साइबर लिटरेसी- कॉल फॉरवर्डिंग से हो रहा स्कैम:डिलीवरी एजेंट बनकर फंसाते हैं स्कैमर, साइबर एक्सपर्ट से जानें ठगी से कैसे बचें
आज के समय में मोबाइल हमारे जीवन का एक जरूरी असेट बन चुका है। बैंक का काम हो, ऑनलाइन पेमेंट करना हो, कॉल करना हो या डॉक्यूमेंट्स सेव रखने हों, सब कुछ इसी एक डिवाइस से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि साइबर अपराधी लगातार मोबाइल यूजर्स को निशाना बना रहे हैं और हर दिन ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठगों ने साइबर फ्रॉड का एक और खतरनाक तरीका निकाला है। इसमें वे खुद को डिलीवरी या कूरियर कंपनी का एजेंट बताकर लोगों को कॉल करते हैं। पार्सल कन्फर्म करने या डिलीवरी रीशेड्यूल के बहाने एक खास कोड डायल करने को कहते हैं। जैसे ही यूजर वह कोड डायल करता है, उसके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव हो जाती है। इससे उसकी OTP व जरूरी कॉल्स किसी दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड होने लगती हैं। इसे कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम कहा जाता है। हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C ने इस स्कैम को लेकर एक अलर्ट जारी किया है। I4C ने लोगों को इस स्कैम से सतर्क रहने की सलाह दी है। तो चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम क्या है? जवाब- यह एक ऐसा साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग किसी बहाने से यूजर के फोन में कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव करवा लेते हैं। इसके लिए वे खुद को कूरियर या डिलीवरी एजेंट बताकर यूजर से एक खास कोड डायल करने को कहते हैं। जैसे ही यूजर वह कोड डायल करता है, उसके फोन पर आने वाली कॉल, OTP सीधे ठगों के नंबर पर फॉरवर्ड होने लगती हैं। इससे उन्हें यूजर के बैंक और सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच मिल सकती है। सवाल- साइबर ठग कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- साइबर ठग इस स्कैम को बहुत चालाकी से अंजाम देते हैं। वे पहले कूरियर या डिलीवरी एजेंट बनकर यूजर को कॉल करते हैं और पार्सल को लेकर बात करते हैं। भरोसा जीतने के बाद वे एक SMS भेजते हैं। इसमें *21*, *61*, *67* या *401* से शुरू होने वाला एक USSD कोड होता है। वे कहते हैं कि इस कोड को डायल करने से पार्सल कन्फर्म या डिलीवरी रीशेड्यूल हो जाएगी। असल में यह कोड ठग के मोबाइल नंबर से जुड़ा होता है। जैसे ही पीड़ित वह कोड डायल करता है, उसके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग अपने आप एक्टिव हो जाती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के क्या खतरे हो सकते हैं? जवाब- इसका सबसे बड़ा खतरा यह है कि बैंक से आने वाली कॉल, ट्रांजैक्शन OTP और वॉट्सएप, टेलीग्राम जैसे एप्स की वेरिफिकेशन कॉल सीधे साइबर अपराधियों के फोन पर जाने लगती हैं। इससे ठग बैंक अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं और सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कब्जा कर सकते हैं। कई बार पीड़ित को तब इस बात की जानकारी मिलती है, जब उसका बैंक अकाउंट खाली हो जाता है या सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो जाता है। यानी यह स्कैम यूजर की आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल पहचान दोनों के लिए बड़ा खतरा है। सवाल- लोग कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम में आसानी से क्यों फंस जाते हैं? जवाब- इस स्कैम में ठग बहुत भरोसेमंद तरीके से बात करते हैं। डिलीवरी या पार्सल का नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि कॉल सही है। साथ ही जल्दबाजी का दबाव बनाया जाता है। इससे व्यक्ति बिना सोचे-समझे बताए गए कोड डायल कर देता है और ठगी का शिकार हो जाता है। सवाल- कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इस स्कैम से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अनजान कॉलर पर तुरंत भरोसा न करें। अगर कोई कूरियर या डिलीवरी के नाम पर आपसे कोई कोड डायल करने को कहे तो उसे साफ मना कर दें। याद रखें, कोई भी असली कंपनी आपसे इस तरह का कोड डायल करने को नहीं कहती है। साथ ही अपने फोन की सेटिंग्स और कॉल फॉरवर्डिंग ऑप्शन की जानकारी रखें, ताकि गलती से कुछ हो भी जाए तो आप तुरंत उसे बंद कर सकें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अगर कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम का शिकार हो जाएं तो तुरंत क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले तुरंत ##002# डायल करके अपने फोन से सभी तरह की कॉल फॉरवर्डिंग बंद करें। तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें। साथ ही अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी इस बारे में बताएं, जिससे वह आपके नाम पर किसी तरह के धोखे में न आएं। सवाल- कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम की शिकायत कहां कर सकते हैं? जवाब- साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर जाकर इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा अपने नजदीकी थाने में भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराते हैं, नुकसान से बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। ................................. साइबर लिटरेसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- साइबर ठगों का नया पैंतरा ‘जंप्ड डिपॉजिट स्कैम’: अकाउंट में अचानक पैसे आएं तो सावधान, ये 8 सेफ्टी टिप्स ध्यान रखें यह एक नया UPI बेस्ड साइबर फ्रॉड है। इसमें ठग पहले यूजर के बैंक खाते में जानबूझकर छोटी राशि ट्रांसफर करते हैं, ताकि यूजर का ध्यान जाए। अचानक पैसे आने पर अक्सर लोग बैलेंस चेक करने या यह देखने के लिए UPI एप खोलते हैं कि पैसा कहां से आया है। पूरी खबर पढ़िए...
