दक्षिण कोरिया: बस ने पैदल यात्रियों को कुचला, दो गंभीर रूप से घायल, 11 अन्य जख्मी
सियोल, 16 जनवरी (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के पश्चिमी इलाके में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक सिटी बस सड़क से फिसलकर पैदल यात्रियों के बीच जा घुसी। इस दुर्घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि 11 अन्य को चोटें आई हैं। राहत एवं बचाव अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब 1:15 बजे सेओडेमुन स्टेशन के पास एक चौराहे पर इंट्रासिटी बस अचानक सड़क से उतर गई और पैदल चल रहे लोगों को कुचलते हुए एक इमारत से जा टकराई। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
गंभीर रूप से घायल लोगों में एक 50 वर्षीय महिला शामिल है, जिनके पैर में फ्रैक्चर हुआ है, जबकि करीब 30 वर्षीय एक व्यक्ति के सिर से खून बह रहा था। दोनों को अन्य छह घायलों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने फिलहाल शराब पीकर वाहन चलाने के कोई संकेत नहीं पाए हैं, लेकिन घायल हुए 50 वर्षीय बस चालक का ड्रग टेस्ट कराने की योजना है।
घटनास्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बस सीधी जा रही थी, लेकिन अचानक उसने एक कार, एक मोटरसाइकिल और पैदल यात्रियों को टक्कर मार दी। वहीं, 50 वर्षीय महिला ने कहा कि उन्होंने युद्ध के मैदान जैसी तेज आवाज सुनी और जान बचाकर वहां से भागीं।
प्रशासन ने हादसे के सही कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल बस को हटाने का काम जारी है और इलाके की सुरक्षा के लिए 271 कर्मियों और 18 वाहनों को तैनात किया गया है।
इस बीच, 10 जनवरी को दक्षिण-पूर्वी प्रांत नॉर्थ ग्योंगसांग में एक हाईवे पर ब्लैक आइस (जमी हुई बर्फ) के कारण कई दुर्घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, ये हादसे संभवतः बर्फ जमने के कारण हुए।
इनमें से एक दुर्घटना सुबह 6:20 बजे सेओसान-योंगदोक एक्सप्रेसवे के सांगजू सेक्शन में एक इंटरचेंज के पास हुई, जब एक ट्रक, रुके हुए वाहन से बचने की कोशिश में गार्डरेल से टकराकर सड़क से नीचे जा गिरा। इस हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई।
इलाके में एक अन्य हादसे में एक सेडान कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार चारों लोगों की मौत हो गई। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या यह हादसा ट्रेलर वाहन से जुड़े एक अन्य टकराव से संबंधित है।
एक और दुर्घटना में, सुबह 6:35 बजे एक एसयूवी ट्रक से टकराने के बाद गार्डरेल से जा भिड़ी और उसमें आग लग गई।
सुबह 11 बजे तक कुल मृतकों की संख्या पांच बताई गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। पुलिस का मानना है कि इन दुर्घटनाओं में 20 से अधिक वाहन शामिल हो सकते हैं।
हादसों के कारण हाईवे के कुछ हिस्सों में यातायात अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। प्रशासन सभी घटनाओं की जांच कर रहा है और आशंका जताई जा रही है कि बर्फ या बारिश जमने से बनी ब्लैक आइस इन हादसों की वजह बनी।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सांडों को कंट्रोल करने वाला खेल जल्लीकट्टू एकबार फिर चर्चा में, जानें क्या है इस रोचक प्रतियोगिता की कहानी
Jallikattu 2026: तमिलनाडु में पोंगल एक दिन का नहीं, बल्कि चार दिन का पर्व होता है. यह त्योहार खुशी, परंपरा और खेती से जुड़ी आस्था का प्रतीक है. इन चार दिनों में अलग-अलग आयोजन किए जाते हैं. हर दिन की अपनी खास पहचान होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि तमिलनाडु में एक ऐसा भी खेल खेला जाता है जो बेहद खरतनाक होता है. हम बात कर रहे हैं जल्लीकट्टू खेल की. चलिए हम आपको इस आर्टिकल में बताते हैं आखिर क्या है जल्लीकट्टू खेल और इसमें क्या होता है?
भोगी से होती है शुरुआत
पहले दिन को भोगी पोंगल कहा जाता है.इस दिन इंद्र देव की पूजा की जाती है. लोग पुराने सामान हटाकर नए जीवन की शुरुआत का संदेश देते हैं.
सूर्य पोंगल का महत्व
दूसरे दिन सूर्य पोंगल मनाया जाता है. इस दिन भगवान सूर्य की आराधना होती है. लोग नई फसल से बना पोंगल प्रसाद चढ़ाते हैं. परिवार के साथ मिलकर यह दिन मनाया जाता है.
मट्टू पोंगल और नंदी की पूजा
तीसरे दिन मट्टू पोंगल होता है. इस दिन भगवान शिव के वाहन नंदी की पूजा की जाती है. गाय और सांडों को सजाया जाता है. उन्हें अच्छे भोजन खिलाए जाते हैं.
जल्लीकट्टू खेल क्या है?
जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक पारंपरिक और प्राचीन खेल है, जो पोंगल त्योहार के दौरान मनाया जाता है, जिसमें खिलाड़ी बैल के कूबड़ को पकड़कर उसे काबू करने की कोशिश करते हैं. यह खेल बैल और इंसान के बीच साहस का प्रदर्शन है और इसमें बैल के सींग से बंधी सिक्कों की थैली (जल्ली) निकालने वाले को विजेता माना जाता है, जो सांस्कृतिक पहचान और देशी नस्ल के संरक्षण से जुड़ा है, लेकिन पशु क्रूरता के कारण विवादों में भी रहा है.
जल्लीकट्टू क्यों है खास?
मट्टू पोंगल का सबसे बड़ा आकर्षण जल्लीकट्टू होता है. यह एक पारंपरिक खेल है. इसे बैल को काबू करने की प्रतियोगिता भी कहा जाता है. इसमें युवक खुले मैदान में छोड़े गए सांड को पकड़ने की कोशिश करते हैं. इस खेल का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है. इससे मजबूत और अच्छी नस्ल के सांडों की पहचान की जाती है.इन सांडों का उपयोग खेती और प्रजनन के लिए किया जाता है. यह युवाओं को साहस और आत्मविश्वास दिखाने का मौका भी देता है.
जल्लीकट्टू का इतिहास
इसका वर्णन प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य शिलप्पदिकारम और दो अन्य ग्रंथों में मालीपादुकादम और कालीथोगई में भी मिलता है. इसके अलावा, एक 2500 साल पुरानी गुफा पेंटिंग में एक बैल का नियंत्रित करने वाले एक एक व्यक्ति को दर्शाया गया है जिसे इसी खेल से जोड़ा जाता है. जल्लीकट्टू को येरुथा जुवुथल, मदु पिदिथल, पोलरुधु पिदिथल जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है. यह खेल लगभग एक हफ्ते तक चलता है.
कानुम पोंगल से होता है समापन
पोंगल का चौथा दिन कानुम पोंगल कहलाता है. इस दिन खासतौर पर महिलाएं भाग लेती हैं. परिवार और रिश्तेदार साथ मिलकर घूमने जाते हैं. त्योहार का आनंद साझा किया जाता है. तमिलनाडु के मदुरै जिले में पालामेडु जल्लीकट्टू कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने किया. हजारों की संख्या में लोग इस आयोजन को देखने पहुंचे.
यह भी पढ़ें: प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे ‘छोटा भीम’ और ‘डोरेमोन’! सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















