गाजा में शांति के लिए ट्रंप का बड़ा कदम, 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन, प्रेसिडेंट खुद संभालेंगे कमान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति, सुरक्षा और फिर से विकास के लिए एक विशेष “बोर्ड ऑफ पीस” (Board of Peace) बनाने की घोषणा की है. संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली इस अमेरिकी योजना का मुख्य लक्ष्य गाजा से हथियारों को खत्म करना (विसैन्यीकरण) और वहां एक स्थायी राजनीतिक व्यवस्था बनाना है. राष्ट्रपति ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे और उन्होंने इसे दुनिया का "सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड" बताया है.
बोर्ड में शामिल दिग्गज चेहरे
इस बोर्ड में दुनिया भर के कई प्रभावशाली नेताओं और विशेषज्ञों को जगह दी गई है. प्रमुख सदस्यों में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं. इसके अलावा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अरबपति निवेशक मार्क रोवन और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा को भी इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है. बोर्ड के हर सदस्य को गाजा के पुनर्निर्माण से जुड़ी अलग-अलग विशेष जिम्मेदारियां दी जाएंगी.
गाजा का नया प्रशासनिक ढांचा
गाजा के रोजमर्रा के कामकाज को संभालने के लिए 15 सदस्यों वाली एक फिलिस्तीनी तकनीकी समिति बनाई गई है. इसका नेतृत्व गाजा में जन्मे डॉ. अली शाथ करेंगे. यह समिति गाजा में बिजली, पानी और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं को फिर से शुरू करने का काम करेगी. साथ ही, निकोले म्लादेनोव को गाजा के लिए विशेष उच्च प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है, जो समन्वय का काम संभालेंगे.
इजरायल की शर्तें क्या है?
इस योजना को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. हालांकि योजना में भविष्य में फिलिस्तीनी शासन की बात कही गई है, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण की किसी भी भूमिका का विरोध किया है. इजरायली सुरक्षा एजेंसी 'शिन बेट' ने समिति के सभी 15 सदस्यों की जांच की है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनमें से कोई भी हमास से जुड़ा नहीं है.
फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व पर उठा सवाल
एक बड़ा विवाद यह है कि इस मुख्य "बोर्ड ऑफ पीस" में किसी भी फिलिस्तीनी प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया है. साथ ही, टोनी ब्लेयर की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अतीत में मध्य पूर्व में उनकी भूमिका की फिलिस्तीनी लोग आलोचना करते रहे हैं. इस योजना को सफल बनाने के लिए तुर्की, कतर, मिस्र और यूएई जैसे देशों का भी एक अलग बोर्ड बनाया गया है जो प्रशासन में मदद करेगा.
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IND vs NZ: क्या इतिहास रचने में कामयाब हो पाएगी न्यूजीलैंड? कीवी टीम ने भारत में अब तक नहीं किया ये कारनामा
India vs New Zealand 3rd ODI: भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा और आखिरी वनडे मैच 18 जनवरी को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेला जाएगा. सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है. ऐसे में तीसरा वनडे मैच निर्णायक होगा. होल्कर स्टेडियम में टीम इंडिया अब तक एक भी वनडे मैच नहीं हारी है. ऐसे में भारतीय टीम अपने इस दबदबे को कायम रखना चाहेगी. वहीं न्यूजीलैंड की टीम इतिहास रचने के इरादे से उतरेगी.
भारत में न्यूजीलैंड का वनडे में खराब रिकॉर्ड
न्यूजीलैंड की टीम भारत में अब तक एक भी द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीतने में कामयाब नहीं हुई है. कीवी टीम ने भारत में अब तक कुल 7 द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेली है और सभी में हार का सामना किया है. इतना ही नहीं भारत में न्यूजीलैंड की टीम ने टीम इंडिया के खिलाफ अब तक कुल 41 वनडे मैच खेली है, लेकिन हैरान करने वाली बात है कि कीवी टीम को सिर्फ 9 मैचों में जीत मिली है.
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वहीं टीम इंडिया की बात करें तो साल 2019 के बाद से घर पर एक भी द्विपक्षीय वनडे सीरीज नहीं गंवाई है. तब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया को सीरीज में हार मिली थी. 0-2 से पिछड़ने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने शानदार वापसी करते हुए भारतीय टीम को 3-2 से हराया था. अब एक बार फिर से घर में सीरीज खतरे में नजर आ रही है.
न्यूजीलैंड के पास इतिहास रचने का मौका
न्यूजीलैंड की टीम साल 189 से द्विपक्षीय वनडे सीरीज के लिए भारतीय दौरा कर रही है, लेकिन अब तक कीवी टीम एक बार भी सीरीज नहीं जीत पाई है, लेकिन अब उसके पास पहली बार भारत में वनडे सीरीज जीतने का मौका है. इंदौर के मैदान पर एक नया रिकॉर्ड बनते नजर आ सकता है. हालांकि न्यूजीलैंड के लिए यह आसान नहीं होगा, लेकिन भारतीय गेंदबाज कुछ खास कमाल नहीं कर पा रहे हैं. तीसरे वनडे मैच में भी भारतीय बॉलर रन लुटाए तो न्यूजीलैंड पहली बार भारत में वनडे सीरीज जीत सकती है.
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