IndiGo ने बढ़ाए कई चार्ज: अब शिशु के टिकट से अतिरिक्त सामान तक देना होगा ज्यादा पैसा; देखें नई फीस
IndiGo New Charges: इंडिगो से घरेलू उड़ान में सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है। एयरलाइन ने शिशु किराया, अतिरिक्त सामान और कुछ अन्य सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी की है। अब 2 साल से कम उम्र के शिशु के लिए किराया ₹2,000 की जगह ₹3,000 देना होगा। वहीं, एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सामान का शुल्क ₹700 से बढ़कर ₹800 प्रति किलो हो गया है।
IndiGo ने बढ़ाए ये चार्ज
इंडिगो की नई फीस के मुताबिक, घरेलू उड़ानों में कई सेवाओं के लिए यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। शिशु के किराए से लेकर एक्स्ट्रा बैगेज और प्राथमिकता सेवाओं तक के शुल्क में बदलाव किया गया है।
| सेवा | पुराना शुल्क | नया शुल्क |
| 2 साल से कम उम्र के शिशु का किराया | ₹2,000 | ₹3,000 |
| एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सामान | ₹700/किलो | ₹800/किलो |
| माता-पिता के बिना बच्चे की यात्रा | ₹5,000 | ₹5,999 |
| प्राथमिकता चेक-इन और बोर्डिंग | ₹450 | ₹650 |
| यात्रा प्रमाण पत्र | ₹200 | ₹300 |
शिशु के टिकट के लिए देने होंगे ₹3,000
अब 2 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ घरेलू उड़ान में यात्रा करने वाले माता-पिता को शिशु के लिए ₹3,000 किराया देना होगा। पहले यह शुल्क ₹2,000 था। यानी प्रति यात्रा ₹1,000 की बढ़ोतरी हुई है।
शिशु को अलग सीट नहीं दी जाती है, लेकिन टिकट बुक करते समय उसकी यात्रा की जानकारी देना जरूरी होता है।
एक्स्ट्रा बैगेज भी हुआ महंगा
इंडिगो ने एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सामान के शुल्क में भी बढ़ोतरी की है। अब तय सीमा से अधिक सामान होने पर यात्रियों को ₹800 प्रति किलो के हिसाब से भुगतान करना होगा।
मसलन, यदि किसी यात्री के पास निर्धारित सीमा से 5 किलो अधिक सामान है, तो उसे ₹4,000 अतिरिक्त देने होंगे।
अकेले सफर करने वाले बच्चे का चार्ज बढ़ा
माता-पिता या अभिभावक के बिना यात्रा करने वाले नाबालिग बच्चों के लिए भी शुल्क बढ़ाया गया है। यह चार्ज अब ₹5,000 से बढ़कर ₹5,999 हो गया है।
इसके अलावा प्राथमिकता चेक-इन और बोर्डिंग तथा यात्रा प्रमाण पत्र से जुड़े शुल्क में भी बदलाव किया गया है।
यात्रियों की जेब पर कितना पड़ेगा असर?
नई फीस का असर खास तौर पर बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों और अधिक सामान लेकर एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, केवल शिशु किराए में बदलाव से एक तरफ की यात्रा पर ₹1,000 अतिरिक्त देने होंगे, जबकि 5 किलो अतिरिक्त सामान पर ₹4,000 का शुल्क बन सकता है।
Tata Sons: एन चंद्रशेखरन ने कहा था छोड़ेंगे पद, लेकिन फिर चुने गए चेयरमैन; नोएल टाटा ने किया विरोध
Tata Sons Chairman N Chandrasekaran: टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर एक और पांच साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि चंद्रशेखरन ने पिछले महीने ही फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा पद संभालने से इनकार किया था। अब बोर्ड के फैसले से उनकी दोबारा नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, बोर्ड की वोटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब RBI ने टाटा संस की Core Investment Company (CIC) के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अपील खारिज कर दी है। इसके बाद टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
अगस्त में चंद्रशेखरन ने क्यों कहा था पद छोड़ेंगे?
एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को बताया था कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसके बाद उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई थी।
अब बोर्ड के ताजा फैसले से उत्तराधिकारी चुनने को लेकर बनी स्थिति बदल गई है।
नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति का विरोध किया
बोर्ड की वोटिंग में नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया। बाकी बोर्ड सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। इस तरह बोर्ड की वोटिंग में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को समर्थन मिला, जबकि नोएल टाटा इसके खिलाफ रहे।
RBI के फैसले के बाद फिर चर्चा में टाटा संस की लिस्टिंग
एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का फैसला RBI के एक अहम निर्णय के कुछ दिन बाद आया है। RBI ने टाटा संस की Core Investment Company (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अपील खारिज कर दी है।
टाटा संस ने नियामकीय ढांचे से बाहर निकलने के लिए यह आवेदन किया था। RBI के फैसले के बाद कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग से जुड़ा मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
टाटा संस में चंद्रशेखरन का कार्यकाल
एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। 2022 में उन्हें दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त किया गया था। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद उनका कार्यकाल एक और पांच साल के लिए बढ़ जाएगा।
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर क्या है मामला?
टाटा संस के रेगुलेटरी स्टेटस और संभावित लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कंपनी के प्रमुख शेयरधारकों में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66% हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 18% बताई जाती है।
RBI के हालिया फैसले के बाद टाटा संस के रेगुलेटरी स्टेटस और लिस्टिंग से जुड़े सवाल एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गए हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi









/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
