BJP बोली- कोर्ट ने ममता बनर्जी को सबक सिखाया:विधानसभा चुनाव में हार तय; I-PAC रेड मामले में बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि देश में कानून के शासन का पालन सुनिश्चित करने और संस्थानों को स्वतंत्र रूप से काम करने देने के लिए इस मामले की जांच जरूरी है। बेंच ने कहा कि इस मामले में कुछ बड़े सवाल हैं, जिनका जवाब नहीं मिला तो अराजकता फैल सकती है। अगर केंद्रीय एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए ईमानदारी से अपना काम कर रही हैं, तो क्या राजनीति करके रोका जा सकता है? सुनवाई के दौरान ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को चिंताजनक बताया। BJP विधायक बोलीं- कोर्ट ने ममता को सबक सिखाया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार को भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अच्छा सबक सिखाया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और अब उनकी झूठ की राजनीति उजागर हो गई है। अग्निमित्रा पॉल ने दावा किया कि 15 साल की तृणमूल कांग्रेस सरकार और उससे पहले की वाम सरकार ने रोहिंग्या, बांग्लादेशी घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं के सहारे चुनाव जीते। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसा नहीं होगा और अब तक 58 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, जबकि आगे और नाम हटने हैं। शहनवाज हुसैन बोले- 2026 विधानसभा चुनाव में ममता की हार तय भाजपा नेता सैयद शहनवाज हुसैन ने कहा कि ममता बनर्जी जानती हैं कि वह 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने वाली हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने वोट चोरी का आरोप लगाकर माहौल बनाया, उसी तरह ममता बनर्जी अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध कर रही हैं। शहनवाज हुसैन ने दावा किया कि ममता बनर्जी की 2026 चुनाव में पूरी तरह हारेंगी और भाजपा की जीत होगी। ममता का दावा- SIR प्रक्रिया में 84 लोगों की मौत इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। हावड़ा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान अब तक 84 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इन मौतों की जिम्मेदारी चुनाव आयोग और भाजपा की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड, बिहार और ओडिशा से लोगों को लाकर बंगाल में मतदान कराने की साजिश की जा रही है। अब पूरे मामले को समझिए 8 जनवरी: TMC के IT हेड के ठिकानों पर ED की रेड 8 जनवरी को ED की टीम ने प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दूसरी टीम सॉल्टलेक स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। कार्रवाई सुबह 6 बजे से शुरू हुई थी, लेकिन करीब 11:30 बजे के बाद मामला बढ़ा। सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर, प्रतीक के आवास पर पहुंचे। कुछ समय बाद सीएम ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। ममता वहां कुछ देर रुकीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी। इसके बाद वे I-PAC के ऑफिस भी गईं। उन्होंने कहा- गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं। ED ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 ठिकानों पर छापेमारी की गई। 9 जनवरी: ममता बनर्जी ने कोलकाता में मार्च निकाला 9 जनवरी को TMC के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली से कोलकाता तक विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी पर दो FIR भी दर्ज कराई है। उन्होंने कोलकाता में मार्च भी निकाला। इस दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनके पास गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ पेन ड्राइव हैं। उन्होंने कहा- दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं तक कोयला घोटाले की रकम पहुंचती है। मेरे पास इसके सबूत हैं। जरूरत पड़ी तो मैं इन्हें जनता के सामने पेश कर सकती हूं। ------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट की ED अफसरों पर दर्ज FIR पर रोक:I-PAC रेड मामले में ममता सरकार को नोटिस; कहा- एजेंसी के काम में रुकावट न डालें I-PAC रेड मामले में ED की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया और दो हफ्तों में जवाब मांगा। कहा कि केंद्रीय एजेंसी के आरोप गंभीर है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि सरकार ED के काम में दखल न डालें। पूरी खबर पढ़ें…
