IIT Bombay छात्र की मौत के बाद मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या पर फिर तेज हुई बहस
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के एक छात्र की 18 सितंबर को हुई मौत के बाद संस्थान में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। छात्र परिसर स्थित अपने छात्रावास के कमरे में मृत मिला था। संस्थान के अनुसार, छात्र ने कथित तौर पर मध्य सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटे बाद यह आत्मघाती कदम उठाया। इससे पहले, पिछले महीने आईआईटी दिल्ली के एक छात्र ने आत्महत्या की थी, जिसके बाद परिसर में विरोध और आक्रोश देखने को मिला था। देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थानों में हाल के वर्षों में हुई ऐसी कई मौतों में यह एक और मामला है। छात्रों की आत्महत्या से जुड़े आंकड़ों, आईआईटी और केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों तथा ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच की स्थिति का विवरण इस प्रकार है।
1. आंकड़े क्या बताते हैं? शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2023 में संसद को बताया था कि 2018 से 2023 के बीच पांच वर्ष में आईआईटी में 39 छात्रों ने आत्महत्या की। ‘ग्लोबल आईआईटी एलुमनी सपोर्ट ग्रुप’ की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 वर्ष में छात्रों की 171 अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें से 82 प्रतिशत मामले परिसरों में हुई आत्महत्याओं के हैं।
2. छात्र आत्महत्या पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित राष्ट्रीय कार्यबल ने क्या कहा? उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और आत्महत्या रोकने के लिए गठित राष्ट्रीय कार्यबल ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा कि शिक्षण संस्थानों में ‘‘आत्महत्या की समस्या’’ के पीछे कई कारण हैं। इनमें शैक्षणिक दबाव, जाति आधारित भेदभाव, आर्थिक तनाव, यौन उत्पीड़न और परीक्षा में असफलता जैसे कारण शामिल हैं। जून 2026 में सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में कहा गया कि आईआईटी में शिक्षक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए खुद को पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं मानते। रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत शिक्षकों के पास छात्रों की ऐसी संवेदनशील चिंताओं से निपटने के लिए उचित प्रशिक्षण नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया कि 23 आईआईटी समेत 31 केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों से मिले जवाबों के अनुसार, 18 संस्थानों में कम से कम एक मानसिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता उपलब्ध था। हालांकि, केवल चार संस्थानों ने शिक्षक परामर्श कार्यक्रमों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण और 10 संस्थानों ने छात्र सहायता पहल के लिए औपचारिक प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी दी। कार्यबल ने यह भी कहा कि अलग-अलग संस्थानों में ‘‘काउंसलर’’ शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से किया जाता है, जिससे उपलब्ध प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की वास्तविक संख्या का आकलन करना मुश्किल है।
3. केंद्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं? शिक्षा मंत्रालय ने पिछले महीने संसद को बताया कि उसने उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय क्षमता निर्माण योजना मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमएमटीटीपी) के तहत ‘‘सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य, लचीलापन और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण’’ तैयार किया है। शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने संसद को बताया था कि इसके तहत शिक्षकों के साथ हर पखवाड़े सत्र आयोजित किए जा रहे हैं ताकि वे छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को शुरुआती स्तर पर पहचान सकें और उनका समाधान कर सकें।
