'तुम पागल हो, 'एक ब्राउन लड़की हॉलीवुड में', Priyanka Chopra को लेकर मैनेजर अंजुला ने किया चौंकाने वाला खुलासा
Priyanka Chopra Manager Recalls Heartbreaking Early Days: बॉलीवुड की ‘देसी गर्ल’ प्रियंका चोपड़ा आज एक ग्लोबल सुपरस्टार हैं. जी हां, बीते एक दशक में उन्होंने हॉलीवुड में अपनी एक अलग और दमदार पहचान बनाई है. गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स से लेकर ऑस्कर अवॉर्ड्स के रेड कारपेट तक प्रियंका ने भारत का नाम रोशन किया है. लेकिन क्या यह सफर इतना आसान था? बिल्कुल नहीं.
साल 2015 में जब प्रियंका चोपड़ा ने हिंदी फिल्मों से दूरी बनाते हुए हॉलीवुड में कदम रखा और ABC स्टूडियोज के साथ टैलेंट-होल्डिंग डील साइन की, तो उनके इस फैसले की जमकर आलोचना हुई. थ्रिलर सीरीज ‘क्वांटिको’ में एलेक्स पैरिश के किरदार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई. इसके बाद वह ‘द मैट्रिक्स 4’, ‘सिटाडेल’ जैसी बड़ी फ्रेंचाइज का हिस्सा बनीं और अब ‘द ब्लफ’ में नजर आने वाली हैं. हालांकि प्रियंका की मैनेजर अंजुला आचार्य का कहना है कि शुरुआत में उनके इस फैसले को लोगों ने ‘पागलपन’ तक कहा था.
"एक ब्राउन बॉलीवुड स्टार अमेरिका में सफल नहीं हो सकती”
‘द ओके स्वीटी शो’ में बातचीत के दौरान अंजुला आचार्य ने खुलासा किया कि जब उन्होंने प्रियंका चोपड़ा को साइन किया, तो इंडस्ट्री के कई लोगों को इस फैसले पर शक था. अंजुला ने कहा, “जब मैंने प्रियंका को साइन किया तो लोगों ने मुझसे कहा कि मैं बेवकूफ हूं. सब कह रहे थे- तुम एक ब्राउन बॉलीवुड स्टार को अमेरिका में सफल नहीं बना सकतीं.” अंजुला आगे बताती हैं कि उन्होंने इस बारे में इंटरस्कोप रिकॉर्ड्स के को-फाउंडर जिमी से बात की थी. उन्होंने कहा, “मैंने जिमी से कहा कि लोग मुझे पागल कह रहे हैं. तब उन्होंने कहा- जब मैं एमिनेम को लॉन्च करना चाहता था, तब भी सबने मुझे पागल कहा था.”
‘असिस्टेंट के असिस्टेंट’ से मिलना पड़ता था
अंजुला आचार्य ने प्रियंका के हॉलीवुड के शुरुआती संघर्ष के दिनों को भी याद किया. उन्होंने बताया कि उस समय कोई भी फिल्ममेकर सीधे प्रियंका से मिलने को तैयार नहीं होता था. उन्होंने कहा, “हमें इंडस्ट्री में असिस्टेंट के असिस्टेंट से मिलना पड़ता था. प्रियंका जैसी सुपरस्टार के लिए यह बेहद दिल तोड़ने वाला अनुभव था.”
"यहां कोई आपको नहीं जानता"
अंजुला ने एक भावुक किस्सा साझा करते हुए कहा, “जरा सोचिए, आप अपने देश की बियॉन्से जैसी शख्सियत हैं, लेकिन यहां कोई आपको नहीं जानता. प्रियंका खुद अपना परिचय दे रही थीं और कह रही थीं - ‘आप नहीं जानते कि मैं कौन हूं, लेकिन मैं प्रियंका चोपड़ा हूं.’ मैं उनके साथ कैफेटेरिया में असिस्टेंट के असिस्टेंट से मिल रही थी. उस दिन मुझे उनके लिए बहुत दुख हुआ, लेकिन उन्होंने कभी अहंकार नहीं दिखाया.”
