पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ट्रक शनिवार को घने कोहरे के कारण पुल से गिर गया, जिससे छह बच्चों समेत कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई।
यह दुर्घटना लाहौर से लगभग 200 किलोमीटर दूर सरगोधा जिले के कोट मोमिन में तड़के हुई।
पंजाब आपात सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ के प्रवक्ता के अनुसार ट्रक में 23 लोग सवार थे, जिनमें से ज्यादातर एक ही परिवार के सदस्य थे, जो इस्लामाबाद से फैसलाबाद में एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भारी कोहरे के कारण राजमार्ग बंद होने के कारण ट्रक स्थानीय मार्ग से जा रहा था। दृश्यता का स्तर कम होने के कारण चालक का वाहन पर से नियंत्रण खो जाने से यह वाहन कोट मोमिन तहसील के गलापुर पुल से एक सूखी नहर में गिर गया।’’
उन्होंने बताया कि मृतकों में शामिल 14 लोगों में छह बच्चे और पांच महिलाएं शामिल थीं। उन्होंने बताया कि नौ लोग घायल हो गये और उनका इलाज कोट मोमिन के सिविल अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
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बलूचिस्तान में सरकारी कर्मचारियों ने अपने लंबे समय से चल रहे विरोध आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया है कि यह अभियान निर्णायक चरण में पहुंच गया है और 20 जनवरी को क्वेटा में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम वेतन में लगातार भेदभाव और आधिकारिक उदासीनता को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, ग्रैंड अलायंस बलूचिस्तान के बैनर तले प्रांत भर के कर्मचारी बड़ी संख्या में क्वेटा जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि अपनी मांगों को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित प्रदर्शन में भाग ले सकें। गठबंधन कम वेतन पाने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए 30 प्रतिशत असमानता कटौती भत्ता (डीआरए) लागू करने की मांग कर रहा है, उनका तर्क है कि प्रांतीय विभागों में बढ़ती आय असमानता को पाटने के लिए यह कदम आवश्यक है।
गठबंधन के नेताओं ने कहा कि कठिन आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में महीनों से चल रहे प्रदर्शनों के बाद विरोध प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। उन्होंने जोर दिया कि आगामी रैली की सफलता लगभग 250,000 सरकारी कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है और श्रमिकों से बिना देरी किए क्वेटा पहुंचने और अनुशासन, एकता और शांतिपूर्ण रुख बनाए रखने का आग्रह किया।
दर्जनों विभागों के सरकारी कर्मचारी प्रस्तावित वेतन वृद्धि अध्यादेश (डीआरए) के माध्यम से वेतन असमानताओं को समाप्त करने की मांग को लेकर लगभग सात महीनों से संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
गठबंधन के प्रमुख अब्दुल कुदूस काकर ने कहा कि अन्य प्रांतों और संघीय सरकार के अधीन कर्मचारियों को पहले ही इसी तरह के भत्ते दिए जा चुके हैं, जबकि बलूचिस्तान इससे वंचित रह गया है। उन्होंने प्रांतीय सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह बढ़ती महंगाई और सरकार द्वारा नियुक्त उस समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज कर रही है, जिसने इस भत्ते का समर्थन किया था, जैसा कि बलूचिस्तान पोस्ट ने प्रकाशित किया है। काकर ने आंतरिक असमानताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राज्यपाल भवन, मुख्यमंत्री सचिवालय, विधानसभा सचिवालय, सिविल सचिवालय और उच्च न्यायालय जैसे संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को अन्य जगहों पर समान श्रेणी के कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक वेतन मिलता है। उन्होंने तर्क दिया कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए डीआरए (DRA) अत्यंत आवश्यक है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गठबंधन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को तुरंत स्वीकार नहीं किया गया तो विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जाएगा और किसी भी प्रकार की हिंसा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
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