Kal Ka Mausam: अगले 5 दिन संभलकर! 48 घंटे में टूटने वाला है ठंड का रिकॉर्ड, अब कोहरे के बाद बारिश मचाएगी तबाही
उत्तर भारत में अभी सर्दी से राहत नहीं मिलने वाली है. अगले एक से दो दिनों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलने की बहुत संभावना है. इसके बाद शीतलहर की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है. मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में घना कोहरा छाया रह सकता है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित होने की आशंका है.
बीते 24 घंटों का मौसम हाल
पिछले 24 घंटों के दौरान पंजाब और हरियाणा के कई इलाकों में घना से बहुत घना कोहरा देखा गया, जहां दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी घने कोहरे का असर रहा. कई स्थानों पर दृश्यता शून्य मीटर तक पहुंच गई, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ.
इन राज्यों में कोल्ड की स्थिति
उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में शीत दिवस की स्थिति बनी हुई है. उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में पाला पड़ने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. मौसम विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि पाले से फसलों को नुकसान हो सकता है.
न्यूनतम तापमान का हाल
देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस पंजाब के बलोवाल सौंखड़ी में दर्ज किया गया. हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा में न्यूनतम तापमान सामान्य से 3 से 6 डिग्री नीचे रहा.
कहां-कहां हो सकती है बारिश?
मौसम विभाग के अनुसार 19 जनवरी से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है. इसके असर से 16 से 22 जनवरी के दौरान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना है. पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कुछ दिनों में बारिश हो सकती है.
कोल्ड अलर्ट की चेतावनी
18 जनवरी तक उत्तराखंड और 22 जनवरी तक पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ में सुबह और रात के समय घना से बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है. बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में भी घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है.
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मिजोरम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के प्रकोप से 2025 में 115 करोड़ रुपए का नुकसान
आइजोल, 16 जनवरी (आईएएनएस)। मार्च से दिसंबर 2025 के बीच अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) के प्रकोप के कारण मिजोरम को लगभग 115 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मिजोरम के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग (एएचवीडी) के एक अधिकारी ने बताया कि मार्च से दिसंबर 2025 के बीच एएसएफ से 9,710 से अधिक सूअरों की मृत्यु हो गई, जबकि इस अत्यधिक संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसी अवधि में 3,620 से अधिक सूअरों को मार दिया गया।
अधिकारी ने बताया कि इन मौतों और सूअरों को मारने के कारण राज्य के किसानों को 115 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ है।
शीतकालीन मौसम को देखते हुए मिजोरम में एएसएफ के प्रकोप की तीव्रता में फिलहाल काफी कमी आई है।
अधिकारी के अनुसार, एएसएफ का प्रकोप सबसे पहले 21 मार्च, 2021 को दक्षिणी मिजोरम के लुंगलेई जिले के लुंगसेन गांव में बांग्लादेश सीमा के पास से सामने आया था।
मार्च 2021 से अब तक एएसएफ के कारण 72,000 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है, जिससे 12,500 से अधिक सूअर पालक परिवार प्रभावित हुए हैं और पिछले लगभग पांच वर्षों में कुल मिलाकर 1,011.27 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ है।
अधिकारी ने बताया कि बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए 2021 से अब तक कुल 52,980 सूअरों को मारा जा चुका है।
केंद्र सरकार ने अब तक प्रभावित सूअर पालकों को 14.51 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया है, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र को 24.94 करोड़ रुपए के मुआवजे का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।
राज्य सरकार ने भी प्रभावित परिवारों को अपनी ओर से मुआवजा दिया है।
2024 में मिजोरम में एएसएफ से सबसे अधिक नुकसान हुआ, जहां सूअर पालकों को अनुमानित 336.40 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसके बाद 2021 में 334.14 करोड़ रुपए और 2022 में 210.32 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
2025 में, दक्षिणी मिजोरम का सियाहा जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 45 गांवों और इलाकों से 3,645 से अधिक सूअरों की मौत की सूचना मिली, जिससे लगभग 1,370 परिवार प्रभावित हुए। संक्रमण को फैलने से रोकने के उपाय के तौर पर जिले में लगभग 970 सूअरों को भी मारा गया है।
सियाहा के अलावा, अन्य प्रमुख प्रभावित जिलों में लॉंग्टलाई, खॉजॉल, हनथियाल, लुंगलेई, ऐजॉल, मामित और चम्फाई शामिल हैं।
मिजोरम सरकार किसानों से सतर्क रहने और एएसएफ के प्रसार को रोकने के प्रयासों में एएचवीडी अधिकारियों के साथ सहयोग करने का आग्रह कर रही है।
राज्य में सूअरों की आबादी के लिए यह अत्यधिक संक्रामक वायरस एक गंभीर खतरा बना हुआ है, इसलिए अधिकारियों के लिए निवारक उपाय सर्वोच्च प्राथमिकता बने हुए हैं। कई एएचवीडी टीमें स्थिति पर बारीकी से नजर रखने और बीमारी को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए नियमित रूप से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एएसएफ एक अत्यंत खतरनाक और आसानी से फैलने वाली बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर बहुत अधिक है और संक्रमित जानवरों में 100 प्रतिशत तक मृत्यु हो सकती है। यह घरेलू सूअरों और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है, और इस बीमारी की रोकथाम या नियंत्रण के लिए कोई उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, एएसएफ मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता है।
--आईएएनएस
एमएस/
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