जरूरत की खबर- ठंड में बढ़ता चिल ब्लेन का खतरा:उंगलियों में होता इंफ्लेमेशन, महिलाओं को रिस्क ज्यादा, डॉक्टर से जानें कैसे बचें
मौसम बदलते ही शरीर को नए हालात में खुद को ढालना पड़ता है। तापमान में उतार-चढ़ाव शरीर पर असर डाल सकता है। कई बार यह बदलाव अंदरूनी संतुलन बिगाड़ देता है। इसका नतीजा अलग-अलग शारीरिक परेशानियों के रूप में सामने आता है। इन्हीं परेशानियों में से एक उंगलियों में इंफ्लेमेशन होना है। ये तकलीफ रोज के कामों को भी मुश्किल बना देती है। अचानक फूली हुई उंगलियां दर्द, जलन और असहजता पैदा कर सकती हैं, जिससे मन में सवाल उठता है कि आखिर ये क्यों हो रहा है। दरअसल, ठंड में ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं और ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिसके चलते उंगलियों में इंफ्लेमेशन हो जाता है। मेडिसिन की भाषा में इस कंडीशन को चिल ब्लेन कहते हैं। इसीलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- चिल ब्लेन क्या होता है? जवाब- चिल ब्लेन को पर्नियोसिस या पर्नियो भी कहा जाता है। दरअसल, जब स्किन लंबे समय तक ठंडी, नम हवा में रहती है, तो सतह के पास की ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन का फ्लो कम हो जाता है और इंफ्लेमेशन शुरू हो जाता है। बाद में जब स्किन अचानक गर्म होती है, तो ब्लड वेसेल्स तेजी से फैलती हैं। यह बदलाव कई बार इतना तेज होता है कि अतिरिक्त खून आसपास के टिशूज में रिसने लगता है, जिससे खुजली, लालिमा और इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है। सवाल- शरीर के किस हिस्से में चिल ब्लेन होते हैं? जवाब- चिल ब्लेन आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर होते हैं, जो खुले हुए होते हैं। ये ज्यादातर हाथ-पैर जैसे हिस्सों पर दिखाई देते हैं। जैसे गाल, पैर की उंगलियां, नाक, कान, एड़ी और उंगलियां। कई बार यह टाइट कपड़ों से रगड़ खाकर भी होते हैं। ऐसे मामलों में जांघों या हिप्स पर हो सकते हैं। कई बार रेयर केस में चिल ब्लेन बटॉक्स पर भी हो सकते हैं। सवाल- चिल ब्लेन के क्या लक्षण क्या होते हैं? जवाब- चिल ब्लेन में आम तौर पर त्वचा पर लाल या नीले धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जो ज्यादातर हाथों और पैरों पर होते हैं। कई बार इन धब्बों पर छोटे घाव या फफोले भी बन सकते हैं। प्रभावित हिस्से में स्वेलिंग आ जाती है, जिससे दर्द, जलन या चुभन जैसा अहसास होता है। ठंड के संपर्क में आने के बाद स्किन का रंग भी बदल सकता है। यह चिल ब्लेन का एक प्रमुख संकेत है। सवाल- किन्हें चिल ब्लेन होने का खतरा ज्यादा रहता है? जवाब- चिल ब्लेन किसी को भी हो सकता है, लेकिन कई रिसर्च में पाया गया है कि महिलाओं में इसकी संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। सवाल- चिल ब्लेन से बचने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- चिल ब्लेन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि शुरुआत में ही इसे होने से रोक दिया जाए। इसके लिए ठंड में कुछ सरल लेकिन बहुत प्रभावी सावधानियां अपनानी जरूरी हैं। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- चिल ब्लेन का घरेलू इलाज क्या है? जवाब- कुछ घरेलू उपाय चिल ब्लेन से काफी राहत दे सकते हैं। इसके लिए– चिल ब्लेन से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- चिल ब्लेन का इलाज कैसे होता है? जवाब- डॉक्टर आमतौर पर इसे फिजिकल चेकअप और विंटर एक्सपोजर हिस्ट्री के आधार पर कर लेते हैं। कभी–कभी अगर केस गंभीर, लगातार या असामान्य हो तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट या स्किन बायोप्सी करवाकर दूसरी बीमारियों जैसे ल्यूपस या वास्कुलिटिस को रूल आउट कर सकते हैं। सवाल- चिल ब्लेन कितने दिन में ठीक होता है? जवाब- आमतौर पर चिल ब्लेन 2-3 हफ्ते में या मौसम गर्म होने पर खुद ठीक हो जाता है। अगर अगर 2–3 हफ्तों बाद भी लक्षण बने रहें या बार-बार लौट आएं, तो स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह जरूरी है। सवाल- डॉक्टर के पास कब जाएं? जवाब- अगर दो हफ्ते तक घर पर देखभाल करने के बाद भी चिल ब्लेन के लक्षण ठीक न हों, या मौसम गर्म हो जाने पर भी समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से जरूर मिलें। ................ जरूरत की ये खबर भी पढ़िए... जरूरत की खबर- सर्दियों में बढ़ सकता है जॉइंट पेन:हेल्दी फूड और एक्सरसाइज जरूरी, डॉक्टर से जानें विंटर पेन मैनेजमेंट के 9 टिप्स सर्दियों के मौसम में जोड़ों में दर्द व अकड़न की समस्याएं बढ़ जाती हैं। दरअसल तापमान में कमी के कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे जोड़ों में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और दर्द महसूस होता है।इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी कम होने के कारण भी ऐसा हो सकता है। यह स्थिति खासकर बुजुर्गों और आर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में ज्यादा दर्दनाक होती है। पूरी खबर पढ़िए...
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