Bihar News: बढ़ गया डबल डेकर फ्लाई ओवर पर खर्चा, मिली मार्च 2027 की Deadline
Chhapra Doublr Decker Flyover: छपरा शहर को भीषण जाम से राहत दिलाने और विकास की नई उड़ान देने के सपने के साथ डबल डेकर फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू हुआ था. आठ साल बीत जाने के बाद भी यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर पूरी नहीं उतर सकी है. जिस पुल को शहर के लोगों के लिए वरदान साबित होना था, वही आज स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है. निर्माण कार्य की सुस्त चाल और सड़कों की बदहाली ने पूरे इलाके की रफ्तार रोक दी है.
लागत में भारी उछाल और नई समय सीमा का खेल
इस योजना की नींव साल 2018 में करीब 411 करोड़ रुपये के बजट के साथ रखी गई थी. शुरुआती योजना के अनुसार इस पुल को जून 2022 तक बनकर तैयार हो जाना चाहिए था. लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के चार साल बाद भी आधा काम भी पूरा नहीं हो पाया है. देरी का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ा है. अब इस पूरे प्रोजेक्ट की संशोधित लागत बढ़कर करीब 696 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. यानी इस पुल के निर्माण में करीब 285 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ चुका है. अब प्रशासन ने निर्माण एजेंसी को मार्च 2027 तक का नया लक्ष्य सौंपा है.
धूल, गड्ढे और जलजमाव से बेहाल जिंदगी
गांधी चौक, मौना चौक और नगर पालिका चौक जैसे व्यस्ततम इलाकों में निर्माण कार्य के कारण सड़कें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं. जगह-जगह भारी बैरिकेडिंग और खोदे गए गड्ढों की वजह से दिनभर भयंकर जाम की स्थिति बनी रहती है. बारिश के दिनों में यह परेशानी दोगुनी हो जाती है. पुल निर्माण के दौरान पुराने नालों को ध्वस्त कर दिया गया, जिसके चलते बारिश का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है. स्थिति यह है कि स्थानीय मॉल, दुकानों और घरों के आगे घुटनों तक गंदा पानी भर जाता है. लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है.
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LPG Update: 1 अक्टूबर से बदल रहे रसोई गैस के नियम, सस्ते सिलेंडर के लिए तुरंत करें यह छोटा सा काम
LPG Update: देश भर में घरेलू रसोई गैस का उपयोग करने वाले करोड़ों परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. शनिवार को लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि आगामी 1 अक्टूबर से घरेलू गैस ग्राहकों को रियायती दर पर सिलेंडर बुक कराने के लिए बायोमेट्रिक आधार सत्यापन कराना अनिवार्य होगा. सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सरकारी खजाने से दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ सिर्फ वास्तविक और पात्र परिवारों तक ही पहुंचे. अगर किसी उपभोक्ता ने तय समय सीमा तक अपनी पहचान प्रमाणित नहीं कराई, तो उसे सब्सिडी वाले दाम पर सिलेंडर लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और उसे सामान्य बाजार भाव पर ही गैस खरीदनी पड़ेगी.
90 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने पूरा किया सत्यापन
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के अधिकांश सक्रिय घरेलू उपभोक्ता पहले ही इस प्रक्रिया को पूरा कर चुके हैं. 19 सितंबर तक 27.43 करोड़ से अधिक सक्रिय घरेलू उपभोक्ताओं ने अपनी पहचान की पुष्टि करा ली है. यह आंकड़ा कुल सक्रिय ग्राहकों का लगभग 89.9 प्रतिशत यानी करीब 90% बैठता है. जिन ग्राहकों ने पहले ही अपना सत्यापन पूरा कर लिया है, उन्हें आगे कुछ भी करने की जरूरत नहीं है.
वहीं जिन उपभोक्ताओं ने अब तक किसी कारण से यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें 1 अक्टूबर से पहले इसे पूरा करने की सलाह दी गई है. हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जैसे ही उपभोक्ता अपना बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करेंगे, उन्हें तुरंत फिर से सस्ती दर पर रिफिल बुकिंग की सुविधा मिलने लगेगी.
