रुक गई फिर भी स्वावलंबी बनने की दिशा तय करने के लिए स्कूली शिक्षा की मजबूत नींव डालने सीबीएसई, आईसीएसई, या अन्य राजकीय शिक्षा बोर्डों से इतर भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन कर समूची स्कूली शिक्षा व्यवथा को नये सिरे से गढने के काम में लगे भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष, जाने-माने शिक्षाविद् तथा पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. एन.पी. सिंह ने बोर्ड के विजन, उद्देश्यों और इसकी कार्यप्रणाली पर हरिभूमि के साथ विस्तार से चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि देश की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में बदलाव की क्यों आवश्यकता है और किस प्रकार भारतीय शिक्षा बोर्ड पारंपरिक भारतीय मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ पिरोकर एक नई दिशा दे रहा है।
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और भारतीय ज्ञान प्रणाली
एक सवाल के जवाब में डॉ. एन.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि 1835 के शिक्षा अधिनियम और औपनिवेशिक (मैकाले) प्रभाव के कारण भारत की मूल ज्ञान परंपराओं गणित, जीवन विज्ञान, दर्शनशास्त्र और अन्य क्षेत्रों को पाठ्यक्रम में केवल एक फुटनोट (हाशिए) की तरह रख दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप, सदियों से चली आ रही भारतीय शिक्षा व्यवस्था सिर्फ नौकरी चाहने वाले लोग तैयार करने तक सीमित होकर रह गई। जब कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का मुख्य उद्देश्य ऐसे ग्लोबल सिटीजन (वैश्विक नागरिक) तैयार करना है जो अपनी भारतीय जड़ों, संस्कृति और मूल्यों से मजबूती से जुड़े हों तथा आधुनिक दुनिया में पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबला कर सकें।
सीबीएसई और अन्य बोर्डों से भिन्न है भारतीय शिक्षा बोर्ड
भारतीय शिक्षा बोर्ड अन्य राष्ट्रीय और राज्य बोर्डों से किस प्रकार भिन्न है, इस सवाल के जवाब में डॉ. सिंह ने बताया कि शैक्षणिक स्तर पर समानता होने के बावजूद दोनों के 'शिक्षा दर्शन' में अंतर है। भारतीय शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम का स्वरूप का स्वरूप कुछ इस तरह तैयार किया जा रहा है कि बोर्ड के पाठ्यक्रम में वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता, जैन व बौद्ध दर्शन के साथ-साथ महान भारतीय विचारकों, नेताओं की जीवन गाथाओं, संवैधानिक मूल्यों और गुरुकुल परंपरा के तत्वों को आधुनिक विज्ञान व टेक्नोलॉजी के समावेश हो ताकि नौनिहालों को देश के समृद्ध विरासत से जोडा जा सके। उसकी महत्ता को रखांकित किया जा सके। भारत की भूमि से उपजे ज्ञान, दर्शन पर जब विश्व की शिक्षा व्यवस्था गौरव कर रही है उस पर आधारित है तो भला हमारे देश में हमारा गौरवशाली समृद्ध इतिहास से क्यों ने हमारे बच्चों को रूबरू कराया जाए।
डा. एनपी सिंह ने कहा, रटंत विद्या से मुक्ति मिलेगी तभी बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है। यही वजह है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड में चीजों को केवल रटने के बजाय अवधारणाओं को गहराई से समझने और प्रायोगिक/अनुभव आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है। छात्रों पर अत्यधिक पढ़ाई का बोझ डालने के बजाय उनकी मानसिक सेहत, क्रिटिकल थिंकिंग (समीक्षात्मक सोच), क्रिएटिविटी और जीवन कौशलों के विकास को प्राथमिकता दी जाती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप और कानूनी मान्यता
बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह ने साफ किया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड पूरी तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) के अनुरूप है। यह बोर्ड कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों को मान्यता प्रदान करता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, कानूनी और प्रशासनिक वैधता के संबंध में उन्होंने जानकारी देते हुए कहा, भारतीय शिक्षा बोर्ड के कक्षा 10 और 12 के प्रमाण-पत्रों को भारतीय विश्वविद्यालय संघ, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) सहित कई राज्य सरकारों और बोर्डों से मान्यता प्राप्त है। इसके छात्र देश के किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान या प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश के लिए पूरी तरह पात्र हैं।
भविष्य की तैयारी और विस्तार
देशभर में नये बोर्ड को लेकर अभिभावकों और स्कूलों में बढ़ती दिलचस्पी पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 1000 स्कूल इस बोर्ड से जुड़ चुके हैं। डा. एनपी सिंह ने बताया कि दर्जन भर मिशिनरी संचालित स्कूल और कुछ मदरसों ने भी भारतीय शिक्षा बोर्ड की महत्ता समझते हुए एफलिएशन लिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकी युग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बोर्ड तकनीक के केवल तकनीकी इस्तेमाल तक सीमित न रहकर उसके रचनात्मक और संतुलित उपयोग पर ध्यान केंद्रित करता है, ताकि छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। नव निर्मित बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह के अनुसार, भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली को काटना नहीं, बल्कि भारत की महान धरोहर और आधुनिक विज्ञान का एक ऐसा बेहतरीन मेल तैयार करना है जो आने वाली पीढ़ियों को उनकी संस्कृति पर गर्व करना सिखाए।
