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यूपी ट्रेड शो का 25 सितंबर से होगा आगाज, गृह मंत्री अमित शाह करेंगे उद्घाटन

UP Trade Show: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, कारोबारी और निर्यात क्षेत्र को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 सितंबर से शुरू होने वाले इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे, जबकि मेले का समापन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।  

ट्रेड शो 25 से 29 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष यूपीआईटीएस की केंद्रीय थीम ‘अद्वितीय सोर्सिंग का अद्भुत मंच...’ रखी गई है। थीम के माध्यम से उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के कारोबारियों, निवेशकों, खरीदारों तथा उद्योग जगत के लिए एक बड़े सोर्सिंग हब के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया है। आयोजन में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता के साथ-साथ पारंपरिक उत्पादों, आधुनिक तकनीक, निर्यात क्षमता, कृषि आधारित उद्योग और उभरते कारोबारी क्षेत्रों को भी प्रमुखता दी जाएगी।

ये कंपनियां करेंगी प्रदर्शन

ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी), ओडीओसी, मुख्यमंत्री युवा, एमएसएमई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, रक्षा एवं एयरोस्पेस, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा एवं हेल्थकेयर सहित विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां और संस्थाएं अपने उत्पाद एवं क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगी। इसके अलावा, टेक्सटाइल एवं हथकरघा, टाउन ऑफ एक्सीलेंस एक्सपोर्टर्स, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट तथा पर्यटन एवं संस्कृति जैसे क्षेत्रों को भी ट्रेड शो में प्रमुख स्थान दिया गया है। इससे एक ही मंच पर उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्प से लेकर अत्याधुनिक औद्योगिक एवं तकनीकी क्षमताओं तक की झलक देखने को मिलेगी।

36,500 वर्ग मीटर प्रदर्शनी क्षेत्र में लगेगी प्रदर्शनी

यूपीआईटीएस-2026 के लिए ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट के भूतल और द्वितीय तल के विभिन्न हॉल में करीब 36,500 वर्ग मीटर प्रदर्शनी क्षेत्र बुक किया जा चुका है। आयोजन में शामिल होने वाले औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और कॉरपोरेट संस्थाओं के लिए प्रदर्शनी का लेआउट भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। व्यापार मेले में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए निर्धारित स्थानों पर कंपनियां, कारोबारी संस्थाएं और सरकारी विभाग अपने उत्पादों, सेवाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों और उत्पादों को एक ही स्थान पर समझने तथा कारोबारी संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलेगा।

औद्योगिक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं

यूपीआईटीएस-2026 को केवल औद्योगिक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, कारोबारी वातावरण, निर्यात सामर्थ्य, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प, हथकरघा, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इससे प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और उद्यमियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का मंच मिलने की उम्मीद है। आयोजन में एमएसएमई और ओडीओपी जैसे क्षेत्रों की भागीदारी के जरिए छोटे एवं मध्यम उद्यमों तथा स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को भी व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, रक्षा एवं एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की भागीदारी उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे नए औद्योगिक एवं तकनीकी क्षेत्रों को सामने लाएगी। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में प्रदर्शनी क्षेत्र का लेआउट अंतिम रूप दिए जाने के बाद अब आयोजन से जुड़ी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। 25 से 29 सितंबर तक चलने वाला यूपीआईटीएस-2026 उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, कारोबारी, सांस्कृतिक और निर्यात सामर्थ्य को देश-विदेश के सामने प्रस्तुत करने वाले प्रमुख आयोजनों में शामिल होगा।

 (DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)

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उत्तराखंड के गांवों में रोजगार का नया आधार बन रहे होम स्टे, 5 हजार से ज्यादा यूनिट संचालित, 6500 प्रवासी लौटे घर

Uttarakhand Homestays: उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में होम स्टे पर्यटन के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार का भी मजबूत माध्यम बनते जा रहे हैं. राज्य में 5 हजार से ज्यादा होम स्टे संचालित हैं. वहीं, रिवर्स माइग्रेशन के तहत 6,500 से ज्यादा प्रवासी अपने गांव लौट चुके हैं. इनमें करीब 1,500 लोगों ने होम स्टे को अपनी आजीविका का जरिया बनाया है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य पर्यटन को पहाड़ के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाना है, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकें. सरकार का जोर गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने और पलायन को कम करने पर है.

6500 से ज्यादा लोग लौटे गांव

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद शुरू हुए रिवर्स माइग्रेशन के प्रयासों के तहत 6,500 से ज्यादा लोग अपने मूल गांव लौटे हैं. इनमें करीब 22 प्रतिशत लोगों ने होम स्टे के जरिए रोजगार शुरू किया है.

होम स्टे का फायदा केवल इसे चलाने वाले परिवार तक सीमित नहीं रहता. पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय टैक्सी सेवाओं, गाइड, ट्रेकिंग, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और पहाड़ी कृषि उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है. इससे गांवों में छोटे कारोबार और स्वरोजगार के दूसरे अवसर भी पैदा होते हैं.

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सरकारी योजना से मिल रही मदद

उत्तराखंड सरकार होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना चला रही है. सरकार के अनुसार, योजना के तहत अब तक 537 लाभार्थियों को 79.28 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है. इस योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को अपने घरों में पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने और इसे आय का जरिया बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है. आवेदन मिलने के बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति प्रस्ताव की जांच और आवेदक का साक्षात्कार करती है. स्वीकृति के बाद ऋण के लिए प्रस्ताव बैंक को भेजा जाता है.

होम स्टे के लिए क्या हैं नियम?

उत्तराखंड पर्यटन विभाग की योजना संबंधी जानकारी के अनुसार, होम स्टे योजना नगर निगम क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों में लागू है. इसके लिए मकान का आवासीय होना जरूरी है. होम स्टे का मालिक या लीजधारक अपने परिवार के साथ उसी मकान में रहना चाहिए. होम स्टे में पर्यटकों के लिए कम से कम एक और अधिकतम छह कमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा होम स्टे का पंजीकरण कराना भी जरूरी है. संचालक को पर्यटकों के लिए भोजन की व्यवस्था भी करनी होती है.

गांव की संस्कृति से जुड़ रहे पर्यटक

होम स्टे की खासियत यह है कि इससे पर्यटकों को सिर्फ रहने की जगह नहीं मिलती, बल्कि वे स्थानीय जीवनशैली, खान-पान और संस्कृति को भी करीब से समझ सकते हैं. वहीं, स्थानीय परिवारों को अपनी परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है. सरकार के आधिकारिक होम स्टे प्लेटफॉर्म के जरिए पंजीकृत होम स्टे को पर्यटकों तक पहुंच बनाने और प्रचार का भी अवसर मिलता है.

पर्यटन को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर

उत्तराखंड में होम स्टे के अलावा वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना और उत्तराखंड पर्यटन उद्यमी प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाएं भी पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और स्थानीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए संचालित हैं. सरकार का फोकस पर्यटन को गांवों की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है. पहाड़ों में बढ़ते होम स्टे इसी दिशा में एक अहम माध्यम बन रहे हैं. इससे स्थानीय युवाओं को गांव में रहकर कमाई का विकल्प मिल रहा है और पर्यटकों को उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां की संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव भी मिल रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, सरकार का संकल्प है कि पहाड़ के युवाओं को रोजगार के लिए गांव छोड़कर बाहर न जाना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलें.

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