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असम के लोक संगीत से NASA के Cosmic Rhapsody तक, Joi Barua का सुरम्य सफर, जो संगीत को ले गया सितारों के पार

NASA के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'कॉस्मिक रैप्सोडी' (Cosmic Rhapsody) से जुड़ने से बहुत पहले से ही गायक, गीतकार और संगीतकार जॉय बरुआ (Joi Barua) अपने संगीत में ब्रह्मांड की विभिन्न ध्वनियों को पिरो रहे थे। चार साल की उम्र में पिता से मिले वायलिन से शुरू हुआ उनका सफर असम के लोक संगीत, भूपेन हजारिका के प्रभाव, बीटल्स, स्टिंग और U2 जैसे वैश्विक दिग्गजों से होता हुआ अब अंतरिक्ष के विशाल कैनवास तक पहुँच गया है।

मरते हुए तारों, तारों की धूल (Stardust) और नई दुनिया की रचना पर आधारित अंतरराष्ट्रीय परफॉर्मिंग-आर्ट्स प्रोडक्शन 'कॉस्मिक रैप्सोडी' में जॉय बरुआ प्रमुख भारतीय संगीतकार के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ रहे हैं। तो आइए उनके बारे में और जानें।

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असम में जन्मे गायक, गीतकार और संगीतकार बरुआ 'कॉस्मिक रैप्सोडी' के मुख्य भारतीय कलाकारों में से एक हैं। यह एक इंटरनेशनल परफॉर्मिंग-आर्ट्स प्रोडक्शन है, जिसका NASA के कॉम्पटन स्पेक्ट्रोमीटर एंड इमेजर (COSI) मिशन से एक खास जुड़ाव है। उन्होंने इसके दो मुख्य गानों - 'स्टार अमंग द कॉस्मिक क्लाउड्स' और 'कॉन्फेटी स्टॉर्म' - के लिए धुनें तैयार कीं। बाद में, फ्रेंच संगीतकार और अरेंजर मनु मार्टिन के साथ मिलकर 'कॉन्फेटी स्टॉर्म' को 'कॉन्फेटी स्टार-आयन' का रूप दिया गया।

ये गाने सुसान लिम ने लिखे थे और इनमें दिखाई गई कल्पना COSI द्वारा की जा रही वैज्ञानिक खोज के बहुत करीब है। यह मिशन सुपरनोवा जैसी अंतरिक्ष की घटनाओं से निकलने वाली सॉफ्ट गामा किरणों का अध्ययन करता है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि तारे उन तत्वों को कैसे बनाते हैं जिनसे आखिरकार जीवन और ब्रह्मांड का निर्माण होता है।

यह एक खूबसूरत संयोग है, लेकिन एक अहम बात ध्यान देने वाली है: 'कॉस्मिक रैप्सोडी' NASA का प्रोडक्शन नहीं है। COSI से इसका जुड़ाव इस बात को लेकर बनी आपसी दिलचस्पी से हुआ कि जब कोई तारा मरता है और अपना पदार्थ बिखेरता है, तो क्या होता है - वह पदार्थ जिससे कुछ नया बन सकता है।

असम में वायलिन से लेकर मुंबई के स्टूडियो तक
बरुआ की अपनी कहानी में भी इसी तरह का सफर दिखता है। असम के डिगबोई में जन्मे जयंत बरुआ को चार साल की उम्र में उनके पिता से वायलिन मिला था। कुछ साल बाद, जब उनका परिवार जोरहाट चला गया, तो उनकी बहन ने उन्हें क्लिफ रिचर्ड का गाना 'बैचलर बॉय' सिखाया और उन्हें एक कॉम्पिटिशन के मंच तक पहुँचाया। वह जीत गए।

उनके स्कूल की प्रिंसिपल, सिस्टर मैबिलिया ने भी उनका हौसला बढ़ाया। उनके आस-पास की संगीत की दुनिया ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया। उनके बढ़ते म्यूज़िकल सफ़र में असमिया लोक संगीत और भूपेन हज़ारिका के साथ-साथ बीटल्स, स्टिंग और U2 जैसे नाम भी शामिल थे। क्लासिकल संगीतकार ए.आर. रहमान और एल. सुब्रमण्यम ने इस मिश्रण में और रंग भरे।

शिलांग और गुवाहाटी में पढ़ाई करने के बाद, बरुआ आखिरकार असमिया संगीतकार ज़ुबीन गर्ग की मदद से मुंबई चले गए। इस शहर ने उन्हें एक अलग तरह की सीख दी। उन्होंने वोडाफ़ोन, नेस्कैफ़े, रिलायंस और LG जैसे ब्रांड्स के लिए एडवरटाइज़िंग जिंगल्स से शुरुआत की और बाद में बैकग्राउंड वोकल्स और प्लेबैक सिंगिंग की ओर बढ़े।