4. 2026 में अब तक आईआईटी छात्रों की मौतों से जुड़ी जांच की स्थिति क्या है? आईआईटी दिल्ली ने पिछले महीने 31 वर्षीय एमएससी छात्र की आत्महत्या की जांच के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद गठित यह समिति सितंबर के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। समिति को मौत के कारणों और इसमें संस्थागत स्तर पर किसी चूक की भूमिका की जांच करने का जिम्मा दिया गया है। इस साल की शुरुआत में आईआईटी कानपुर के एक पीएचडी छात्र की आत्महत्या के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 22 जनवरी को तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को यह देखना था कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दिशा-निर्देशों पर अमल कैसे हो रहा है, परामर्श और शिकायत निवारण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है और संस्थागत स्तर पर कहां कमियां हैं। उसे आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। समिति की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। 5. आईआईटी ने क्या कदम उठाए हैं? आईआईटी खड़गपुर ने छात्रों के बीच अलगाव की भावना कम करने और आपसी बातचीत बढ़ाने के उद्देश्य से एक पहल शुरू की है, जिसके तहत शाम के समय बिजली कटौती की जाती है ताकि छात्र इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रहकर एक-दूसरे से बातचीत करें। इसी तरह आईआईटी गुवाहाटी का ‘‘अपने पड़ोसी को जानें’’ अभियान छात्रों के बीच संबंध मजबूत करने पर केंद्रित है। पाठ्यक्रम में बदलाव, परिसर में कल्याण एवं परामर्श केंद्र, ‘वेलनेस वेबसाइट और ऐप’, ‘गेटकीपर’ प्रशिक्षण मॉडल तथा छात्र सहायता समूह जैसी पहलें भी विभिन्न आईआईटी ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और आत्महत्या रोकने के लिए शुरू की हैं।
Mumbai Ahmedabad Bullet Train रूट पर लगीं Movable Crossings, पटरी पर नहीं रहेगा कोई गैप
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट के तहत भारतीय रेलवे नेटवर्क पर पहली बार मूवेबल क्रॉसिंग वाले टर्नआउट (जिन्हें स्विंग-नोज़ क्रॉसिंग भी कहा जाता है) लगाए जा रहे हैं। इस टेक्नोलॉजी को 320 kmph तक की स्पीड पर सुरक्षित और भरोसेमंद ट्रेन ऑपरेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है। एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि मूवेबल-क्रॉसिंग टेक्नोलॉजी आम रेलवे लाइनों पर इस्तेमाल होने वाले फिक्स्ड-क्रॉसिंग टर्नआउट से अलग है और यह हाई-स्पीड रेल सिस्टम का एक अहम हिस्सा है।
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250-300 kmph से ज़्यादा स्पीड पर, फिक्स्ड क्रॉसिंग पर पहिए और पटरी के बीच संपर्क से ज़्यादा डायनामिक फ़ोर्स पैदा होता है, क्योंकि क्रॉसिंग नोज़ पर गैप होता है। इस रुकावट या गैप की वजह से ज़्यादा वाइब्रेशन, स्ट्रक्चर से होने वाला शोर, पहिए के फ्लैंज और क्रॉसिंग के हिस्सों में तेज़ी से घिसाव और ट्रैक में थोड़ी-बहुत खराबी होने पर पहिए का असामान्य व्यवहार जैसी समस्याएं होती हैं। मूवेबल क्रॉसिंग, स्विच रेल्स के साथ तालमेल बिठाकर क्रॉसिंग नोज़ को खिसकाती है, जिससे गैप खत्म हो जाता है। इससे एक लगातार चलने वाली सतह बनती है और टर्नआउट से गुजरते समय पहियों को बिना रुकावट गाइडेंस मिलती है। इस इनोवेशन से ट्रेन का गुज़रना आसान होने, डायनामिक इम्पैक्ट, वाइब्रेशन और अंदर के शोर को कम करने, और रेल्स व रोलिंग स्टॉक की टूट-फूट को घटाने की उम्मीद है।
हाई-स्पीड टर्नआउट्स में दो अलग-अलग पॉइंट मशीनें लगी होती हैं: एक स्विच एंड पर स्विच रेल्स को ऑपरेट और लॉक करने के लिए, और दूसरी मूवेबल क्रॉसिंग नोज़ को ऑपरेट और लॉक करने के लिए। दोनों पॉइंट मशीनें एक कोऑर्डिनेटेड कंट्रोल सिस्टम के तहत काम करती हैं। सिग्नलिंग इंटरलॉकिंग रूट-सेटिंग कमांड से मूवमेंट शुरू होता है, और टर्नआउट पर ट्रेन के मूवमेंट की इजाज़त देने से पहले दोनों मशीनों से पोज़िशन डिटेक्शन और लॉकिंग कन्फर्मेशन ज़रूरी होता है।
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डुअल पॉइंट-मशीन सिस्टम यह पक्का करता है कि दोनों अहम पॉइंट्स पर रेल का रास्ता लगातार बना रहे और मैकेनिकली सुरक्षित रहे। ये हाई-स्पीड पॉइंट मशीनें कड़े टेक्निकल स्टैंडर्ड्स को पूरा करती हैं, जिनमें सटीक स्ट्रोक कंट्रोल, टाइट पोज़िशनिंग टॉलरेंस और मज़बूत लॉकिंग मैकेनिज़्म शामिल हैं, जो तेज़ रफ़्तार पर काम करने के दौरान लगने वाले ज़ोर को झेल सकते हैं। कई तरह की डिटेक्शन और वेरिफिकेशन लेयर्स, स्विच रेल्स और मूवेबल क्रॉसिंग की आखिरी पोज़िशन और मैकेनिकल लॉकिंग पर नज़र रखती हैं। इंटरलॉकिंग रूट को तभी रिलीज़ करती है जब स्वतंत्र जाँच से यह पक्का हो जाता है कि टर्नआउट सही जगह पर है और लॉक है।
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