विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को कहा कि तथाकथित 'ब्रिक्स नौसेना अभ्यास' पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की पहल थी जिसमें कुछ ब्रिक्स सदस्य देशों ने भाग लिया था। भारत की 'ब्रिक्स नौसेना अभ्यास' में भागीदारी न करने से संबंधित टिप्पणियों का जवाब देते हुए जायसवाल ने कहा कि यह कोई नियमित या संस्थागत ब्रिक्स गतिविधि नहीं थी और न ही सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने इसमें भाग लिया था। विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा हम स्पष्ट करते हैं कि विचाराधीन अभ्यास पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की पहल थी जिसमें कुछ ब्रिक्स सदस्य देशों ने भाग लिया था। यह कोई नियमित या संस्थागत ब्रिक्स गतिविधि नहीं थी और न ही सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने इसमें भाग लिया था। भारत ने पहले कभी इस तरह की गतिविधियों में भाग नहीं लिया है। इस संदर्भ में भारत जिस नियमित अभ्यास में भाग लेता है, वह आईबीएसएएमआर समुद्री अभ्यास है जिसमें भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं एक साथ आती हैं। आईबीएसएएमआर का पिछला संस्करण अक्टूबर 2024 में आयोजित किया गया था।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स ब्लॉक के कई सदस्य देशों, जिनमें चीन, रूस और ईरान शामिल हैं, के संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दक्षिण अफ्रीका के तट के पास शुरू हो गए हैं। दक्षिण अफ्रीका ने इन अभ्यासों को वैश्विक स्तर पर बढ़ते समुद्री तनावों के जवाब में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। शनिवार से शुरू हुए एक सप्ताह तक चलने वाले 'विल फॉर पीस 2026' अभ्यास का नेतृत्व चीन साइमन टाउन में कर रहा है, जहां हिंद महासागर अटलांटिक महासागर से मिलता है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन अभ्यासों में बचाव और समुद्री हमले के अभियानों के अभ्यास और तकनीकी आदान-प्रदान शामिल होंगे। भाग लेने वाले देशों के युद्धपोतों के साथ ये अभ्यास दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच हो रहे हैं। वाशिंगटन ब्रिक्स ब्लॉक को एक आर्थिक खतरा मानता है।
ब्रिक्स शब्द इसके संस्थापक सदस्य देशों - ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका - के शुरुआती अक्षरों से मिलकर बना है, और दक्षिण अफ्रीका वर्तमान में इसकी अध्यक्षता कर रहा है। हालांकि, अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और ब्राजील ने अभ्यास में भाग नहीं लिया। चीन और ईरान ने विध्वंसक पोत भेजे, रूस और संयुक्त अरब अमीरात ने कोरवेट भेजे और दक्षिण अफ्रीका ने एक मध्यम आकार का फ्रिगेट तैनात किया।
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एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टेरिफ को हथियार की तरह लेकर पूरे दुनिया में घूम रहे हैं। जहां वो कभी भी किसी भी देश को इससे डराने की कोशिश करने लगते हैं। सबसे हाल में उन्होंने यूरोपीय देशों को डराया है। जहां ग्रीनलैंड में उनके खिलाफ जाने पर टेरिफ लगाने की धमकी दी है। लेकिन वहीं अब भारत के जवाब से अमेरिका में हड़कंप मचा हुआ है। यह जवाब भारत ने टैरिफ लगा कर ही दिया है और अमेरिका में मांग उठने लगी है कि भारत से रिक्वेस्ट की जाए राहत देने की। दरअसल भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात चल रही है और इसी बातचीत के बीच अब भारत की तरफ से दालों के ऊपर लगाए गए टैरिफ को लेकर यह मांग उठने लगी है।
जहां अमेरिकी सेनेटरों ने भारत द्वारा दालों पर लगाए गए 30% टैरिफ को हटाने की मांग की है। आपको बता दें सेनेटर अमेरिकी कांग्रेस यानी वहां के संसद में अपने राज्य के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं और इन्हीं चुने हुए प्रतिनिधियों ने अब भारत के द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में भारत अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट में दलहन वाली फसलों के लिए अनुकूल प्रावधान शामिल करने की मांग की गई है। यानी कि सीनेटर अमेरिका को फायदा देने वाले प्रावधान लाने की अपील कर रहे हैं। इन सेनेटरों का कहना है कि भारत को अमेरिकी पीली मटर पर लगाया गया 30% का टैक्स हटाना चाहिए।
चिट्ठी में आगे बताया गया कि नॉर्थ डकोटा और मॉनटाना अमेरिका में मटर और दूसरी दलहन फसलों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं। वहीं भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है जो वैश्विक खपत का करीब 27% हिस्सा अकेले इस्तेमाल करता है। अमेरिकी सेनेटों ने आगे इस पत्र में लिखा भारत में मसूर, चना, सूखी बींस और मटर जैसे ज्यादा खाए जाने वाले दालें हैं। इसके बावजूद अमेरिकी दालों पर भारी टेररिफ लगाया गया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजार में अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बेचने में नुकसान उठाना पड़ रहा है। चिट्ठी में आगे बात की गई कि भारत ने 30 अक्टूबर 2025 को पीली मटर पर 30% टेरिफ लगाया था जो 1 नवंबर 2025 से लागू हो चुका है।
अमेरिकी सेनेटरों के द्वारा यह मांग ऐसे समय में आई है जब हाल ही में जानकारी सामने आई कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कई चरणों की बातचीत हो चुकी है और जल्द ही इसको लेकर कोई ऐलान हो सकता है। इसलिए अब अमेरिका के भीतर से यह मांग उठ रही है और राष्ट्रपति ट्रंप से उनके ही देश के लोग भारत से बात करने की मांग कर रहे हैं। आपको बता दें कि भारत ने भी अमेरिकी टेरिफ को देखते हुए कई चीजों पर टेरिफ को बढ़ा दिया था। जिसमें से दाल भी शामिल है।
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