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामला: जूतो के तलवों में छिपाकर बाहर निकाले गए थे प्रश्नपत्र, चार्जशीट में बड़ा खुलासा
Maharashtra TET Paper leak Case: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में ठाणे शहर पुलिस ने एक बेहद चौकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की ओर से स्थानीय अदालत में दाखिल की गई करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों को आगरा की एक प्रिंटिंग प्रेस से जूतों के तलवों (इंसोल) के भीतर छिपाकर बाहर निकाला गया था।
इस साजिश को अंजाम देने वाले प्रेस के दो कर्मचारियों को इसके बदले महज 8,000 रुपये दिए गए थे। भिवंडी की एक स्थानीय अदालत में शुक्रवार को सौंपी गई इस चार्जशीट में कथित मास्टरमाइंड बृजेंद्र गुप्ता समेत कुल 18 आरोपियों के नाम शामिल हैं।
पुलिस अब तक इस मामले में 16 संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अशोक साव और प्रकाश मिसल नामक दो मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।
जल्द दाखिल की जाएगी सप्लीमेंट्री चार्जशीट
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी है कि इस मामले में जैसे-जैसे आगे की जांच आगे बढ़ेगी, एक पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी अदालत में पेश की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, इस बड़े रैकेट का खुलासा परीक्षा से ठीक एक दिन पहले हुआ था, जो कि 28 जून को निर्धारित थी। जोन-द्वितीय के पुलिस उपायुक्त (DCP) पवन बंसोड़ को एक गुप्त सूचना मिली थी कि तीन संदिग्ध लोग भिवंडी के एक स्थानीय निवासी को परीक्षा के पेपर बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कोंगांव इलाके में डिकॉय (नकली ग्राहक या कर्मी) तैनात कर एक जाल बिछाया और संदिग्धों को दबोच लिया। उनके पास से प्रश्नपत्रों के चार सेट बरामद किए गए। इसके बाद जब महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) के अधिकारियों से इसकी सत्यता की जांच कराई गई, तो यह पुष्टि हो गई कि जब्त किए गए कागजात बिल्कुल असली प्रश्नपत्र हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, आपरेश्कि विश्वासघात और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ परीक्षा कदाचार और अनुचित साधनों के रोकथाम से जुड़े राज्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है जो मामले की तह तक जाने में जुटी है।
आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा था लीक का मुख्य स्रोत
चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे पेपर लीक का मुख्य स्रोत आगरा स्थित 'महिम पाट्रन प्राइवेट लिमिटेड' (Mahim Patran Pvt. Ltd.) नामक प्रिंटिंग प्रेस को पाया गया है, जिसे गोपनीय टीईटी परीक्षा सामग्री छापने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पुलिस ने बताया कि 15 जून से 17 जून के बीच, प्रेस के दो मौजूदा कर्मचारियों और एक पूर्व कर्मचारी ने सुरक्षा गार्डों को चकमा देने के लिए मुड़े हुए प्रश्नपत्रों को अपने जूतों के इंसोल में छिपा लिया था। सुरक्षाकर्मी कर्मचारियों के कपड़ों की तलाशी तो लेते थे, लेकिन वे जूतों की तरफ ध्यान नहीं देते थे, जिसका फायदा इन लोगों ने उठाया। परीक्षा की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए राज्य प्रशासन ने दो टीईटी पेपरों के तहत चार अलग-अलग सेट तैयार किए थे ताकि परीक्षा के दिन इनमें से किसी एक को रैंडम तरीके से चुना जा सके। हालांकि, शातिर अपराधियों ने सुरक्षा चक्र को भेदते हुए चारों सेट बाहर निकालने में कामयाबी हासिल कर ली थी।
प्रेस कर्मियों को मिले थे मात्र 8000 रुपये और जमीन का लालच
चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया गया है कि परीक्षा सामग्री चुराने के एवज में प्रेस के उन कर्मचारियों को केवल 8,000-8,000 रुपये दिए गए थे। इसके अलावा उन्हें आगरा में जमीन के प्लॉट देने का भी लालच दिया गया था।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने इस अंतरराज्यीय रैकेट के मास्टरमाइंड के रूप में पूर्व कोचिंग शिक्षक बृजेंद्र गुप्ता की पहचान की है, जो पहले ओडिशा में हुए एक अन्य परीक्षा पेपर लीक मामले में भी संलिप्त पाया जा चुका है। पुलिस ने पैसों के लेन-देन के ट्रेल और तकनीकी लॉक्स के अलावा, बृजेंद्र गुप्ता के बिहार स्थित रिश्तेदार के घर से एक मूल प्रश्नपत्र (ओरिजिनल क्वेश्चन पेपर) की बरामदगी को एक मजबूत भौतिक साक्ष्य के रूप में पेश किया है, जो इस अवैध आपूर्ति श्रृंखला को साबित करता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi










