Box Office Report: 'हनुमान अंश' का बॉक्स ऑफिस पर गदर, 350 करोड़ के क्लब में मारी एंट्री, जानिए 'दायरा' और 'वाइब' का कैसा है हाल?
Hanuman Ansh Day 46 Enter in 350 Crore Club: विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) बॉक्स ऑफिस पर थमने का नाम ही नहीं ले रही है. इस फिल्म ने अपने साथ रिलीज हुई हर फिल्म का दम निकाल दिया है. इसका मुनाफा दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है और मेकर्स की चांदी ही चांदी हो रही है. सिनेमाघरों में 46 दिन पूरे कर चुकी यह फिल्म घरेलू और ग्लोबल लेवल पर ताबड़तोड़ कमाई में जुटी है.
शोभिनव सत्या और पूर्णिमा तिवारी की यह फिल्म 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी और अब इसका थिएट्रिकल सफर बॉक्स ऑफिस पर एक मिसाल बन चुका है. वहीं, इसके कलेक्शन ने नई रिलीज फिल्म दायरा और वाइब का भी दम निकाल दिया है. आइए देखें, हनुमान अंश ने 46वें दिन बॉक्स ऑफिस पर कितनी कमाई की? करीना कपूर की दायरा और कुणाल खेमू की फिल्म वाइब का चौथे दिन का कलेक्शन कितना है?
'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस डे 46 (Hanuman Ansh Day 46 Collection)
सातवें हफ्ते के वीकेंड पर अच्छी कमाई करने के बाद सोमवार को 'हनुमान अंश' के कलेक्शन में गिरावट दर्ज की गई. Sacnilk की रिपोर्ट के अनुसार, 46वें दिन फिल्म ने लगभग 7,629 शोज के साथ 4 करोड़ रुपये का इंडिया नेट कलेक्शन किया, जो रविवार के 13.75 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 70.9 प्रतिशत कम है. इसके साथ ही फिल्म का कुल घरेलू नेट कलेक्शन 275.88 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
'हनुमान अंश' की वर्ल्डवाइड कमाई
घरेलू बाजार के अलावा 'हनुमान अंश' विदेशों में भी दर्शकों का दिल जीत रही है. फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 325.80 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि ओवरसीज मार्केट से इसने 46वें दिन 0.50 करोड़ रुपये बटोरे. विदेशों में इसका कुल कलेक्शन अब 26.50 करोड़ रुपये हो गया है.
350 करोड़ रुपये के क्लब में मारी एंट्री
भारत और विदेशों के आंकड़ों को मिला दें तो यह फिल्म कुल 352.30 करोड़ रुपये की कमाई के साथ 350 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल हो चुकी है. इतने हफ्तों बाद भी बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का जलवा कायम रहना मेकर्स के लिए जश्न का बड़ा मौका है.
'दायरा' बॉक्स ऑफिस डे 4 (Daayra Day 4 Collection)
दूसरी ओर, बॉक्स ऑफिस पर अन्य फिल्मों का हाल मिलाजुला है. करीना कपूर के लीड रोल वाली फिल्म 'दायरा' को रिलीज हुए चार दिन हो चुके हैं, लेकिन इसकी कमाई बेहद धीमी चल रही है. अपने पहले वीकेंड के तीन दिनों में इसने मात्र 4.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया था.
वर्किंग डे यानी सोमवार को इस फिल्म ने सिर्फ 45 लाख रुपये की कमाई की. इसके साथ ही 'दायरा' का चार दिनों का कुल कलेक्शन सिमटकर केवल 4.95 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो मेकर्स की उम्मीदों से काफी कम है.
'वाइब' बॉक्स ऑफिस डे 4 (Vibe Day 4 Collection)
हाल ही में रिलीज हुई कुणाल खेमू की फिल्म 'वाइब' का हाल 'दायरा' के मुकाबले थोड़ा बेहतर रहा है. अपने ओपनिंग वीकेंड पर 7.45 करोड़ रुपये कमाने वाली इस फिल्म ने सोमवार के वर्किंग डे पर 90 लाख रुपये का कारोबार किया. इसके साथ ही 'वाइब' का कुल कलेक्शन अब तक 8.35 करोड़ रुपये हो गया है, हालांकि इसे भी सिनेमाघरों में और ज्यादा दर्शकों की तलाश है.
'मिर्जापुर द मूवी' बॉक्स ऑफिस डे 18
इसके अलावा, 'मिर्जापुर द मूवी' बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है. फिल्म ने 18वें दिन1.75 करोड़ रुपये कमाए, जबकि वीकेंड पर इसने 12.25 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार किया था. इन आंकड़ों के साथ 'मिर्जापुर द मूवी' का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 217.45 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है और यह सिनेमाघरों में अभी भी डटी हुई है.
