Child Screen Time: बच्चा हर वक्त मोबाइल मांगता है? ज्यादा स्क्रीन टाइम से हो सकती हैं ये 5 परेशानियां, ऐसे समझें खतरे की घंटी
Child Screen Time: बच्चे का रोते ही मोबाइल थमा देना या खाना खिलाने के लिए फोन का सहारा लेना आज कई घरों में आम हो गया है। शुरुआत में यह आसान तरीका लगता है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चा मोबाइल का आदी होने लग सकता है और स्क्रीन से दूर रखना माता-पिता के लिए चुनौती बन जाता है।
जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम सिर्फ बच्चे की आंखों तक सीमित समस्या नहीं है। लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या टीवी देखने का असर नींद, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार और पढ़ाई जैसी रोजमर्रा की आदतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बच्चा स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
बच्चों को हो सकती हैं ये 5 परेशानियां
नींद का बिगड़ सकता है पैटर्न
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने से बच्चे की नींद की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। देर रात तक वीडियो या गेम देखने की आदत सोने के समय को आगे बढ़ा सकती है। पर्याप्त और नियमित नींद बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है।
शारीरिक गतिविधि हो सकती है कम
जब बच्चे का काफी समय मोबाइल देखने में गुजरता है, तो खेलकूद और दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम हो सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत बच्चे की रोजाना की सक्रियता को प्रभावित कर सकती है। आउटडोर खेल, साइकिलिंग और परिवार के साथ एक्टिविटी स्क्रीन टाइम का बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
ध्यान और व्यवहार पर पड़ सकता है असर
बहुत तेज गति से बदलते वीडियो, गेम और लगातार मिलने वाले डिजिटल स्टिमुली बच्चे को लंबे समय तक एक ही गतिविधि पर ध्यान बनाए रखने में मुश्किल महसूस करा सकते हैं। कुछ बच्चों में स्क्रीन बंद करने पर चिड़चिड़ापन या गुस्सा भी देखने को मिल सकता है। हालांकि हर बच्चे पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।
आंखों पर पड़ सकता है दबाव
लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन या असहजता महसूस हो सकती है। बच्चे अक्सर स्क्रीन देखते समय पलकें कम झपकाते हैं और मोबाइल को आंखों के बहुत करीब भी ले आते हैं। इसलिए बीच-बीच में स्क्रीन से ब्रेक लेना और पर्याप्त दूरी बनाए रखना जरूरी है।
परिवार और पढ़ाई के समय में हो सकती है कमी
अगर बच्चा हर खाली समय मोबाइल पर बिताने लगे तो परिवार के साथ बातचीत, किताब पढ़ने, रचनात्मक गतिविधियों और पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय कम हो सकता है। खासतौर पर भोजन के समय या होमवर्क के दौरान मोबाइल की आदत बच्चे की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है।
माता-पिता क्या करें?
बच्चे को अचानक मोबाइल से पूरी तरह दूर करने के बजाय घर में स्पष्ट स्क्रीन नियम बनाना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। भोजन और सोने से पहले स्क्रीन-फ्री समय तय करें, बच्चे के साथ रोजाना खेलें और उसकी पसंद की गैर-डिजिटल गतिविधियों को बढ़ावा दें। सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता खुद भी फोन के इस्तेमाल का उदाहरण पेश करें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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Onion Cutting Tips: प्याज काटते समय नहीं आएंगे आंसू! इन 5 आसान घरेलू ट्रिक्स से काम बनेगा आसान
Onion Cutting Tips: प्याज काटते ही आंखों में जलन और आंसुओं की धार अक्सर किचन का पूरा मूड बिगाड़ देती है। खासकर जब खाना बनाने के लिए एक साथ कई प्याज काटने हों, तो यह छोटी-सी परेशानी काफी परेशान कर सकती है। लेकिन कुछ आसान घरेलू तरीके इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं।
प्याज काटने के दौरान आंखों में आंसू आने की वजह प्याज से निकलने वाले कुछ वाष्पशील सल्फर यौगिक होते हैं, जो आंखों तक पहुंचकर जलन पैदा करते हैं। अच्छी बात यह है कि काटने का तरीका और कुछ साधारण किचन ट्रिक्स अपनाकर इस जलन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इन ट्रिक्स को कर सकते हैं ट्राई
प्याज को कुछ देर फ्रिज में रखें
प्याज काटने से पहले उसे करीब 20-30 मिनट के लिए फ्रिज में रखने का तरीका कई लोग आजमाते हैं। ठंडा प्याज काटने पर उससे निकलने वाले वाष्पशील यौगिकों की गति कुछ कम हो सकती है, जिससे आंखों में होने वाली जलन कम महसूस हो सकती है। हालांकि, इसे पूरी तरह आंसू रोकने वाला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
तेज धार वाले चाकू का इस्तेमाल करें
प्याज काटने के लिए तेज चाकू इस्तेमाल करना न सिर्फ काम आसान करता है, बल्कि प्याज की कोशिकाओं को कम कुचलता है। कुंद चाकू से प्याज पर ज्यादा दबाव पड़ता है और कोशिकाएं अधिक टूट सकती हैं। इसलिए अच्छी तरह धारदार चाकू से साफ और तेजी से कट लगाना मददगार हो सकता है।
काटते समय वेंटिलेशन का ध्यान रखें
प्याज काटते समय उसके वाष्पशील यौगिक हवा में फैलते हैं। इसलिए खिड़की के पास या अच्छे वेंटिलेशन वाली जगह पर प्याज काटना उपयोगी हो सकता है। किचन एग्जॉस्ट फैन या पंखे की हवा को इस तरह रखा जा सकता है कि प्याज से निकलने वाली गैस आंखों की दिशा में न आए।
जड़ वाला हिस्सा आखिर में काटें
प्याज के अलग-अलग हिस्सों में रासायनिक यौगिकों की मात्रा समान नहीं होती। कई घरेलू कुकिंग टिप्स में प्याज की जड़ वाले हिस्से को आखिर में काटने की सलाह दी जाती है। प्याज को पहले छीलकर और काटकर तैयार करें और जड़ को अंत में हटाएं। इससे कुछ लोगों को जलन कम महसूस हो सकती है, हालांकि इसका असर प्याज की किस्म और काटने के तरीके पर निर्भर करता है।
आंखों को न छुएं और सही तरीके से काटें
प्याज काटते समय आंखों को हाथ लगाने से बचें, क्योंकि हाथों पर प्याज का रस लगा हो सकता है। प्याज काटने के लिए स्थिर कटिंग बोर्ड का इस्तेमाल करें और चाकू को सावधानी से चलाएं। अगर आंखों में ज्यादा जलन हो जाए तो उन्हें साफ पानी से धोना बेहतर है। आंखों में सीधे कोई घरेलू पदार्थ या केमिकल डालने से बचना चाहिए।
प्याज के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान
हर घरेलू ट्रिक हर व्यक्ति या हर तरह के प्याज पर समान असर नहीं करती। प्याज की किस्म, उसकी ताजगी, तापमान और काटने का तरीका आंसू आने की मात्रा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए एक ही उपाय पर निर्भर रहने के बजाय ठंडा प्याज, तेज चाकू और अच्छा वेंटिलेशन जैसे तरीकों का संयोजन आजमाया जा सकता है।
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