हसीना और कमाल की सजा को मौत में बदलने की मांग वाली याचिका पर 20 जनवरी को होगी सुनवाई
ढाका, 15 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने वाली याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी। बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने गुरुवार को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) के अभियोजक की अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है।
इस अपील में शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को जुलाई में हुए सामूहिक विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मिली सजा को बढ़ाने की मांग की गई है। अपीलेट डिवीजन के जज-इन-चैंबर जस्टिस एमडी रेजाउल हक की ओर से दिए गए ऑर्डर में कहा गया, सुनवाई की तारीख 20 जनवरी को तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जल्दी सुनवाई करने की अपील पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया है। यह मामला सुबह अपीलेट डिवीजन चैंबर जज कोर्ट की कॉज लिस्ट में आइटम नंबर 58 के तौर पर लिस्टेड था। आईसीटी अभियोजन ने 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन में अपील फाइल की।
अपील में अभियोजक ने जुलाई में हुई हिंसा के दौरान किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के कुछ मामलों में उनकी सजा को बढ़ाकर मौत की सजा देने की मांग की थी।
आईसीटी अभियोजक गाजी एमएच तममी ने कहा था कि जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा काफी नहीं है और इसकी जगह मौत की सजा दी जानी चाहिए। हसीना और कमाल के लिए मौत की सजा की अपील के बाद ट्रिब्यूनल परिसर में एक प्रेस ब्रीफिंग में तममी ने कहा था, पहला फैसला फिर से बने आईसीटी में सुनाया गया था। जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में, हसीना और कमाल को सजा सुनाई गई थी। उन्हें एक आरोप में उम्रकैद और दूसरे में मौत की सजा मिली थी।
उन्होंने कहा, हमने सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय अदालत में अपील की है कि उम्रकैद की जगह मौत की सजा दी जाए। इसके लिए आठ वजहें बताई गई हैं। फैसला आने के तीस दिनों के अंदर अपील फाइल करनी होती है। हमने यह पहले ही कर दिया था। अपील के 60 दिनों के अंदर सेटलमेंट का नियम है। मुझे उम्मीद है कि इस अपील का निपटारा समय के अंदर हो जाएगा।
बता दें कि 17 नवंबर को दिए गए इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने दोनों नेताओं को एक बड़े आरोप में मौत की सजा और एक अलग आरोप में प्राकृतिक तरीके से मौत तक जेल की सजा सुनाई थी।
अपील दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सोमवार को तमीम ने कहा था, हमने आज 8 वजहों से अपील फाइल की है ताकि उन आरोपों में सजा बढ़ाई जा सके, जिनमें उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई थी।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत और अरब लीग ने राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर की चर्चा
काहिरा, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के विदेश राज्य मंत्री (एमओएस) कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार को अरब लीग के सचिव जनरल अहमद अबुल घीत के साथ बैठक की। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच बड़े पैमाने पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर चर्चा हुई।
कीर्ति वर्धन सिंह और जनरल घीत ने इस महीने के आखिर में नई दिल्ली में होने वाली दूसरी भारत-अरब फॉरेन मिनिस्टीरियल मीट का भी स्वागत किया।
एमओएस सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, अरब लीग के सेक्रेटरी जनरल, अहमद अबुल घीत से मिलकर खुशी हुई। अरब लीग के साथ इंडिया के बड़े पैमाने पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर अच्छी बातचीत हुई। हमने इस महीने के आखिर में नई दिल्ली में होने वाली दूसरी इंडिया-अरब फॉरेन मिनिस्टीरियल मीट का भी स्वागत किया।
पिछले साल नवंबर में, विदेश मंत्रालय (एमईए) में सचिव (दक्षिण) नीना मल्होत्रा ने नई दिल्ली में अरब राजदूत के साथ एक कंसल्टेशन मीटिंग की अध्यक्षता की थी और दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की कोशिशों पर चर्चा की।
एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, सचिव (दक्षिण) ने नई दिल्ली में अरब के राजदूत के साथ एक कंसल्टेशन मीटिंग की अध्यक्षता की। मीटिंग में भारत और अरब के बीच सहयोग को और मजबूत करने की कोशिशों पर चर्चा हुई।
भारत के उन देशों के साथ करीबी और दोस्ताना संबंध हैं जो अरब स्टेट्स लीग (एलएएस) बनाते हैं। इसे अरब लीग भी कहा जाता है। ये संबंध पुराने समय से हैं जब व्यापारी, विद्वान और राजदूत अक्सर अरब सागर और भारत को पश्चिम एशिया और अरब प्रायद्वीप से जोड़ने वाले जमीनी रास्तों से ज्ञान और सामान साझा करते थे। भाषा और धर्म के जुड़ाव के जरिए एक साझा सांस्कृतिक विरासत इन ऐतिहासिक रिश्तों को ऊर्जा देती रहती है।
अरब लीग की स्थापना 1945 में काहिरा में हुई थी, जिसमें शुरू में इन देशों के अलग-अलग हितों को बढ़ावा देने के लिए सात सदस्य थे। मिस्र में भारतीय दूतावास के बयान के अनुसार, अभी लीग में अरब दुनिया के 22 सदस्य देश हैं। इनमें उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के देश भी शामिल हैं।
अरब लीग के देश भारत के बड़े पड़ोस का हिस्सा हैं। इस क्षेत्र के साथ जुड़ाव को गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता, बड़े अंतरराष्ट्रीय विकास पर साझा विचार, और मजबूत आर्थिक और कमर्शियल संबंध, भारत-अरब संबंधों का आधार हैं। भारत का ज्यादातर बाहरी व्यापार स्वेज नहर, लाल सागर और अदन की खाड़ी से होकर गुजरता है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और आज ग्लोबल बिजनेस डायनामिक्स के भविष्य के रास्ते को आकार देने की बहुत ज्यादा क्षमता वाला एक ग्लोबल प्लेयर है। एलएएस और उसके सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय आर्थिक क्षेत्र में एक जरूरी भूमिका निभा रहे हैं और आर्थिक साझेदारी के कई मौके दे रहे हैं।
पिछले दशक में, भारत और अरब देशों ने अच्छे विकास और आर्थिक बदलावों का एक नया दौर देखा है, जो स्थिरता के तरीके से आर्थिक विकास का समर्थन करने में मदद करते हैं।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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