यूरोपीय यूनियन इस समय भारत की फॉरेन पॉलिसी पर बकायदा स्टडी कर रहा है। इतना ही नहीं एक रिपोर्ट भी पब्लिश की गई है जिसमें यूरोप खुद मान रहा कि भारत अमेरिका रूस ब्रिक्स, जी20, और ग्लोबल साउथ सबके साथ एक साथ कैसे चल पा रहा है। यह यूरोप के लिए अब एक पहेली बन चुका है और इसी बीच भारत और चीन ने वेनेजुएला के तेल बाजार में बड़ी एंट्री मार दी है जिससे अमेरिका का टोन तक बदलता हुआ दिख रहा है। दरअसल दुनिया के ऑयल मार्केट में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय बाद वेनेजुला का कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौटने जा रहा है। आपको याद होगा अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वेनेजुला का तेल लगभग बाजार से गायब था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
दुनिया की दो सबसे बड़ी कमोडिटी ट्रेंडिंग कंपनियां और ट्रेफिग्रा ने भारत और चीन की रिफाइनरियों से बातचीत शुरू कर दी है ताकि मार्च से वेनेजुला का तेल सप्लाई किया जा सके। इन कंपनियों को अमेरिकी सरकार से विशेष अनुमति मिली है कि वेनेजुला के तेल की मार्केटिंग तक कर सकें। यानी जो तेल सालों से गोदामों में फंसा था अब वह कानूनी तरीके से जहाजों में लोड होगा। अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और सस्ता तेल मतलब सीधा फायदा। बताया जा रहा है कि वेनेजुला का तेल ब्रिंड क्रूड से 8 से 8.5 प्रति बैरल सस्ता ऑफर किया गया है। इसलिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन हिंदुस्तान पेट्रोलियम इस डील में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अब चीन की सरकारी कंपनी पेट्रो चाइना जो पहले वेनेजुला का बड़ा ग्राहक थी अब दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी में है। खास बात है कि इस बार डील छोटे प्राइवेट रिफाइनियों से नहीं सीधे सरकारी कंपनियों से की जा रही है। यानी अब तेल की सप्लाई छुपे रास्तों से नहीं खुले और वैध तरीके से होगी। यह दिखाता है कि अमेरिका खुद अब वेनेजुला को पूरी तरह अलग-थलग नहीं रखना चाहता है।
इसका असर ग्लोबल ऑयल प्राइस पर पड़ेगा। ईरान सप्लाई में रुकावट के बीच वेनेजुला का तेल कीमतों को काबू में रख सकता है। यानी दुनिया को थोड़ी राहत। अब आते हैं दूसरी बड़ी खबर पर। साल 2025 में यूरोपीय यूनियन ने भारत की विदेश नीति पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष था कि भारत ने स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी को पैसिव नहीं एक्टिव बनाया है। ईयू मानता है कि भारत किसी एक गुट में नहीं बंधा है। ना अमेरिका का जूनियर पार्टनर है। ना रूस या चीन के दबाव में है। भारत की नीति है एक्टिव मल्टी एलाइनमेंट यानी अमेरिका से टेक्नोलॉजी, ब्रिक्स से ग्लोबल साउथ और G20 से ग्लोबल गवर्नेंस सब कुछ एक साथ।
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Budget Suggestions: बजट 2026-27 में सरकार पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर अपना फोकस बनाए रख सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा 11.21 लाख करोड़ रुपये के कैपेक्स में 10% से 15% तक बढ़ोतरी संभव है. निजी क्षेत्र के सतर्क रुख के बीच सरकारी खर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गति दे सकता है. डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश मजबूत बना हुआ है. विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी कैपेक्स आने वाले साल में ग्रोथ का प्रमुख इंजन रहेगा.
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