वेनेजुएलाई नेता ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रम्प को दिया:मचाडो बोलीं- राष्ट्रपति पर भरोसा कर रहे; ट्रम्प ने नोबेल विजेता को समर्थन नहीं दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद यह उनकी किसी भी वेनेजुएलाई नेता से पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। मुलाकात के बाद माचाडो ने कहा कि उन्होंने ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल भेंट किया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि आज हम वेनेजुएलावासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है।’ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मचाडो ने ट्रम्प को अपना पुरस्कार सौंपने के बारे में बताया, लेकिन उन्होंने दूसरी कोई जानकारी नहीं दी। वहीं, व्हाइट हाउस ने भी यह नहीं बताया कि ट्रम्प ने मेडल स्वीकार किया या नहीं। व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद मचाडो ने बाहर इकट्ठा हुए समर्थकों से स्पेनिश में कहा, 'हम राष्ट्रपति ट्रम्प पर भरोसा कर सकते हैं।' हालांकि, ट्रम्प ने अब तक माचाडो को वेनेजुएला की नई नेता के रूप में समर्थन नहीं दिया है। इसके बजाय वे वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ काम कर रहे हैं। नोबेल संस्थान बोला- पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन उपाधि नहीं ट्रम्प हमेशा नोबेल शांति पुरस्कार लेने की इच्छा जताते रहे हैं। जब यह मचाडो को मिला तो उन्होंने नाराजगी जताई। दूसरी ओर नोबेल कमिटी पहले ही साफ कर चुका है कि नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद इसे रद्द नहीं किया जा सकता। न ही इसे साझा किया जा सकता है और न ही किसी और को हस्तांतरित किया जा सकता है। यह निर्णय अंतिम है और हमेशा के लिए मान्य रहेगा। गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई बैठक से पहले, नोबेल संस्थान ने X पर पोस्ट कर बताया कि एक पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की उपाधि नहीं बदल सकता। अक्टूबर 2025 में मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें ‘वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके निरंतर प्रयासों और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण बदलाव की लड़ाई’ के लिए ये सम्मान मिला था। ट्रम्प-मचाडो के बीच वेनेजुएला में चुनाव पर बातचीत नहीं बैकठ के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेनेजुएला में संभावित चुनावों के लिए कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं। इस बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने कहा कि मचाडो के साथ इस विषय पर बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा, “मुझे यकीन नहीं है कि राष्ट्रपति इस बैठक में ऐसे किसी विषय पर बात कर रहे हैं । मुझे नहीं लगता कि उन्हें मचाडो से कुछ भी सुनने की जरूरत है।” लेविट ने आगे कहा कि मुझे लगता है यह एक ऐसी बैठक थी जिसके लिए राष्ट्रपति तैयार थे। मचाडो से व्यक्तिगत रूप से मिलने और वेनेजुएला पर बात करने के लिए। लेविट ने कहा 'मचाडो वेनेजुएला के कई लोगों के लिए एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज हैं।' बंद कमरे में हुई ट्रम्प-मचाडो की मीटिंग ट्रम्प-मचाडो की मुलाकात बंद कमरे में हुई। बैठक के ट्रम्प ने कोई बयान जारी नहीं किया, जैसा किसी भी मुलाकात के बाद किया जाता है। हालांकि, मचाडो ने उनके बीच हुई बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, "मैं ट्रम्प की स्पष्टता, वेनेजुएला की स्थिति के बारे में उनके ज्ञान और वेनेजुएला के लोगों के दर्द के प्रति उनकी चिंता से प्रभावित हुई।" उन्होंने आगे कहा कि वेनेजुएला "एकजुट" है। मारिया की जगह उनकी बेटी ने ग्रहण किया था शांति पुरस्कार मारिया कोरीना मचाडो नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो सकीं थी। मारिया की जगह उनकी बेटी एना कोरिना सोसा ने नॉर्वे के ओस्लो में यह पुरस्कार ग्रहण किया था। एना ने समारोह में अपनी मां का लिखा हुआ भाषण भी पढ़ा। मचाडो ने अपने लिखित संदेश में कहा था कि लोकतंत्र और आजादी को बचाने के लिए संघर्ष जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार वेनेजुएला ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। मचाडो पर यात्रा प्रतिबंध लगा था। वह एक साल से भी ज्यादा समय से छिपकर रह रही थी, इसलिए वे समय पर ओस्लो नहीं पहुंच सकीं। 2024 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार थीं मचाडो 2024 के चुनाव से पहले विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार थीं, लेकिन वेनेजुएला सरकार ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। इसके बाद उन्होंने दूसरे पार्टी के प्रतिनिधि एडमंडो गोंजालेज उर्रुतिया का समर्थन किया। इसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिला। वेनेजुएला में मचाडो के समर्थक पार्टी को साफ जीत मिली लेकिन शासन ने चुनाव परिणाम स्वीकार नहीं किया और सत्ता पर कब्जा बनाए रखा। मचाडो दुनिया में पहली बार तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति का भाषण बंद करा दिया था। यह घटना 14 जनवरी 2012 की है। शावेज संसद में 9 घंटे 45 मिनट का भाषण दे चुके थे। तभी मचाहो ने चिल्लाते हुए उन्हें ‘चोर’ कहा और लोगों की जब्त की गई संपत्ति को लौटाने को कहा। इसके जवाब में शावेज ने कहा कि वो बहस नहीं करेंगे क्योंकि वह इसके काबिल नहीं। यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई और माचाडो को एक साहसी विपक्षी नेता के रूप में स्थापित किया।
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