“प्रियंका ने मुझे विनम्र रहना सिखाया”
अंजुला आचार्य ने कहा कि प्रियंका के साथ काम करने से उन्हें विनम्रता का असली मतलब समझ आया. उन्होंने कहा, “कई बार मुझे लगता था कि हमें कुछ करने की जरूरत नहीं है, लेकिन प्रियंका कहती थीं - ‘नहीं, हमें करना है.’ कई मौकों पर मुझे लगा कि हम इन सबसे ऊपर हैं, लेकिन वह हमेशा कहती थीं - ‘नहीं, हम नहीं हैं.’”
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नेपाल: चुनाव आयोग ने गगन थापा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस को मान्यता दी, देउबा गुट नाराज
काठमांडू, 17 जनवरी (आईएएनएस)। नेपाली कांग्रेस के औपचारिक रूप से बंटने के दो दिन बाद, चुनाव आयोग ने विशेष आम अधिवेशन के जरिए चुनी गई समिति को आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दे दी। इस फैसले पर जहां गगन थापा गुट ने खुशी जताई वहीं देउबा गुट ने राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन की धमकी दी।
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता में आयोग की एक बैठक में, नए चुने गए गगन थापा के नेतृत्व वाली समिति के दावे को सही ठहराने का फैसला किया गया। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह फैसला बहुमत से लिया गया, क्योंकि एक आयुक्त ने विशेष अधिवेशन के जरिए चुनी गई टीम को वैधता देने का विरोध किया था।
पार्टी की जानकारी अपडेट करने के लिए आयोग ने तीन मुख्य आधारों पर भरोसा किया।
पहला, नेपाली कांग्रेस का संविधान 40 प्रतिशत आम अधिवेशन प्रतिनिधियों को विशेष आम अधिवेशन बुलाने की अनुमति देता है, और आयोग ने पाया कि ऐसा अधिवेशन अनिवार्य रूप से आयोजित किया गया था। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि जब केंद्रीय कार्य समिति पार्टी संविधान में अनिवार्य प्रावधान का पालन करने में आनाकानी कर रही थी, तो महासचिव थापा और विश्व प्रकाश शर्मा के लिए विशेष अधिवेशन बुलाना वैध था।
दूसरा, संविधान स्पष्ट रूप से आम अधिवेशन प्रतिनिधियों को पार्टी का सर्वोच्च अधिकार मानता है, जिससे उनके फैसले बाध्यकारी हो जाते हैं।
तीसरा, आयोग ने पाया कि विशेष आम अधिवेशन की मांग पर कोई दर्ज असहमति नहीं थी, जिससे यह पुष्टि होती है कि इसे संविधान के अनुसार बुलाया गया था।
कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, आयोग देउबा गुट को एक नई पार्टी रजिस्टर करने की अनुमति देगा यदि वे नए चुने गए नेतृत्व के तहत नहीं आना चाहते हैं। आयोग के इस फैसले से आम तौर पर राष्ट्रीय राजनीति और विशेष रूप से कांग्रेस में और ध्रुवीकरण होने की उम्मीद है।
अगर शेर बहादुर देउबा गुट इस फैसले का विरोध करता है और कानूनी रास्ते अपनाता है, तो इससे मार्च के चुनाव भी बाधित हो सकते हैं। इस गुट ने शनिवार सुबह सनेपा, ललितपुर में पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाई है।
इस बीच, थापा ने शुक्रवार शाम को एक बयान जारी कर चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने सभी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का भी आग्रह किया और कहा कि वह पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी लेंगे।
उन्होंने आयोग के फैसले के तुरंत बाद एक बयान में कहा, “विशेष आम अधिवेशन कोई विवाद का मामला नहीं था। चुनाव आयोग ने संविधान, मौजूदा कानूनों और पार्टी के संविधान के अनुसार अपना फैसला लिया है। हम इसके लिए आभारी हैं।”
थापा ने देउबा के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया और पार्टी के सभी वर्गों से समर्थन और सहयोग मांगा। दूसरी ओर, देउबा गुट ने कमीशन के फैसले पर निराशा जताई है और शुक्रवार को पहले ही ऐलान कर दिया था कि अगर थापा के नेतृत्व वाले गुट को मान्यता मिलती है तो वे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
--आईएएनएस
केआर/
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