Acharya Balkrishna Health Tips: सर्दियों में जरूर खाएं चने का साग, आचार्य बालकृष्ण ने बताए फायदे, शरीर भी रहेगा गर्म
Acharya Balkrishna Health Tips: सर्दियों के मौसम अच्छी और स्वादिष्ट सब्जियों से भरा सीजन होता है. इस सीजन में हमें कई प्रकार के साग खाने को मिल जाते हैं. ये हमारे शरीर को गर्म रखने का सबसे असरदार उपाय होते हैं. पतंजलि के आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण ने बताया है कि इस मौसम में हरे चने का साग जरूर खाना चाहिए. इस साग को खाने से शरीर का तापमान गर्म रहता है. आइए जानते हैं इसके फायदे
चने के साग में मौजूद हैं कई गुण
सर्दियों में बिकने वाले इस साग में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं. आचार्य बालकृष्ण ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बताया है कि चने के साग में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और फाइबर होता है. अगर इस सीजन में इसे नियमित रूप से खाया जाए तो शरीर में खून की कमी नहीं होती है. एनीमिया के मरीजों को ये साग जरूर खाना चाहिए.
फायदे ही फायदे हैं चने के साग में
चने के साग में प्रोटीन होता है, जो शरीर को पोषण देने का काम करता है. इस साग में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं. चने के साग को खाने से सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या से निजात मिलता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह साग अत्यंत लाभकारी होता है. चने का साग स्किन की गुणवत्ता को भी बढ़ा सकता है.
सर्दियों में बॉडी को रखें गर्म
चने का साग खाने से शरीर को आंतरिक रूप से प्राकृतिक गर्माहट मिलती है. इस साग में मिनरल्स और आयरन होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को इंप्रूव करता है. इससे सर्दियों में हाथ-पैर ठंडे रहने की समस्या नहीं होती है. चने का साग सर्दियों में खाने से जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या नहीं होती है. चने का साग खाने से गठिया के मरीजों को भी राहत मिलती है. इस साग को खाने से सर्दियों में होने वाली पेट की समस्या जैसे कब्ज या भारीपन भी नहीं होता है. ये साग ओवरईटिंग की समस्या को रोकता है.
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जोधपुर में लगा हैंडीक्राफ्ट Expo, पर्यटन मंत्री ने किया उद्धघाटन, लोगों में दिखा जबरदस्त उत्साह
Rajasthan News: जोधपुर में पहली बार एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट ने ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में चार दिवसीय डॉमेस्टिक फेयर आर्टिफैक्ट्स का आयोजन किया है. यह फेयर खास तौर पर देश के बार्यस और स्थानीय लोगों के लिए आयोजीत किया गया है. इस फेयर में जोधपुर के हस्तशिल्प उत्पादों को आम लोगों तक लाने का प्रयास किया गया है. आमतौर पर जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए तैयार होता था, लेकिन अब लोग सीधे अपने पसंदीदा चीजें खरीद सकेंगे.
मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया शुभारंभ
इस एक्सपो का शुभारंभ केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस एक्सपो का शुभारंभ किया. इस मौके पर ईपीसीएच के डायरेक्टर जनरल डॉ. राकेश कुमार भी मौजूद थे. फेयर 23 से 26 जनवरी तक बोरानाडा स्थित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में चल रहा है. इसमें देशभर के विभिन्न राज्यों के एक्सपोर्टर्स ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं.
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट द्वारा, ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में आयोजित हैंडीक्राफ्ट एक्सपो जोधपुर का उद्घाटन, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री श्री जोगाराम… pic.twitter.com/eZUpUPLeCN
— Government of Rajasthan (@RajGovOfficial) January 17, 2026
एक्सपो हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण कदम
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह एक्सपो हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण कदम है. इससे न केवल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि घरेलू बाजार में भी इसके विस्तार का अवसर मिलेगा. इस एक्सपो में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न हैंडीक्राफ्ट उत्पाद रखे गए हैं. इनमें फर्नीचर, घरेलू सजावट के आइटम, इंडोर और आउटडोर प्रोडक्ट्स, यूटिलिटी हैंडीक्राफ्ट, टेंट, गजेबो, लैंप और लाइटिंग, फर्श कवरिंग, कालीन और होम लाइफ स्टाइल से जुड़े डिजाइन उत्पाद शामिल हैं.
जोधपुर की खूबसूरती को दिखाने का मिला अवसर
पहले यह तरह का एक्सपो सिर्फ विदेशी बायर्स के लिए आयोजित होता था. अब इसे घरेलू बायर्स के लिए भी खोला गया है. इसका मकसद है मंदी के बावजूद उद्योग को बनाए रखना और स्थानीय बाजार में इसकी पहुंच बढ़ाना. इस एक्सपो से जोधपुर की हस्तशिल्प कला की खूबसूरती को पूरे देश में प्रदर्शित करने का अवसर मिला है.
स्थानीय कारीगरों को सीधे आम लोगों तक अपनी कला पहुंचाने का मौका मिला है. इस फेयर के आयोजन से उद्योग और कारीगर दोनों ही लाभान्वित होंगे. यह कदम घरेलू बाजार में हैंडीक्राफ्ट की मांग को बढ़ाने और भारतीय हस्तशिल्प को राष्ट्रीय पहचान देने में मदद करेगा.
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