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उनकी आवाज़ और कंपोज़िशन बाद में 'देव.डी', 'उड़ान', 'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा', 'एजेंट विनोद' और 'मुन्ना भाई' फ़िल्मों में सुनाई दिए। उन्होंने 'मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ' और 'लैला मजनू' पर भी काम किया। अपने बैंड 'जोई' के लीड वोकलिस्ट के तौर पर, उन्होंने असमिया एल्बम 'जोई: लुकिंग आउट ऑफ़ द विंडो' रिलीज़ किया और 'बिग असमिया म्यूज़िक अवार्ड्स' में 'बेस्ट न्यूकमर वोकलिस्ट' का अवॉर्ड जीता।

एक बड़े मंच पर स्थानीय आवाज़
हालांकि, संगीत ही बरुआ के काम का एकमात्र पहलू नहीं रहा है। उन्होंने असम में पर्यावरण संरक्षण, खासकर वहां के रेनफ़ॉरेस्ट और स्थानीय पहचान को बचाने की ज़रूरत के बारे में बात की है।

उनका अंतरराष्ट्रीय सफ़र 'कॉस्मिक रैप्सोडी' से पहले आए 'ALAN' म्यूज़िकल प्रोजेक्ट के साथ ही शुरू हो गया था। उन्होंने एबे रोड पर लंदन सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा के साथ रिकॉर्डिंग की और रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा द्वारा उनके काम को पेश किए जाने वाले पहले असमिया संगीतकार बने।

'कॉस्मिक रैप्सोडी' उस सफ़र को कई कदम आगे ले जाती है। डॉक्टर-साइंटिस्ट और कहानीकार सुज़ैन लिम और क्रिस्टीना टीन्ज़ टैन द्वारा बनाई गई 'ALAN' ट्रिलॉजी का दूसरा भाग, AI-इनेबल्ड साथी 'ALAN' की कहानी है, जो एक "ALANaut" बन जाता है और एक इंसानी साथी के साथ अंतरिक्ष की यात्रा करता है। इसकी सेटिंग भले ही अंतरिक्ष की हो, लेकिन इसके सवाल ज़मीन से जुड़े हैं: ग्रहों का नवीनीकरण, जलवायु के प्रति लचीलापन और पारिस्थितिक सुधार।

इस प्रोडक्शन में ऑर्केस्ट्रल म्यूज़िक, सिम्फोनिक पॉप, एनिमेशन और कहानी कहने की कला का संगम है। असमिया कलाकार समुद्र काजल सैकिया विज़ुअल्स तैयार करते हैं, जबकि मार्टिन बड़े ऑर्केस्ट्रल स्कोर की देखरेख करते हैं।

लिम और टैन द्वारा बरुआ का पुराना काम सुनने के बाद उन्हें इस प्रोजेक्ट में शामिल करने वाले शुरुआती संगीतकारों में से एक बरुआ थे। COSI से जुड़ाव बाद में हुआ, जब इसके बनाने वाले कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले की स्पेस साइंसेज़ लैबोरेटरी गए, जहाँ यह मिशन प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर जॉन टॉमसिक की देखरेख में चल रहा है। अचानक, कहानी के केंद्र में मौजूद मरते हुए तारे का एक वैज्ञानिक पहलू भी सामने आया।

और फिर आई स्टारडस्ट (तारों की धूल) की बात
बरुआ के लिए, सबसे भावुक करने वाली बात शायद यह है कि इस कहानी के लिए उन्हें असम को पीछे नहीं छोड़ना पड़ा। उनकी धुनों में उस जगह की झलक मिलती है जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी, भले ही वे ऑर्केस्ट्रा, एनिमेशन और ब्रह्मांड की कहानी के ज़रिए आगे बढ़ती हैं।

उन्होंने COSI से जुड़े एक प्रोजेक्ट में योगदान देने को विनम्रता का अनुभव बताया है, साथ ही संस्कृति और विज्ञान, दोनों के ज़रिए ब्रह्मांड के साथ भारत के पुराने रिश्ते की ओर भी इशारा किया है।

यह विचार उस संगीतकार के लिए बिल्कुल सही लगता है जिसका सफ़र डिगबोई में बच्चों वाले वायलिन से शुरू हुआ था। उनका काम असम की परंपराओं से मुंबई के स्टूडियो तक, एबे रोड से इंटरनेशनल ऑर्केस्ट्रा तक और अब हॉलीवुड बाउल तक पहुँचा है।

