Dollar vs Rupee: डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा रुपया, 3 साल बाद Fed ने बढ़ाईं ब्याज दरें
भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया। गुरुवार, 17 सितंबर को डॉलर के मुकाबले रुपया 96 का अहम स्तर पार कर गया। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 96.03 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिन यह 95.95 के आसपास बंद हुआ था। जुलाई के बाद यह पहला मौका है, जब रुपया 96 के पार गया।
भारतीय रुपए में आई इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला है। फेड ने तीन साल से ज्यादा समय बाद पहली बार ब्याज दर में बढ़ोतरी की। ब्याज दर 0.25% बढ़ाकर 3.75% से 4% के दायरे में कर दी गई। फेड ने कहा है कि अमेरिका में महंगाई अब भी ऊंची बनी हुई और इसे 2% के लक्ष्य की तरफ लाने के लिए यह कदम उठाया गया।
आगे भी बढ़ सकती हैं अमेरिकी ब्याज दरें
बाजार की चिंता सिर्फ इस बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। फेड के अनुमानों ने आगे भी सख्त मॉनेटरी पॉलिसी जारी रहने के संकेत दिए हैं। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दूसरी एशियाई करेंसी पर दबाव बढ़ा है। डॉलर इंडेक्स भी सात हफ्ते के ऊंचे स्तर के आसपास पहुंच गया।
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबारी के मुताबिक, रुपया पिछले दो सेशन से 96 के आसपास बना हुआ था और अब ग्लोबल हालात इसके लिए ज्यादा मुश्किल हो गए हैं। अगर रुपया लगातार 96 के पार बना रहता है तो डॉलर के मुकाबले 96.30 से 96.50 तक का स्तर देखने को मिल सकता है।
महंगा कच्चा तेल भी बढ़ा रहा मुश्किल
रुपये के लिए दूसरी बड़ी परेशानी कच्चे तेल की कीमत है। ब्रेंट क्रूड में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन भाव अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में महंगा क्रूड डॉलर की मांग बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी भी रुपये की मुश्किल बढ़ा रही है।
अब RBI पर भी रहेंगी नजरें
Fed के रेट बढ़ाने के बाद अब नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर हैं। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक अक्टूबर की शुरुआत में होनी है। महंगा कच्चा तेल और महंगाई का दबाव बना रहा तो ब्याज दरों को लेकर RBI के अगले कदम पर बाजार की खास नजर रहेगी।
(प्रियंका कुमारी)
PM Modi के 25 साल: 2013-14 से 2025-26 तक कैसे बदली भारत की अर्थव्यवस्था? अमित चिमनानी ने बताए 30 बड़े आंकड़े
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारत की आर्थिक यात्रा से जुड़े आंकड़े सामने रखे गए हैं। वरिष्ठ सीए एवं आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ अमित चिमनानी ने वर्ष 2013-14 और 2025-26 की तुलना करते हुए अर्थव्यवस्था के 30 प्रमुख मापदंडों के आंकड़े पेश किए हैं। इनमें टैक्स कलेक्शन, GST, बजट, निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार, FDI, DBT, स्टार्टअप, मुद्रा योजना, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, रक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
चिमनानी के प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। उदाहरण के तौर पर नेट इनकम टैक्स कलेक्शन ₹6.38 लाख करोड़ से बढ़कर ₹23.40 लाख करोड़, बजट ₹16.65 लाख करोड़ से बढ़कर ₹50.65 लाख करोड़ और मोबाइल फैक्ट्रियों की संख्या 2 से बढ़कर 300 बताई गई है।
2013-14 से 2025-26 तक भारत की आर्थिक तस्वीर
अमित चिमनानी द्वारा प्रस्तुत 30 आंकड़ों में टैक्स, बजट, एक्सपोर्ट, विदेशी मुद्रा भंडार, डिजिटल लेनदेन, स्टार्टअप, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग समेत अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों की तुलना की गई है।
टैक्स, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा बदलाव
प्रस्तुत आंकड़ों में टैक्स कलेक्शन, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े आंकड़े खास तौर पर सामने आते हैं। DPIIT के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.23 लाख से अधिक हो चुकी थी।
इसी तरह PM MUDRA Yojana के तहत 27 मार्च 2026 तक 57.79 करोड़ ऋण और ₹40.07 लाख करोड़ की राशि का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध है।
Disclaimer: इस रिपोर्ट में 2013-14 और 2025-26 के तुलनात्मक आंकड़े अमित चिमनानी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। अलग-अलग आर्थिक संकेतकों की परिभाषा, गणना पद्धति और डेटा अवधि अलग हो सकती है। इसलिए आंकड़ों को संबंधित सरकारी स्रोतों/विभागों के उपलब्ध आंकड़ों के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यह रिपोर्ट प्रस्तुत आंकड़ों का विश्लेषण है, किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं।
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