घर बैठे और गैस एजेंसी पर सत्यापन के आसान रास्ते
पहचान की पुष्टि कराने के लिए आम जनता की सुविधा को पूरी तरह ध्यान में रखा गया है ताकि किसी भी व्यक्ति को बेवजह भागदौड़ न करनी पड़े. सरकार ने साफ कहा है कि इस नियम का मकसद लोगों को परेशान करना बिल्कुल नहीं है. इसके लिए कई बेहद आसान विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं. सबसे सरल तरीका यह है कि जब भी डिलीवरी कर्मचारी आपके घर पर सिलेंडर पहुंचाने आए, तो आप उसी समय उसके मोबाइल या बायोमेट्रिक स्कैनर के जरिए अपनी उंगलियों के निशान या चेहरे की पहचान दर्ज करा सकते हैं. इसके अतिरिक्त उपभोक्ता अपनी संबंधित गैस एजेंसी के कार्यालय या नजदीकी बिक्री केंद्र पर जाकर भी वहां लगे विशेष काउंटरों से अपनी ई-केवाईसी की प्रक्रिया को मिनटों में पूरा करा सकते हैं.
मोबाइल ऐप और हेल्पलाइन से भी मिलेगी पूरी मदद
यदि उपभोक्ता घर से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं, तो वे आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर अपने स्मार्टफोन के माध्यम से भी यह काम खुद कर सकते हैं. तेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप के जरिए आधार आधारित चेहरा पहचान की सुविधा दी गई है. इंडियन ऑयल के ग्राहक अपने फोन में इंडियन ऑयल वन ऐप डाउनलोड करके चेहरा स्कैन कर सकते हैं. इसी प्रकार भारत गैस के उपभोक्ता हैलो बीपीसीएल ऐप और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उपभोक्ता एचपी पे ऐप की सहायता से घर बैठे ही यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. किसी भी तरह की उलझन, सवाल या तकनीकी समस्या होने पर उपभोक्ता सरकार द्वारा जारी किए गए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 2333 555 पर भी संपर्क करके पूरी सहायता प्राप्त कर सकते हैं.
फर्जी कनेक्शन हटाने के लिए 7 बार बढ़ाई गई तारीख
यह नई व्यवस्था अचानक लागू नहीं की गई है, बल्कि इसका अभियान काफी समय से लगातार चलाया जा रहा है. देश भर में यह अभियान अक्टूबर 2023 से चल रहा है. आम जनता को जागरूक करने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने 7 बार समय सीमा को आगे बढ़ाया ताकि कोई भी पात्र परिवार छूट से वंचित न रह जाए. तेल कंपनियों की तरफ से ग्राहकों को 12 करोड़ से ज्यादा एसएमएस और व्हाट्सएप संदेश भेजकर लगातार सतर्क किया गया है. डिस्ट्रीब्यूटर, डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों, स्पेशल कैंप और फोन कॉल के माध्यम से जन जन तक यह बात पहुंचाई गई है ताकि दोहरे और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाकर केवल सही लोगों तक ही सरकारी मदद पहुंचे.
प्रति सिलेंडर 721 रुपये तक पहुंच गया था सब्सिडी का बोझ
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें आम लोगों की पहुंच में रखने के लिए सरकार हर महीने बहुत बड़ा वित्तीय बोझ खुद उठाती है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं, तब जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए भारी छूट दी जाती है. आंकड़ों के अनुसार इस साल जून के महीने में प्रति 14.2 किलो वाले सिलेंडर पर छिपी हुई सब्सिडी 721 रुपये तक पहुंच गई थी. इसका मतलब यह था कि अंतरराष्ट्रीय दरों के मुकाबले ग्राहकों को सस्ता सिलेंडर देने के लिए सरकार खुद प्रति सिलेंडर 721 रुपये का भारी वित्तीय भार उठा रही थी. बाद में वैश्विक बाजार में सुधार होने पर सितंबर में यह घटकर 210 रुपये प्रति सिलेंडर रह गई. इसी भारी भरकम खर्च को सही दिशा में लगाने के लिए फर्जी कनेक्शनों को प्रणाली से बाहर करना बेहद जरूरी हो गया था.
क्या 1 अक्टूबर के बाद बंद हो जाएगी गैस सप्लाई
कई उपभोक्ताओं के मन में यह डर बना हुआ है कि क्या 1 अक्टूबर के बाद उन्हें गैस मिलना ही बंद हो जाएगा. सरकार ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिवार की गैस आपूर्ति बंद नहीं की जाएगी. जिन लोगों का बायोमेट्रिक सत्यापन बाकी रह जाएगा, उन्हें सिलेंडर तो मिलेगा लेकिन वह रियायती दर पर नहीं बल्कि सामान्य बाजार भाव पर दिया जाएगा. इसके अलावा जरूरत और उपलब्धता के आधार पर ऐसे ग्राहकों के लिए 5 किलो या 10 किलो के छोटे सिलेंडर का विकल्प भी खुला रहेगा.
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