Asian Games 2026: सुचिका तारियाल ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में रचा इतिहास, भारत को दिलाया पहला ब्रॉन्ज मेडल
Suchika Tariyal: एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026) में भारत की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) एथलीट सुचिका तारियाल ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। उन्होंने इस खेल अनुशासन में देश के लिए पहला ब्रॉन्ज मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया है। हालांकि, साथी एथलीट वरुण सन्याल का एमएमए अभियान चिकित्सीय कारणों के चलते शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया था, लेकिन सुचिका ने वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराकर भारतीय एमएमए जगत का मान बढ़ाया। सिंगापुर की हुई हुन टियो के खिलाफ 2-0 से हार के बाद उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
सेमीफाइनल में पहुंचकर पक्का किया था मेडल
इससे पहले रविवार को नागोया में महिलाओं की पारंपरिक 60 किग्रा एमएमए स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बनाते हुए सुचिका ने भारत के लिए पहला मेडल पक्का कर दिया था। उन्होंने अपने मुकाबले में अल्तांचिमेग बैगालमा को मात दी थी। दूसरे और अंतिम दौर में बैगालमा ने मुकाबले का रुख पलटने के लिए आक्रामक शुरुआत की, लेकिन सुचिका का डिफेंस इस निरंतर दबाव के आगे पूरी तरह चट्टान साबित हुआ।
शानदार दांव से दर्ज की थी जीत
जैसे ही बैगालमा ने लगातार हमले जारी रखे, सुचिका ने एक शानदार रिवर्सल करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर गिरा दिया (टेकडाउन)। उन्होंने राउंड के अंत तक अपना नियंत्रण बनाए रखा, जो जीत हासिल करने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त साबित हुआ। इस जीत के साथ ही सुचिका ने सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया और खेलों में भारत के पहले मेडल पर मुहर लगा दी।
शूटिंग में रुद्राक्ष, पार्थ और हिमांशु ने जीता सिल्वर
सोमवार को एशियाई खेलों में विभिन्न विधाओं में भारत का प्रदर्शन मिला-जुला लेकिन काफी रोमांचक रहा। एची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 की पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रुद्राक्ष पाटिल, पार्थ माने और हिमांशु ढिल्लों की तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता। भारतीय टीम ने कुल 1890.1 का स्कोर बनाया, जो पहले स्थान पर रहे चीन (1899.0) से थोड़ा ही पीछे रहा। दक्षिण कोरिया ने 1841.4 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। एशियन गेम्स 2026 में भारत का यह तीसरा मेडल है और तीनों ही शूटिंग में सिल्वर मेडल के रूप में आए हैं।
व्यक्तिगत फाइनल में पहुंचे निशानेबाज
शूटिंग प्रतियोगिताओं में रुद्राक्ष पाटिल ने तीसरा और हिमांशु ढिल्लों ने सातवां स्थान हासिल कर पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश किया, जबकि पार्थ माने 11वें स्थान पर रहे। इसके अलावा, तैराकी में श्रीहरि नटराज ने पुरुषों की 50 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल के लिए क्वालीफाई किया, जबकि ऋषभ दास को रिजर्व के रूप में रखा गया। हालांकि, मणि आकाश और गीतेश शाह पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल के फाइनल में जगह नहीं बना सके और धनुष सुरेश भी पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक के फाइनल से चूक गए।
अन्य खेलों में ऐसा रहा भारत का प्रदर्शन
वुशु स्पर्धा में न्येमान वांगसू महिलाओं की चांगक्वान फाइनल में 15वें स्थान पर रहीं। वहीं, टेबल टेनिस के महिला टीम ग्रुप एफ मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 3-0 से करारी शिकस्त दी। इसके अलावा सॉफ्ट टेनिस में आध्या तिवारी और जय मीना ने मिक्स्ड डबल्स ग्रुप बी अभियान की शुरुआत कंबोडिया के विवा चाओ और चानरोसेका खून को 5-0 से हराकर की। उन्होंने मंगोलिया के बुड न्यामदोरज और एंखखुस्लन गनबातार के खिलाफ भी जीत दर्ज की, जबकि दक्षिण कोरिया की किम येन-ह्वा और जाेक्यू पार्क के खिलाफ उनका ग्रुप बी मुकाबला भी निर्धारित शेड्यूल में शामिल था।
