लंदन में बिना पैंट के घूम रहे हैं महिला-पुरुष, वायरल हो रहा है वीडियो
लंदन में नो ट्राउजर्स ट्यूब राइड मनाया गया. ये हर साल होने वाला एक खास आयोजन है. इस आयोजन के दौरान लंदन मेट्रो में सैकड़ों लोग बिना पैंट के मेट्रो में सफर कर हुए दिखाई दिए. इस आयोजन का उद्देश्य है सर्दियों के मौसम में लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना है. इस साल 11 जनवरी को खास आयोजन हुआ.
साल 2002 में पहली बार हुआ था आयोजन
नो ट्राउजर्स ट्यूब राइड आयोजन में लोग ऊपर से जैकेट, कोट और स्वेटर पहनते हैं लेकिन नीचे सिर्फ अंडरवियर. मेट्रो में सफर कर रहे दूसरे यात्रियों को ये देखकर हैरान तो हुई लेकिन उन्हें हंसी भी आई और लोगों को हंसाना ही इस फेस्टिवल का मकसद है. पहली बार ये खास आयोजन साल 2002 में न्यूयॉर्क में शुरू हुआ था और अब ये प्रचलन प्राग, वाशिंगटन और बर्लिन जैसे विभिन्न शहरों में भी होता है.
VIDEO: ???????? ???? Londoners go trousers-free on city's underground.
— Eddie Du (@Edourdoo) January 13, 2026
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कार्यक्रम के आयोजक ने बताया, आयोजन का कारण
कार्यक्रम के आयोजक डेव सेल्किर्क ने कहा कि ये आयोजन सिर्फ मजे के लिए है. आजकल बहुत कुछ गलत और परेशान करने वाला चल रहा है. ऐेसे में सिर्फ खुशी के लिए कुछ करना अच्छा लगता है. लंदन में इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग पहले चाइनाटाउन इलाके में इकट्ठा हुए. इसके बाद वे लोग पिकाडिली सर्कस अंडरग्राउंड स्टेशन पहुंचे और ट्रेन में सवार हो गए. वहां मौजूद कुछ पर्यटक ये देखकर हैरान रह गए. कुछ लोगों ने उनके साथ सेल्फी भी ली.
लंदन में पहली बार कब हुआ था आयोजन?
लंदन में पहली बार साल 2009 में ये आयोजन हुआ था, जिसके बाद से हर साल इसका आयोजन होता है. कार्यक्रम में हर उम्र और अलग-अलग सोच वाले लोग शामिल होते हैं.
ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन को महीनेभर से ज्यादा समय बीता, कितना प्रभावी रहा ये फैसला?
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस फैसले को लागू हुए करीब एक महीना हो गया। क्या आप जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में इस फैसले के लागू होने के बाद की जमीनी हकीकत क्या है।
यूरो न्यूज ने बताया कि एक महीने के अंदर सोशल मीडिया कंपनियों ने नाबालिगों के लगभग 50 लाख अकाउंट हटा दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ने बताया कि सोशल मीडिया कंपनियों ने 10 दिसंबर से लागू हुए कानून का पालन करने के लिए 16 साल से कम उम्र के लोगों के लगभग 4.7 मिलियन अकाउंट हटा दिए हैं।
ई-सेफ्टी कमिश्नर ने कहा कि इस सिलसिले में गुरुवार को एक डाटा भी जारी किया गया। यह डाटा इस बात का शुरुआती संकेत है कि बड़े प्लेटफॉर्म 16 साल से कम उम्र के लोगों को अकाउंट रखने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं।
ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने कहा, मैं इन शुरुआती नतीजों से बहुत खुश हूं। यह साफ है कि डिजिटल सुरक्षा की रेगुलेटरी गाइडेंस और प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ाव पहले से ही अच्छे नतीजे दे रहा है।
ये आंकड़े कम्प्लायंस पर पहला सरकारी डाटा हैं। इसके अनुसार, टेक कंपनियां नियमों का पालन करने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं। डेनमार्क जैसे दूसरे देश पहले से ही ऐसे ही कानूनों पर नजर रखे हुए हैं।
नॉर्डिक देश ने नवंबर में घोषणा की थी कि उसने 15 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए सोशल मीडिया का एक्सेस ब्लॉक करने के लिए एक समझौता किया है। इसे 2026 के मध्य तक कानून बनाया जा सकता है। नॉर्डिक देश उत्तरी यूरोप के पांच संप्रभु राष्ट्रों (डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड) और उनके संबंधित स्वायत्त क्षेत्रों (ग्रीनलैंड, फरो आइलैंड्स, आलैंड) का एक समूह है।
इन नियमों का उल्लंघन होने पर प्लेटफॉर्म पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है। इनमैन ग्रांट ने माना कि कुछ 16 साल से कम उम्र के अकाउंट अभी सक्रिय हैं और कहा, हालांकि कुछ बच्चे सोशल मीडिया पर बने रहने के लिए क्रिएटिव तरीके ढूंढ सकते हैं, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि समाज में हमारे दूसरे सुरक्षा कानूनों की तरह, सफलता नुकसान को कम करने और कल्चरल नियमों को फिर से सेट करने से मापी जाती है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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