अमेठी का राजमहल, कभी अंग्रेजों के आंखों का था किरकिरी, आज कहते हैं भूपित भवन, जानें इतिहास
अमेठी राज महल और रियासत की अलग कहानी है. 1857 की क्रांति में जो राजमहल और रियासत अंग्रेजों का कब्जा हुआ करती थी उसे राजा ने अंग्रेजों से छुड़ा लिया और युद्ध के जरिए अंग्रेजों को परास्त कर दिया गया. आज अमेठी का ऐतिहासिक राजमहल अमेठी में मौजूद है जो धरोहर के रूप में जाना जाता है. अमेठी में इसे भूपति भवन के रूप में जाना जाता है. यह महल अपनी नक्काशी अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध है महल को बनाने में लखनौरी ईटों का इस्तेमाल किया गया था. आज भी यह महल बिना किसी आंतरिक खर्च और बिना मरम्मत के पुराना ऐतिहासिक महल जैसा चमचमा रहा है इसकी बनावट आज भी चर्चा का केंद्र रहती है.
औली की बर्फ से राजस्थान के रेगिस्तान तक: एम777 हॉवित्जर की दहाड़ से कांपा दुश्मन, पलक झपकते तबाह हुए टारगेट
राजस्थान के तपते रेगिस्तान में भारत और अमेरिका की सेनाओं ने अपनी घातक आर्टिलरी ताकत का ऐसा खौफनाक प्रदर्शन किया है, जिसने युद्ध के मैदान की तस्वीर साफ कर दी है. भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास के 22वें संस्करण के तहत महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने डायरेक्ट फायरिंग मोड में आग उगलते हुए सभी निर्धारित लक्ष्यों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद कर दिया.
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