Parivartini Ekadashi Vrat Katha: आज है परिवर्तिनी एकादशी, इस कथा के बिना अधूरा है व्रत, यहां पढ़ें कहानी व विष्णु जी की आरती
Parivartini Ekadashi Vrat Katha: आज यानी 22 सितंबर 2026 को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. बता दें कि यह भाद्रपद मास की एकादशी है. इस एकादशी का भी सभी एकादशियों में खास महत्व होता है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इसलिए, इस दिन विधि-विधान के साथ सभी नियमों का पालन करते हुए व्रत रखना चाहिए. इस समय सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में है. परिवर्तिनी एकादशी पर वे क्षीरसागर में करवट बदलते हैं. ऐसे में आज का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है. धार्मिक मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी का फल तभी प्राप्त होता है, जब उस व्रत की कथा का श्रवण किया जाए. इस दिन परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए. चलिए पढ़ते हैं व्रत कथा.
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा (Parivartini Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, एकबार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से कहा कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या महत्व है, इस एकादशी की कथा क्या है. इस एकादशी का व्रत रखने से किस तरह के फलों की प्राप्ति होती है.
भगवान कृष्ण ने कहा- हे राजन... भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. यह एकादशी सभी पापों का नाश करने वाली है. इस एकादशी का व्रत रखने से स्वर्ग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है. इस एकादशी में भगवान विष्णु और उनके पांचवे अवतार वामन स्वरुप की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
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श्रीकृष्ण ने सुनाई कथा
श्रीकृष्ण कथा सुनाते हुए कहते हैं- एक बार राजा बलि ने सभी लोकों पर अपना अधिकार कर लिया. राजा बलि यूं तो राक्षस कुल में पैदा हुए था, लेकिन भगवत भक्त और बहुत बड़ा दानी भी था. सभी लोकों पर राजा बलि का राज होने के बाद राक्षस और दैत्य अत्याचार करने लगे. सभी देवतागण उनके अत्याचारों से परेशान होकर भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे. बैकुंठ लोक पहुंचकर सभी देवताओं ने राजा बलि के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की विनती की. भगवान विष्णु ने देवताओं की प्रार्थना पर अपना पाँचवाँ अवतार वामन स्वरुप में लिया.
राजा बलि के पास वामन अवतार में पहुंचे भगवान विष्णु
एकबार राजा बलि ने एक यज्ञ किया उस यज्ञ स्थल पर भगवान विष्णु वामन स्वरुप में पहुंचे. भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी. राजा बलि ने भी तीन पग भूमि वामन भगवान को दान करने का वचन निभाया. भगवान वामन ने एक पग में पूरा स्वर्ग लोक नाप लिया दूसरे पग में धरती लोक को नाप दिया, इसके बाद वामन भगवान ने राजा बलि से कहा कि तीसरा पग कहां रखूं. तब राजा बलि ने अपना सिर झुकाकर कहा कि आप अपना तीसरा पैर मेरे मस्तक पर रखें. वामन भगवान के सिर पर पैर रखते ही राजा बलि पाताल लोक को चले गये. राजा बलि को पाताल लोक का राजा बनाया. राजा बलि ने भगवान से विनती की कि मुझे आपका दर्शन हर पल होता रहे, तभी से भगवान अपने किसी न किसी रुप में राजा बलि के दरबार में रहते हैं. राजा बलि ने भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन आश्रम में वामन भगवान की मूर्ति स्थापित की. विधि-विधान के साथ व्रत रखकर वामन भगवान की पूजा की. चातुर्मास के चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में रहते हैं, यानि राजा बलि के दरबार में रहते हैं.
परिवर्तिनी एकादशी व्रत करने का महत्व
भगवान कृष्ण ने कहा- कि जो विधि पूर्वक परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु और वामन भगवान की पूजा करते हैं. वे सभी पापों से मुक्त होकर स्वर्ग लोक को जाते हैं. चंद्रमा के समान जीवन में प्रकाशित होते हैं और यश प्राप्त करते हैं. इस एकादशी का व्रत रखने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है. जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं. अंत समय पर उस व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
परिवर्तिनी एकादशी पर इन बातों का रखें ध्यान
परिवर्तिनी एकादशी व्रत को सच्चे मन, वचन और कर्म से सात्विकता बनाए रखने का पूरा प्रयास करना चाहिए. इस दिन किसी के प्रति गुस्सा, द्वेष या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. व्रत रखने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और अधिक से अधिक समय भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए. इस दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता है और इसके अलावा मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से भी पूरी तरह दूरी रखनी चाहिए. इस नियम का पालन व्रत करने वाले भक्तों के साथ-साथ उनके परिवारजनों को भी मानना चाहिए. एकादशी व्रत के दिन दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए.
व्रत कैसे रखें?
व्रत रखने वाले लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रख सकते हैं. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास करने के बजाय फल, दूध या सात्विक आहार लेकर व्रत किया जा सकता है. व्रत में नियम और श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना गया है.
भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti In Hindi)
ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ऊं जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ऊं जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ऊं जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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