आम नागरिकों के मारे जाने... हवाई हमलों से दहला अफगानिस्तान तो पाकिस्तान पर भयंकर टूट पड़ा रूस,
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से जंग भड़क गई है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ घंटे बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर दूसरी सबसे बड़ी एयर स्ट्राइक की है जिसमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है क्योंकि पाकिस्तान ने एक दो नहीं बल्कि अफगानिस्तान के 10 ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इससे पहले पाकिस्तान की वायु सेना ने कुनार में एयर स्ट्राइक की थी जिसमें 28 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया था। लेकिन फिर से पाकिस्तान ने बड़ी हिमाकत करते हुए अफगानिस्तान पर अटैक किया है तो तालिबान ने भी बॉर्डर पर धावा बोल दिया है। पाकिस्तान के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी गई है। उधर अफगानिस्तान पर बढ़ते पाकिस्तान के भीषण हवाई हमलों को देखते हुए रूस भड़क उठा है। पहली बार रूस ने गुस्से में पाकिस्तान को खुली चेतावनी दी है।
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दरअसल पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के 10 जगहों को निशाना बनाते हुए स्ट्राइक की है। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी वायुसेना ने जिन जगहों पर हमलों को अंजाम दिया है उन जगह का इस्तेमाल ड्रोन लॉन्च करने और उन्हें रखने के लिए किया जा रहा था। साथ ही पाकिस्तान ने यह भी दावा किया है कि अफगानिस्तान तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तानी सीमा में घुसने और वहां हमला करने की कोशिश की थी। उसके जवाब में ही हवाई हमले किए गए। मगर पाकिस्तान की इस तरह की कायराना हरकत पर रूस भयंकर भड़क उठाया है। रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। काबुल में स्थित रूसी दूतावास ने एक्स पर एक के बाद एक चार पोस्ट किए हैं। रूसी दूतावास ने कहा है कि हम अफगानिस्तान के पूर्व प्रांतों में हवाई हमलों के कारण आम नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की खबरों को लेकर बहुत चिंतित हैं। रूस की ओर से कहा गया है कि हम दोनों पक्षों से टकराव से बचने और बातचीत के जरिए अपने मतभेदों को सुलझाने का आग्रह करते हैं।
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दरअसल आमतौर पर ऐसे हमलों के बाद रूस की तरफ से संतुलित प्रतिक्रिया आती थी। लेकिन इस बार रूस ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है। साथ ही पाकिस्तान को बता दिया है कि जो तुम कारवाई के नाम पर अफगानिस्तान के आम नागरिकों को निशाना बनाकर उन्हें मौत के घाट उतार रहे हो वो कहीं से भी जायज नहीं है। रूस ने जिस तरह से हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की है उससे यह भी साफ है कि वो अफगानिस्तान के साथ है। क्योंकि इससे पहले जब पाकिस्तान की मस्जिद पर अटैक हुआ और 31 से ज्यादा लोग मारे गए थे, तो रूस ने कोई भी ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दी थी। क्योंकि रूस जानता है कि अगर पाकिस्तान के अंदर बम धमाके हो रहे हैं तो इसके लिए पाकिस्तान की वो सेना ही खुद जिम्मेदार है जिसने ऐसे हालातों को जन्म दिया है।
कश्मीर पर आई बात तो भारत ने हिला डाले 57 मुस्लिम देश! PoK पर भी दे दिया अल्टीमेटम
भारत कई मंचों पर दुनिया को यह बता चुका है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का विभिन्न हिस्सा है और वो हमेशा रहेंगे और अब बात सिर्फ और सिर्फ पीओके पर होगी जिसे पाकिस्तान दशकों से हथिया कर बैठा है। लेकिन फिर भी यह बात कुछ लोगों के दिमाग में नहीं बैठ रही है। पाकिस्तान का पक्ष लेने और कश्मीर पर जहर उगलने के लिए कुछ कट्टरपंथी देश आए दिन नया-नया प्रोपेगेंडा लेकर सामने आ जाते हैं। हालांकि ऐसे देशों को भारत भी मुंहतोड़ जवाब देते हुए उनके सारे षड्यंत्र की हवा निकाल देता है। इस बार भी भारत ने कुछ ऐसा ही किया। जब इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने जम्मू कश्मीर को लेकर ज़हर उगला तो भारत ने एक साथ 57 मुस्लिम देशों को तगड़ा सुना डाला और ऐसी नसीहत दी कि सबको हिला कर रख दिया। यही नहीं बल्कि गुस्से में आए भारत ने पाकिस्तान को पीओके खाली करने का अल्टीमेटम दे डाला।
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दरअसल जिस वक्त न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा था तो इसी बीच ओआईसी की बैठक हुई। इस बैठक में ओआईसी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि संगठन कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता है। ओआईसी ने मानव अधिकार और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। साथ ही 2019 के बाद भारत की ओर से उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग दोहराई। फिर क्या था? भारत ने ओआईसी को तगड़ा जवाब दे डाला। इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया। बयान में कहा गया कि भारत तथाकथित ओआईसी कॉन्ट्रैक्ट ग्रुप के जम्मू कश्मीर पर संयुक्त विज्ञापति में भारत के संदर्भ में की गई अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। ओवैसी का उन मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है जो पूरी तरह भारत के आंतरिक मामले हैं। विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और कभी अलग ना होने वाले अंग हैं। राजनीतिक रूप से प्रेरित दुष्प्रचार को बार-बार दोहराने से यह वास्तविकता नहीं बदल सकती। इस तरह के प्रेज चीजों का बार-बार समर्थन ओवैसी की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
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भारत ने कड़े लहजे में कहा कि पाकिस्तान को अपने मनगढ़ंत और प्रेरित दुष्प्रचार के लिए मंच उपलब्ध कराने के बजाय ओवैसी को पाकिस्तान को सलाह देनी चाहिए। तो इस तरह से कश्मीर पर जहर उगलने वाले 57 मुस्लिम देशों के संगठन की भारत ने सारी हेकड़ी निकाल कर रख दी। इधर विदेश मंत्रालय ने कश्मीर के मुद्दे पर ओवैसी को आईना दिखाया तो उधर भारतीय डिप्लोमेट क्षितज त्यागी ने यूएन में पीओके को लेकर पाकिस्तान को अल्टीमेटम दे डाला। कश्मीर और भारत में मुस्लिमों पर पाकिस्तान की ज़हरीली बातों को लेकर शित ने जमकर फटकार लगाई और स्नाबान पर जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों पर गैरकानूनी कब्जा करने का आरोप लगाया और उसे खाली करने की मांग की। दरअसल कुछ दिनों पहले ही जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया था तो उन्होंने वहां की धरती से खड़े होकर ऐलान कर दिया था कि जम्मू कश्मीर भारत का विन अंग रहा है और है और आगे भी रहेगा।
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