"मेरे पास मां है", जावेद अख्तर ने अपनी कलम से लिखे इन फिल्मों के बेहतरीन डायलॉग
मुंबई, 17 जनवरी (आईएएनएस)। 70 के दशक में, जब हिंदी सिनेमा में सिनेमाघरों के बाहर पर्दे पर सिर्फ मुख्य हीरो के पोस्टर चस्पा होते थे, उस दौर में जावेद अख्तर ने अपनी सफलता की कहानी लिखी और अपने जिगरी दोस्त सलीम खान के साथ छा गए।
"मेरे पास मां है", जावेद अख्तर ने अपनी कलम से लिखे इन फिल्मों के बेहतरीन डायलॉग
मुंबई, 17 जनवरी (आईएएनएस)। 70 के दशक में, जब हिंदी सिनेमा में सिनेमाघरों के बाहर पर्दे पर सिर्फ मुख्य हीरो के पोस्टर चस्पा होते थे, उस दौर में जावेद अख्तर ने अपनी सफलता की कहानी लिखी और अपने जिगरी दोस्त सलीम खान के साथ छा गए।
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