Pension Life Certificate: पेंशन रुकने का खतरा? लाइफ सर्टिफिकेट की वैलिडिटी जरूर चेक करें
पेंशनर्स के लिए हर महीने खाते में आने वाली पेंशन घर का बजट चलाने का बड़ा सहारा होती। लेकिन पेंशन जारी रखने के लिए सिर्फ बैंक खाता होना काफी नहीं है। पेंशनर को समय-समय पर यह साबित करना होता कि वह जीवित है और पेंशन पाने की पात्रता रखता है। इसके लिए लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी होता है।
हालांकि इसकी वैलिडिटी हर पेंशन व्यवस्था में अलग हो सकती। EPS-95 पेंशनर्स के लिए ईपीएफओ के मुताबिक जीवन प्रमाण के जरिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने पर यह जमा करने की तारीख से एक साल तक वैध रहता है।
लाइफ सर्टिफिकेट की वैलिडिटी खत्म हुई तो क्या होगा?
अगर लाइफ सर्टिफिकेट की वैलिडिटी खत्म हो जाती और नया प्रमाण पत्र जमा नहीं किया जाता, तो पेंशन वितरण प्राधिकरण आगे की पेंशन का भुगतान रोक या निलंबित कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि पेंशन हमेशा के लिए बंद हो गई। जरूरी लाइफ सर्टिफिकेट जमा और स्वीकार होने के बाद लागू नियमों के मुताबिक पेंशन दोबारा शुरू हो सकती। इसलिए पेंशन रुकने का इंतजार करने के बजाय समय रहते अपने सर्टिफिकेट की वैलिडिटी चेक करना बेहतर है।
EPS-95 वालों के लिए बदला नियम
EPS-95 पेंशनर्स के लिए एक अहम बात यह है कि जीवन प्रमाण यूज करने वालों के लिए हर साल नवंबर में लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की पुरानी व्यवस्था बदल चुकी है। डिजिटल सर्टिफिकेट जमा करने की तारीख से एक साल तक वैध रहता।
यानी अगर किसी पेंशनर ने मार्च में सर्टिफिकेट बनाया है तो उसकी वैलिडिटी अगले मार्च तक हो सकती। इसलिए सिर्फ नवंबर को अपनी डेडलाइन मानने की जरूरत नहीं है। अपने पिछले सर्टिफिकेट की तारीख जरूर देखें।
घर से भी बन सकता है डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट
जीवन प्रमाण की सुविधा अधिकृत केंद्रों, पेंशन वितरण एजेंसियों और उपलब्ध डिजिटल माध्यमों से ली जा सकती है। अब समर्थ एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइड के जरिए आधार-बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। ऐसे में हर बार अलग बायोमेट्रिक डिवाइस की जरूरत नहीं पड़ सकती।
सर्टिफेकट बनाने के लिए आधार नंबर, पीपीओ नंबर, बैंक डिटेल और मोबाइल नंबर जैसी पेंशन संबंधी जानकारी चाहिए। इसके बाद जरूरत के मुताबिक बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन किया जाता है। जानकारी गलत भरने पर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट रिजेक्ट हो सकता है।
लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने के बाद भी करें ये काम
लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने के बाद उसका स्टेटस जरूर चेक करें। जीवन प्रमाण के जरिए सर्टिफिकेट को चेक या डाउनलोड किया जा सकता है और यह भी पता लगाया जा सकता है कि वह स्वीकार हुआ या रिजेक्ट।
अगर गलत जानकारी के कारण सर्टिफिकेट रिजेक्ट हो जाए तो पेंशन वितरण एजेंसी से संपर्क कर सही जानकारी के साथ नया Certificate बनाना चाहिए। याद रखें, लाइफ सर्टिफिकेट छोटी-सी औपचारिकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने पर पेंशन भुगतान में रुकावट आ सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
Aadhar Sim Fraud: आपके आधार पर तो नहीं चल रहा कोई अनजान SIM? ऐसे करें तुरंत चेक
आज मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का जरिया नहीं है। बैंकिंग, यूपीआई, सोशल मीडिया और कई जरूरी ऑनलाइन सेवाओं में मोबाइल नंबर जुड़ा होता है। ऐसे में अगर आपके नाम पर कोई अनजान सिम चल रहा है तो यह परेशानी खड़ी कर सकता। खास बात यह है कि आपके आधार से आपकी जानकारी के बिना भी मोबाइल कनेक्शन लिया गया हो सकता।
दूरसंचार विभाग यानी डीओटी के नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। नया सिम जारी करते समय आधार पहचान और पते के वैध दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल होता है। यही सुविधा गलत हाथों में पहुंचने पर जोखिम भी पैदा कर सकती है।
आपके नाम पर कितने नंबर हैं, ऐसे पता करें
सरकार ने इसी तरह के मामलों में लोगों को अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन देखने की सुविधा देने के लिए संचार साधी प्लेटफॉर्म शुरू किया है। इसमें टेलिकॉम एनालेटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन (TAFCOP) सुविधा भी है।
चेक करने के लिए संचार साथी वेबसाइट पर जाकर अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन देखने का विकल्प चुनें। इसके बाद अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर डालना होगा। CAPTCHA भरने के बाद OTP से पहचान सत्यापित करें।
वेरिफिकेशन पूरा होते ही स्क्रीन पर आपके नाम से जुड़े मोबाइल कनेक्शन की जानकारी सामने आ जाएगी। अगर सूची में ऐसा नंबर दिखता है जिसे आपने कभी नहीं लिया या पहचानते नहीं हैं तो उसे नजरअंदाज न करें। प्लेटफॉर्म के जरिए उसके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जा सकती है।
अनजान SIM खतरनाक क्यों हो सकता है?
