Exclusive Interview: पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा ने राहु-केतु को लेकर बताई ये बात
Rahu Ketu Exclusive Interview: राहु-केतु फिल्म की कास्ट ने हाल ही में न्यूज नेशन से खास बातचीत की जहां पुलकित सम्राट ने बताया कि उन्होंने इस स्क्रिप्ट के लिए हां क्यों कहा. पुलकित ने इंटरव्यू में बताया कि स्टोरी में फ्रेशनेस और चरक्टेर्स में गहराई थी. जिसने पुलकित को कहानी से तुरंत कनेक्ट किया. वहीं वरुण ने माना कि शुरुआत में उनके मन में डर था कि कहीं ऑडियंस ये न कह दे, 'की कास्ट पहले जैसी है कही सब रिपीट तो नहीं होगा, लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उनका भरोसा पक्का हो गया कि ये फिल्म कुछ अलग है. इंटरव्यू में वरुण शर्मा ने कंटेंट की इम्पोर्टेंस पर जोर देते हुए गुजराती फिल्म लालो का उदाहरण दिया और कहा कि जरूरी नहीं हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हो, बल्कि स्ट्रांग कंटेंट ही असली हीरो होता है. वरुण ने ये भी शेयर किया कि जब अमिताभ बच्चन ने राहु-केतु का ट्रेलर शेयर किया, तो वो पल उनके लिए बेहद इमोशनल और करियर का सबसे बड़ा मोमेंट था. इंटरव्यू के दूसरे हिस्से में पुलकित ने बताया कि करीब 3 साल बाद उनका और वरुण का कोलैबोरेशन इसलिए हुआ क्योंकि उनका मानना था कि फुकरे के अलावा किसी और फिल्म में साथ काम करेंगे तो स्क्रिप्ट स्ट्रांग होनी चाहिए. पुलकित ने फुकरे के सफर को याद करते हुए कहा कि रिलीज के एक हफ्ते बाद ही वो ब्लॉकबस्टर बन गई थी. वहीं वरुण ने बताया कि वो किसी भी स्क्रिप्ट को फाइनल करने से पहले अपनी मम्मी से सुझाव लेते हैं.
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सावधान! वनों की कटाई से बढ़ा महामारी का खतरा, जंगली मच्छर फैला सकते हैं खतरनाक रोग
ब्राजील के समुद्री तट के साथ फैला अटलांटिक फॉरेस्ट कभी पक्षियों, एंफीबियंस, रेपटाइल्स और मछलियों की सैकड़ों प्रजातियों का घर था. लेकिन मानव विकास और वनों की कटाई ने इसे इसकी मूल संरचना के लगभग एक तिहाई तक सीमित कर दिया है. जैसे जैसे इंसान पहले से सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, वहां का पारिस्थितिकी संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है.
स्टडी क्या कहती है?
यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Frontiers in Ecology and Evolution में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और Oswaldo Cruz Institute के जीवविज्ञानी डॉ. जेरोनिमो एलेंकार के अनुसार, अटलांटिक फॉरेस्ट के अवशेष क्षेत्रों में पकड़े गए मच्छरों ने इंसानों से खून लेने की स्पष्ट प्राथमिकता दिखाई.
मच्छरों के भोजन का पता कैसे लगाया गया?
शोधकर्ताओं ने रियो डी जेनेरियो राज्य के दो संरक्षित क्षेत्रों में लाइट ट्रैप लगाए. इनमें सिटियो रेकांटो प्रेजर्वार और ग्वापियाकू नदी पारिस्थितिक रिजर्व शामिल थे. हाल ही में खून पी चुकी मादा मच्छरों को अलग कर प्रयोगशाला में उनके पेट में मौजूद रक्त से डीएनए निकाला गया. एक विशेष जीन की मदद से यह पहचाना गया कि मच्छरों ने किस प्रजाति को काटा था.
इंसान बने प्रमुख रक्त स्रोत
कुल 1,714 मच्छर 52 प्रजातियों से एकत्र किए गए. इनमें से 145 मादा मच्छरों में रक्त पाया गया. केवल 24 मामलों में रक्त स्रोत की पहचान हो सकी, जिनमें 18 इंसान थे. इसके अलावा कुछ पक्षी, एक उभयचर, एक कैनिड और एक चूहा भी शामिल था. कुछ मच्छरों में मिश्रित भोजन पाया गया, यानी उन्होंने एक से अधिक प्रजातियों को काटा था.
रोग फैलने का बढ़ता खतरा
अध्ययन के सह लेखक और Federal University of Rio de Janeiro के शोधकर्ता डॉ. सर्जियो मचाडो का कहना है कि इतने विविध पारिस्थितिक तंत्र में इंसानों को प्राथमिकता देना रोग संचरण के जोखिम को काफी बढ़ा देता है. इस क्षेत्र में मच्छर पीत ज्वर, डेंगू, जीका, मायारो और चिकनगुनिया जैसे वायरस फैला सकते हैं.
भविष्य की चेतावनी
वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे जैसे प्राकृतिक मेज़बान कम होते जाएंगे, मच्छर इंसानों पर और अधिक निर्भर होंगे. यह स्थिति वन किनारे रहने वाले समुदायों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, मच्छरों की भोजन आदतों को समझना निगरानी, रोकथाम और दीर्घकालिक नियंत्रण रणनीतियों के लिए बेहद जरूरी है.
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