Onion Cutting Tips: प्याज काटते समय नहीं आएंगे आंसू! इन 5 आसान घरेलू ट्रिक्स से काम बनेगा आसान
Onion Cutting Tips: प्याज काटते ही आंखों में जलन और आंसुओं की धार अक्सर किचन का पूरा मूड बिगाड़ देती है। खासकर जब खाना बनाने के लिए एक साथ कई प्याज काटने हों, तो यह छोटी-सी परेशानी काफी परेशान कर सकती है। लेकिन कुछ आसान घरेलू तरीके इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं।
प्याज काटने के दौरान आंखों में आंसू आने की वजह प्याज से निकलने वाले कुछ वाष्पशील सल्फर यौगिक होते हैं, जो आंखों तक पहुंचकर जलन पैदा करते हैं। अच्छी बात यह है कि काटने का तरीका और कुछ साधारण किचन ट्रिक्स अपनाकर इस जलन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इन ट्रिक्स को कर सकते हैं ट्राई
प्याज को कुछ देर फ्रिज में रखें
प्याज काटने से पहले उसे करीब 20-30 मिनट के लिए फ्रिज में रखने का तरीका कई लोग आजमाते हैं। ठंडा प्याज काटने पर उससे निकलने वाले वाष्पशील यौगिकों की गति कुछ कम हो सकती है, जिससे आंखों में होने वाली जलन कम महसूस हो सकती है। हालांकि, इसे पूरी तरह आंसू रोकने वाला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
तेज धार वाले चाकू का इस्तेमाल करें
प्याज काटने के लिए तेज चाकू इस्तेमाल करना न सिर्फ काम आसान करता है, बल्कि प्याज की कोशिकाओं को कम कुचलता है। कुंद चाकू से प्याज पर ज्यादा दबाव पड़ता है और कोशिकाएं अधिक टूट सकती हैं। इसलिए अच्छी तरह धारदार चाकू से साफ और तेजी से कट लगाना मददगार हो सकता है।
काटते समय वेंटिलेशन का ध्यान रखें
प्याज काटते समय उसके वाष्पशील यौगिक हवा में फैलते हैं। इसलिए खिड़की के पास या अच्छे वेंटिलेशन वाली जगह पर प्याज काटना उपयोगी हो सकता है। किचन एग्जॉस्ट फैन या पंखे की हवा को इस तरह रखा जा सकता है कि प्याज से निकलने वाली गैस आंखों की दिशा में न आए।
जड़ वाला हिस्सा आखिर में काटें
प्याज के अलग-अलग हिस्सों में रासायनिक यौगिकों की मात्रा समान नहीं होती। कई घरेलू कुकिंग टिप्स में प्याज की जड़ वाले हिस्से को आखिर में काटने की सलाह दी जाती है। प्याज को पहले छीलकर और काटकर तैयार करें और जड़ को अंत में हटाएं। इससे कुछ लोगों को जलन कम महसूस हो सकती है, हालांकि इसका असर प्याज की किस्म और काटने के तरीके पर निर्भर करता है।
आंखों को न छुएं और सही तरीके से काटें
प्याज काटते समय आंखों को हाथ लगाने से बचें, क्योंकि हाथों पर प्याज का रस लगा हो सकता है। प्याज काटने के लिए स्थिर कटिंग बोर्ड का इस्तेमाल करें और चाकू को सावधानी से चलाएं। अगर आंखों में ज्यादा जलन हो जाए तो उन्हें साफ पानी से धोना बेहतर है। आंखों में सीधे कोई घरेलू पदार्थ या केमिकल डालने से बचना चाहिए।
प्याज के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान
हर घरेलू ट्रिक हर व्यक्ति या हर तरह के प्याज पर समान असर नहीं करती। प्याज की किस्म, उसकी ताजगी, तापमान और काटने का तरीका आंसू आने की मात्रा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए एक ही उपाय पर निर्भर रहने के बजाय ठंडा प्याज, तेज चाकू और अच्छा वेंटिलेशन जैसे तरीकों का संयोजन आजमाया जा सकता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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Diabetes Routine: डायबिटीज में क्या खाएं, क्या नहीं? हेल्दी रहने के लिए इन 5 बातों का रखें खास ध्यान
Diabetes Routine: डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की खान-पान की आदतों पर भी ध्यान देने का संकेत देती है। सही समय पर सही भोजन चुनना, पोर्शन कंट्रोल रखना और मीठे व ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना ब्लड शुगर मैनेजमेंट का अहम हिस्सा हो सकता है।
अगर आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज से जूझ रहा है, तो डाइट को लेकर थोड़ी सावधानी लंबे समय में काफी मददगार हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार डाइट में बदलाव करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
इन बातों का रखें ध्यान
प्लेट में फाइबर और सब्जियों को दें जगह
डायबिटीज में खाने की प्लेट में गैर-स्टार्च वाली सब्जियों को पर्याप्त जगह देना उपयोगी हो सकता है। पालक, लौकी, तोरई, भिंडी, फूलगोभी, पत्तागोभी और अन्य हरी सब्जियां डाइट का हिस्सा बनाई जा सकती हैं। सलाद और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी भोजन को संतुलित बनाने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को डायबिटीज का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और मीठे से रहें सावधान
चीनी से बने पेय, मिठाइयां, मीठे बिस्किट और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है। सफेद ब्रेड, मैदा और अन्य रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट भी ब्लड शुगर पर असर डाल सकते हैं। इनकी जगह साबुत अनाज और फाइबर वाले विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
फल खाएं, लेकिन जूस नहीं
डायबिटीज होने पर फल पूरी तरह बंद करने की जरूरत आमतौर पर नहीं होती। साबुत फल फाइबर समेत कई पोषक तत्व प्रदान करते हैं। वहीं फलों का जूस, खासकर बिना फाइबर वाला मीठा पेय, कम फायदेमंद विकल्प हो सकता है। फल की मात्रा और चुनाव व्यक्ति की कुल डाइट तथा ब्लड शुगर के अनुसार तय करना बेहतर है।
प्रोटीन और हेल्दी फैट को डाइट में शामिल करें
दाल, चना, राजमा, बीन्स, अंडे, मछली, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद और अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत भोजन को संतुलित बनाने में मदद कर सकते हैं। वहीं नट्स और बीज जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद हेल्दी फैट भी डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इनका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है क्योंकि इनमें कैलोरी अधिक हो सकती है।
खाने के साथ लाइफस्टाइल पर भी दें ध्यान
सिर्फ डाइट बदलना ही पर्याप्त नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव को मैनेज करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना भी डायबिटीज मैनेजमेंट का हिस्सा है। भोजन की मात्रा और समय में बहुत बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि इंसुलिन या कुछ दवाएं लेने वाले लोगों में ब्लड शुगर बहुत कम होने का जोखिम हो सकता है।
क्या नहीं भूलें?
डायबिटीज में कोई एक 'परफेक्ट डाइट' सभी लोगों के लिए समान नहीं होती। उम्र, वजन, दवाएं, शारीरिक गतिविधि, अन्य स्वास्थ्य स्थितियां और व्यक्तिगत खान-पान की आदतों के आधार पर डाइट प्लान अलग हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर मिलने वाली किसी भी डाइट को बिना विशेषज्ञ की सलाह के अपनाने के बजाय व्यक्तिगत मेडिकल सलाह को प्राथमिकता दें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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