दिल को रखना है मजबूत तो अपनाएं ये योगासन
नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान और तनाव के कारण हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अपनी दिनचर्या में सुधार लाना बेहद जरूरी है, जिनमें योगासन बेहद जरूरी होता है। योग एक ऐसी प्राचीन पद्धति है जो न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि दिल को भी मजबूत बनाती है। नियमित योगासन करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, तनाव कम होता है और हृदय स्वस्थ रहता है।
ताड़ासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, गोमुखासन, अधोमुख श्वानासन, भुजंगासन, विपरीतकरणी आसन, मत्स्यासन, नाड़ीशोधन प्राणायम जैसे योगासन करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
ताड़ासन: सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर खींचने वाला योगासन है, जो शरीर का संतुलन सुधारता है और रक्त संचार को बेदतर करने में मदद करता है, जिससे हृदय और मांसपेशियों को सही पोषण मिलता है और मांसपेशियों को सही पोषण मिलता है।
अर्धचक्रासन: अर्धचक्रासन छाती और फेफड़ों को फैलाकर हृदय क्षेत्र को खोलता है, जिससे रक्त संचार और ऑक्सीजन का स्तर बेहतर होता है। गहरी सांस लेने की प्रक्रिया से तंत्रिका तंत्र शांत होता है, जिससे दिल पर मानसिक तनाव का असर कम होता है।
त्रिकोणासन: नियमित अभ्यास से हृदय प्रणाली सक्रिय होती है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। लंबी और गहरी सांसों के साथ इसे करने से मानसिक तनाव और चिंता कम होती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से हृदय को स्वस्थ रखता है।
वीरभद्रासन: यह आसन शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाता है। यह दिल तक ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और नसों में ब्लॉकेज की संभावना को कम करता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती, कंधे और जांघों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
गोमुखासन: यह आसन छाती की मांसपेशियों को खींचता और फैलाता है, जिससे हृदय क्षेत्र में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। बेहतर मेटाबॉलिज्म और रक्त प्रवाह के कारण यह शरीर में वसा और कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है।
अधोमुख श्वानासन: इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के सभी अंगों में रक्त संचार बेहतर होता है। इसे करने से खासतौर पर सिर की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे दिमाग को आराम मिलता है और मानसिक शांति महसूस होती है। जब मानसिक तनाव कम होता है, तो नींद अपने आप अच्छी आने लगती है।
भुजंगासन: गहरी सांस लेने की प्रक्रिया से पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे तनाव और कोर्टिसोल का स्तर कम होता है और दिल को सुकून मिलता है। यह आसन छाती (चेस्ट) और फेफड़ों के हिस्से को चौड़ा करता है, जिससे हृदय और फेफड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह सुधरता है।
विपरीतकरणी: यह आसन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करता है, जिससे पैरों और निचले शरीर से रक्त का प्रवाह वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर सुचारू रूप से बढ़ता है। यह हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को प्रबंधित करने में सहायक है।
मत्स्यासन: इस आसन में पीठ को ऊपर उठाने से छाती फैलती है, जिससे दिल और फेफड़ों पर दबाव कम होता है और उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से हृदय तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में पहुंचते हैं, जिससे दिल स्वस्थ रहता है।
नाड़ीशोधन प्राणायम: धीमी गति से सांस लेने और छोड़ने से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है, जिससे उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। यह प्राणायाम पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे हृदय की गति सामान्य और शांत होती है।
--आईएएनएस
एनएस/एएस
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