ईरान के एक सीनियर नेता और पूर्व आईआरजीसी कमांडर मोहसिन रजाई अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी सीधी चेतावनी दी है। ईरान के वरिष्ठ नेता और रेवोल्यूशनरी गार्ड यानी आईआरजीसी के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने हाल ही में अमेरिका की विदेश नीति पर सीधा सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम खुद नहीं जानती कि वह क्या चाहती है। मोहसिन रजाई कहते हैं ईरान बातचीत के लिए गंभीर है लेकिन हर हालात के लिए पूरी तरह तैयार भी है। मोहसिन रजाई ने कहा ट्रंप कहते हैं कि उनका हाथ ट्रिगर पर है। हम उनका हाथ और उंगली काट देंगे। यह शब्द सिर्फ गुस्से का इजहार नहीं थे बल्कि इसके साथ आई खुली चेतावनी। हमारा सुझाव है पीछे हटें। अब और आगे मत बढ़ो। अगर हम चल पड़े तो फिर युद्ध विराम नहीं होगा। हम आपको अभी स्पष्ट रूप से बता रहे हैं।
आप ध्यान नहीं दे रहे हैं। अगर हम फिर से उस पवित्र रक्षा के द्वार में आ गए दूसरे साल के बाद से युद्ध तो यकीन मानिए आपको गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। यहीं रुक जाओ, वापस जाओ। ईरान की कौम एक बहुत समझदार और नेक कौम है। वह जंग नहीं चाहती। लेकिन अगर वह उस मुकाम पर पहुंच जाए जहां उसे काम खत्म करना पड़े तो और भी घटनाएं घटेंगी। बेशक हम सऊदी अरब के साथ अपनी भाईचारा और दोस्ती बनाए रखेंगे संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, क़तर, तुर्की और इराक के साथ। लेकिन इन देशों में आपके अड्डे सुरक्षित ना होंगे।
अब खबर ये भी आ रही है कि प्रदर्शनकारियों को मदद भेजने का लॉलीपॉप देकर ट्रंप ने बैक डोर से खामने के साथ समझौता कर लिया है।
बताया जा रहा है कि उन्होंने तेहरान फोन लगाया था और रात करीब 1:00 बजे ऐलान कर दिया कि वह ईरान पर अटैक नहीं करेंगे। हालांकि ट्रंप ने इस डील के लिए शर्त रखी जिसे ईरान ने सूरत निकलते ही पूरा भी कर दिया। इस कॉल का खुलासा ईरान के राजदूत अमीरी मोगदाम ने किया है। उन्होंने फोन पर फोन कॉल पर हुई सारी बातचीत भी डिटेल में बताई है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मुगदाम ने ईरान अमेरिका के बीच चल रहे टेंशन के बीच बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ट्रंप ने वाइट हाउस से रात के करीब 1:00 बजे ईरान को संदेश भिजवाया था कि हम ईरान पर हमला नहीं करना चाहते। अमेरिका ने ईरान को हालात कंट्रोल में करने और संयम बरतने की चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी हितों को निशाना ना बनाया जाए। ट्रंप ने इस मैसेज में खामेनई की उस सजा को कैंसिल करने की शर्त रखी जिसमें प्रदर्शनकारियों को फांसी होनी थी।
इसके बाद ट्रंप का मैसेज सभी अधिकारियों को सर्कुलेट कर दिया गया जो पाकिस्तान में ईरानी दूत तक भी पहुंचा। इसके बाद ईरान की तरफ से सुबह होते ही ऐलान शुरू हो गए थे कि प्रदर्शनकारियों की फांसी को रोक दी गई है। इस बीच मानव अधिकार संगठनों ने चौंकाने वाला दावा किया है जिसके मुताबिक ईरान में मौत का आंकड़ा बढ़ चुका है और अब तक 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा ईरान में इंटरनेट बंद हुए एक हफ्ता बीत चुका है।
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अमेरिका की ओर से ईरान को लगातार सैन्य हमले की धमकियां दी जा रही हैं। लेकिन इसी तनाव के बीच इस्लामिक दुनिया में बड़ा और असामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है। शिया और सुन्नी मुस्लिम देशों के बीच दशकों से चले आ रहे मतभेद फिलहाल कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी हमले की आशंका के बीच कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि सऊदी अरब ने ईरान को ऐसा भरोसा दिया है जिसने पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है। सऊदी अरब ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इतना ही नहीं रियाद ने यह भी साफ किया है कि वह अपने एयर स्पेस से ऐसे किसी भी लड़ाकू विमान को गुजरने की अनुमति नहीं देगा जिसका मकसद ईरान पर हमला करना हो।
सऊदी अरब ने तेहरान को सीधे तौर पर सूचित कर दिया है कि वह उसके खिलाफ की जाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा, और न ही उसके क्षेत्र और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जाएगा।
सरकार के करीबी एक अन्य सूत्र ने पुष्टि की कि यह संदेश तेहरान को पहुंचा दिया गया है। अमेरिका के खाड़ी क्षेत्र में, सऊदी अरब सहित, सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। यह संदेश ऐसे समय दिया गया जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने चेतावनी दी कि वह विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की कार्रवाई का जवाब दे सकता है, जबकि तेहरान ने कहा है कि नए हमले की स्थिति में वह अमेरिकी सैन्य और जहाजरानी संपत्तियों पर हमला करेगा।
मतभेदों के चलते ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। मौजूदा रुख यह भी संकेत देता है कि क्षेत्रीय स्थिरता को अब वैचारिक मतभेदों से ऊपर रखा जा रहा है। सऊदी विदेश मंत्रालय की एक सूत्र ने एएफपी को बताया कि रियाद ने ईरान को साफ शब्दों में अवगत करा दिया है कि वह उसके खिलाफ किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा। साथ ही सऊदी अरब अपनी जमीन और एयर स्पेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा। दूसरी तरफ अरब के अधिकारियों ने ट्रंप से हमले टालने का अनुरोध करने के अलावा वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों से भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक दमनकारी कार्रवाई समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान अमेरिका की किसी कार्रवाई के जवाब में अमेरिका या क्षेत्र में अन्य लक्ष्यों पर कोई प्रतिक्रिया देता है तो इसके ईरान के लिए गंभीर परिणाम होंगे।
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