Responsive Scrollable Menu

विकासशील देशों की तेज आर्थिक वृद्धि से सुरक्षा परिषद और वैश्विक संस्थानों में सुधार की जरूरत: गुटेरेस

संयुक्त राष्ट्र, 15 जनवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा कि विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों की तेज आर्थिक वृद्धि की प्रवृत्ति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की मांग करती है।

गुटेरेस ने कहा, “हर दिन वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में विकसित अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है। हर दिन उभरती अर्थव्यवस्थाएं आकार, ताकत और प्रभाव में बढ़ रही हैं। हर दिन दक्षिण-दक्षिण व्यापार, उत्तर-उत्तर व्यापार से आगे निकलता जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि “हमारी संरचनाओं को इस बदलती दुनिया को प्रतिबिंबित करना होगा,” क्योंकि 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थानों की स्थापना हुई थी, तब जो व्यवस्थाएं कारगर थीं, वे 2026 की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीं।

महासचिव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार उतना ही आवश्यक है, जितना कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की शक्ति संरचनाओं को अद्यतन करना।

संयुक्त राष्ट्र की इस महीने जारी विश्व अर्थव्यवस्था पर रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं में 4.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विकसित देशों की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत—जिसने सुधारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी पेश की है—पिछले वर्ष 7.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा।

यह महासचिव गुटेरेस का महासभा में अपने कार्यकाल के दौरान प्राथमिकताओं पर अंतिम वार्षिक संबोधन था, क्योंकि वह इस वर्ष अपना दो कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रभावित करने वाले वैश्विक संकटों का उल्लेख करते हुए भी उन्होंने कुछ सकारात्मक संकेतों की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा, “आइए यह स्वीकार करें कि इस उथल-पुथल के बीच भी हमने संयुक्त राष्ट्र के लिए ऐसे क्षेत्रों में जगह बनाई है, जहां इसकी मौजूदगी पहले सुनिश्चित नहीं थी।”

गुटेरेस ने अमेरिका या रूस का नाम नहीं लिया—जो सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और जिन पर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं, तथा जिन्होंने वीटो शक्ति के जरिए परिषद को बाधित किया है।

उन्होंने कहा, “कुछ लोग अपने कार्यों के जरिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को समाप्ति की ओर धकेलना चाहते हैं, जो वैश्विक सहयोग की नींव को हिला रहे हैं और बहुपक्षवाद की सहनशक्ति की परीक्षा ले रहे हैं।”

उन्होंने दृढ़ता से कहा, “मैं आपको आश्वस्त करता हूं: हम हार नहीं मानेंगे।”

अमेरिका का नाम लिए बिना गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र के सामने खड़े वित्तीय संकट का भी जिक्र किया, जो महासभा द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत तय बकाया राशि वाशिंगटन द्वारा न चुकाने के कारण उत्पन्न हुआ है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

आईएमएफ बेलआउट को दोष देना पाकिस्तान की अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस) एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति 25 करोड़ की आबादी को सतत प्रगति की ओर ले जाने में सक्षम नहीं है। देश के सभी 20 प्राथमिक निर्यात उत्पादों और छह प्रमुख निर्यात कारकों पर असर डालने वाली बहुआयामी बाधाओं के कारण आर्थिक सुधार संभव नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को दोष देना पाकिस्तान के लिए कोई समाधान नहीं है, जबकि देश लगभग हर आर्थिक पैमाने पर गंभीर संकट से जूझ रहा है।

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा गठित एक पैनल ने उद्योग जगत के हितधारकों से चर्चा के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा। यह पैनल अगले वर्ष के अंत में मौजूदा बेलआउट कार्यक्रम की अवधि समाप्त होने के बाद आईएमएफ कार्यक्रम से बाहर निकलने की रणनीति तैयार करने के लिए बनाया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पैनल द्वारा “सरकार की ओर से आर्थिक सुधारों को आक्रामक रूप से लागू न कर पाने की जिम्मेदारी को आईएमएफ की सख्त वित्तीय शर्तों पर डालना, दरअसल राज्य की अपनी कर्तव्यहीनता पर पर्दा डालने का प्रयास है।”