आपके नाम पर जारी कोई गलत SIM ठगी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल कॉल, SMS, सोशल मीडिया अकाउंट या वित्तीय धोखाधड़ी में हो सकता है। मोबाइल नंबर बैंकिंग और OTP आधारित सेवाओं से जुड़ा होने के कारण मामला और गंभीर हो जाता है।
सिम जारी करने के नियम भी हुए सख्त
सरकार ने SIM जारी करने की प्रक्रिया में भी कई सुरक्षा उपाय किए हैं। नए कनेक्शन के लिए Digital KYC या e-KYC जरूरी है। आम उपभोक्ताओं को बड़ी संख्या में SIM जारी करने पर भी रोक लगाई गई है।
इसके अलावा बंद हो चुके मोबाइल नंबर को दोबारा जारी करने के मामले में भी सुरक्षा व्यवस्था है। निष्क्रिय नंबर को किसी दूसरे ग्राहक को देने से पहले 90 दिन की प्रतीक्षा अवधि रखी गई है।
इसलिए समय-समय पर यह जरूर जांच लें कि आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर चल रहे हैं। कोई अनजान नंबर दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें क्योंकि आपकी पहचान पर चल रहा एक गलत SIM आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है।
आसान सवाल-जवाबों से जानें कैसे आधार से अनजान मोबाइल लिंक हो सकता
सवाल: मैं कैसे चेक कर सकता हूं कि मेरे आधार कार्ड से अनजान मोबाइल नंबर लिंक हैं या नहीं?
जवाब: आप सरकार के संचार साथी प्लेटफॉर्म पर जाकर अपने आधार कार्ड से लिंक अनजान मोबाइल नंबर चेक कर सकते हैं, जिसमें TAFCOP सुविधा शामिल है। आपको अपना 10-डिजिट का मोबाइल नंबर डालना होगा, एक CAPTCHA पूरा करना होगा, और अपनी पहचान से जुड़े कनेक्शन देखने के लिए एक OTP से अपनी पहचान वेरिफाई करनी होगी।
सवाल: संचार साथी प्लेटफॉर्म क्या है और यह सिम कार्ड फ्रॉड में कैसे मदद करता है?
जवाब: संचार साथी प्लेटफॉर्म एक सरकारी पहल है जो कंज्यूमर्स को उन मोबाइल कनेक्शन को पहचानने और रिपोर्ट करने में मदद करती है जिन्हें वे नहीं पहचानते हैं, जिससे फ्रॉड सिम कार्ड के लिए आधार डिटेल्स का गलत इस्तेमाल रोका जा सके। यह यूज़र्स को अपने नाम से रजिस्टर्ड सभी मोबाइल नंबर देखने और किसी भी अनऑथराइज्ड कनेक्शन की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है, जिसे बाद में ब्लॉक किया जा सकता है।
सवाल: एक व्यक्ति अपने नाम से ज़्यादा से ज़्यादा कितने मोबाइल कनेक्शन रजिस्टर्ड करा सकता है?
जवाब: डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) के नियमों के तहत, एक व्यक्ति अपने नाम पर ज़्यादा से ज़्यादा नौ मोबाइल कनेक्शन रजिस्टर्ड करा सकता है।
(प्रियंका कुमारी)
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