'कॉस्मिक रैप्सोडी' का प्रीमियर 27 जुलाई, 2027 को हॉलीवुड बाउल में लॉस एंजिल्स फिलहारमोनिक और पियानोवादक जीन-यवेस थिबॉडेट के साथ होना है। यह नासा के केप कैनावेरल से प्रस्तावित COSI लॉन्च से पहले होगा।

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Rani Mukerji की माँ कृष्णा मुखर्जी का 75 वर्ष की उम्र में निधन, बॉलीवुड में शोक की लहर


बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी माँ कृष्णा मुखर्जी का मंगलवार, 22 सितंबर को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इस दुखद खबर की पुष्टि यश राज फिल्म्स (YRF) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर की है। हालांकि, उनके निधन के कारणों के बारे में अभी कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। कृष्णा मुखर्जी के निधन की खबर सामने आते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

YRF के बयान में कहा गया, "भारी मन से हम यह जानकारी दे रहे हैं कि रानी मुखर्जी की माँ श्रीमती कृष्णा मुखर्जी (75) का आज दोपहर निधन हो गया। परिवार आपके प्यार, प्रार्थनाओं और समर्थन के लिए बहुत आभारी है और इस गहरे दुख के समय में सम्मानपूर्वक प्राइवेसी बनाए रखने का अनुरोध करता है।"

कृष्णा मुखर्जी को कई सालों से कई पब्लिक इवेंट्स में एक्टर के साथ देखा जाता रहा है और वे लोगों के बीच जानी-पहचानी हस्ती थीं।

रानी ने अक्सर अपनी माँ के साथ अपने करीबी रिश्ते के बारे में बात की है। कृष्णा मुखर्जी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से भी जुड़ी थीं और उन्होंने प्लेबैक सिंगर के तौर पर काम किया था।

रानी मुखर्जी का करियर
अपनी मां के बेहद करीब रहने वाली रानी मुखर्जी ने भारतीय सिनेमा को 'गुलाम', 'कुछ कुछ होता है', 'साथिया', 'हम तुम', 'ब्लैक' और 'हिचकी' जैसी कई यादगार फिल्में दी हैं। हाल ही में वे 2026 में रिलीज हुई अपनी बहुचर्चित फिल्म 'मर्दानी 3' में एक बार फिर निडर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के मुख्य किरदार में नजर आई थीं।

दुख की इस घड़ी में पूरी फिल्म इंडस्ट्री, सह-कलाकार और प्रशंसक सोशल मीडिया के जरिए मुखर्जी परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं और दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना कर रहे हैं।

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Asian Games 2026: सुचिका तारियाल के ऐतिहासिक MMA ब्रॉन्ज और महिला क्रिकेट टीम के गोल्ड पर PM मोदी ने दी बधाई

Asian Games 2026: जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ऐतिहासिक MMA मेडल और महिला क्रिकेट में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय MMA खिलाड़ी सुचिका तारियाल और महिला क्रिकेट टीम को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी है।

सुचिका तारियाल ने महिलाओं की ट्रेडिशनल मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की -60 किलोग्राम कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में पीएम मोदी ने उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया और उनके समर्पण व जज्बे की तारीफ की।

सुचिका ने क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर अपना मेडल पक्का किया था। इसके साथ ही उन्होंने भारत के लिए MMA में पहला एशियन गेम्स मेडल सुनिश्चित कर दिया। सुचिका इससे पहले राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।

वहीं, भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम ने श्रीलंका को हराकर गोल्ड अपने नाम किया। खास बात यह है कि यह पिछले एशियन गेम्स के महिला क्रिकेट फाइनल का भी दोहराव रहा। भारतीय टीम ने एक बार फिर श्रीलंका को हराकर अपना खिताब बरकरार रखा।

महिला क्रिकेट टीम की इस जीत के साथ भारत ने मौजूदा एशियन गेम्स में अपना पहला गोल्ड हासिल किया। पीएम मोदी ने टीम को बधाई देते हुए इसे भारतीय क्रिकेट के लिए शानदार जीत बताया। उन्होंने टीम के आत्मविश्वास, कौशल और बेहतरीन टीमवर्क की तारीफ की। साथ ही कहा कि इस जीत से देश के युवा क्रिकेटरों को प्रेरणा मिलेगी।

पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि महिला क्रिकेट टीम ने देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने पूरी टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

इस तरह एशियन गेम्स 2026 में सुचिका तारियाल का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज और भारतीय महिला क्रिकेट टीम का गोल्ड भारत के अभियान के दो अहम पड़ाव बन गए हैं। एक तरफ MMA में भारत ने पहली बार पदक जीता, तो दूसरी तरफ महिला क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का खिताब अपने नाम किया।

Tue, 22 Sep 2026 18:03:10 +0530

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