इसके अलावा, आर्थिक और निर्यात वृद्धि में बाधा बनने वाले जिन कारणों का उल्लेख पैनल ने किया है, जैसे ऊर्जा की ऊंची और अस्थिर लागत, नीतियों की अनिश्चितता, विकृत कर व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुविधा से जुड़ी अड़चनें, संस्थागत विखंडन और नियामकीय बोझ, ये कोई नए मुद्दे नहीं हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, “इन समस्याओं का जिक्र पहले भी दानदाताओं, सरकारी रिपोर्टों और मीडिया विश्लेषणों में बार-बार होता रहा है।”

आईएमएफ सरकार को अनुकूल कारोबारी माहौल बनाने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। इसके विपरीत, रिपोर्ट के मुताबिक, “पाकिस्तानी अधिकारी सुस्त और जड़ हो चुकी अर्थव्यवस्था के लिए आईएमएफ कार्यक्रम को दोषी ठहरा रहे हैं, ताकि अपनी अक्षमता को छिपाया जा सके और सत्तारूढ़ दल की उस अनिच्छा पर पर्दा डाला जा सके, जिसमें वह राजनीतिक संरक्षण प्राप्त किराया-खोरी (रेंट-सीकिंग) ढांचों को खत्म नहीं करना चाहता।”

डॉन की एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएमएफ की कठोर आर्थिक सोच पाकिस्तान को वर्षों तक कम-विकास के जाल में फंसा सकती है। मौजूदा रणनीति पर बुनियादी पुनर्विचार और लागू की जा रही दिखावटी वित्तीय सख्ती में बदलाव के बिना, अर्थव्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहेगी और आम पाकिस्तानी बेवजह इसका खामियाजा भुगतते रहेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक मौजूदा सरकार ने आईएमएफ की निगरानी में “कठोर मितव्ययिता नीतियों के जरिए आम पाकिस्तानियों पर भारी बोझ” डाला है।

इसमें कहा गया, “सरकार ने अपने या अपने समर्थकों के खर्च में किसी तरह की कटौती करने के बजाय भारी करों और सब्सिडी में कटौती के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय समायोजन किया है,” जो आम जनता के लिए और अधिक पीड़ादायक साबित हुआ है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

बायकॉट के बाद अब कब शुरू होगा बांग्लादेश प्रीमियर लीग, खिलाड़ियों ने की थी स्ट्राइक

Bangladesh Premier League resume: बांग्लादेश क्रिकेट में बवाल के बीच एक बार फिर बीबीएल शुरू हो सकता है. पूर्व डायरेक्टर नजमुल इस्लाम के खिलाफ विरोध में बांग्लादेश के खिलाड़ियों ने 15 जनवरी को हड़ताल कर दिया था, जिसके कारण टूर्नामेंट के मैच को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन नजमुल इस्लाम को पद हटाए जाने के बाद खिलाड़ी फिर से मैदान पर उतरने के लिए तैयार हैं. Fri, 16 Jan 2026 09:59:41 +0530

  Videos
See all

Maharashtra BMC election 2026 results live updates: BMC चुनाव में कांटे की टक्कर |MVA |Mahayuti |BJP #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-16T05:11:58+00:00

BMC Election Result 2026 Live: कोल्हापुर से कांग्रेस सबसे आगे | Maharashtra BMC Election Result #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-16T05:09:25+00:00

BMC Election Result 2026: नागपुर से BMC चुनाव पर बड़ी खबर | Nagpur | Top News | Aaj Tak #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-16T05:11:11+00:00

Brij Bhushan Singh : राजा भैया को लेकर बृजभूषण सिंह का बड़ा बयान |Top News | Raja Bhaiya | #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-16T05:15:00+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers