अल्पकालिक स्थिरता, लेकिन विकास नहीं; पाकिस्तान ‘फेलिंग स्टेट’ की ओर
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता और सुधारों के संकेतों के बावजूद निरंतर आर्थिक विकास के अभाव ने पाकिस्तान को ‘फेलिंग स्टेट’ की स्थिति में ला खड़ा किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक आय में गिरावट के कारण सामाजिक हालात बिगड़ रहे हैं, जो सतही आर्थिक सुधारों के बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करते हैं।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़ों के हवाले से बताया कि बेहतर दिखने वाले प्रमुख आर्थिक संकेतकों के साथ सामाजिक परिणामों में गिरावट का स्पष्ट विरोधाभास नजर आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर औसतन केवल 2.47 प्रतिशत रही, जो लगभग 2.55 प्रतिशत की जनसंख्या वृद्धि दर के बराबर ही है। इसका मतलब यह है कि प्रति व्यक्ति उत्पादन में व्यावहारिक रूप से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
आर्थिक वृद्धि दर 2019–20 में संकुचन से 2021–22 में 5.97 प्रतिशत के शिखर तक पहुंची, लेकिन इसके बाद के वर्षों में फिर से घटकर मध्यम एकल अंक तक सिमट गई।
हालांकि 2018 के बाद से घरेलू नाममात्र आय लगभग दोगुनी हो गई है, लेकिन पिछले 50 वर्षों की सबसे ऊंची महंगाई ने अधिकांश परिवारों की क्रय शक्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी इलाकों में आय असमानता अधिक स्पष्ट है। अमीर परिवारों की औसत आय 1,46,920 रुपये से अधिक है, जबकि सबसे गरीब परिवारों की आय 42,412 रुपये से भी कम है। 2018–19 के बाद शीर्ष आय वर्ग (पांचवां क्विंटाइल) की आय में 119.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निचले आय वर्ग (पहला क्विंटाइल) में यह वृद्धि केवल 80.45 प्रतिशत रही, जिससे यह साफ होता है कि अधिक आय वाले वर्गों को अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ मिला।
पिछले एक दशक में पाकिस्तान ने फिर से मांग-आधारित आर्थिक रणनीति अपनाई और चीनी निवेश को ‘गेम चेंजर’ के रूप में पेश किया, लेकिन यह मॉडल अपेक्षित परिणाम देने में असफल रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, इसके विपरीत, आपूर्ति-आधारित अर्थशास्त्र यह मानता है कि दीर्घकालिक और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए कर दरों में कमी, व्यापार करने में आसानी, सरकारी खर्च में कटौती, सुदृढ़ मौद्रिक नीति, मुक्त व्यापार और निजीकरण आवश्यक हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पाकिस्तान एक सुसंगत आपूर्ति-आधारित आर्थिक नीति नहीं अपनाता, तो वह अल्पकालिक स्थिरता के ऐसे ही चक्रों में फंसा रहेगा, जिनसे न तो उत्पादकता बढ़ेगी और न ही समृद्धि आएगी।
एक अन्य हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति का एक बड़ा कारण शिक्षा और कौशल प्रणाली की विफलता है, जो मानव क्षमता को उत्पादकता में बदलने में नाकाम रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा पर कम सार्वजनिक खर्च, पुराने पाठ्यक्रम, शिक्षकों का अपर्याप्त प्रशिक्षण, सीमित व्यावसायिक शिक्षा के विकल्प और अनुसंधान के लिए अपर्याप्त फंडिंग के चलते कौशल की कमी बनी हुई है और युवाओं में बेरोजगारी लगातार ऊंची बनी हुई है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इंडियन ऑयल के ज्वाइंट वेंचर को अबू धाबी में मिली बड़ी सफलता, खोजा तेल का भंडार
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को बताया कि भारत की तेल कंपनियों को अबू धाबी में बड़ी सफलता मिली है। वहां कंपनी को जमीन पर स्थित एक तेल और गैस क्षेत्र में तेल का भंडार मिला है।
यह तेल खोज ऊर्जा भारत प्राइवेट लिमिटेड (यूबीपीएल) नाम की कंपनी ने की है, जो इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीसीएल) का संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) है, जिसमें दोनों की बराबर हिस्सेदारी है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि शिलैफ क्षेत्र और हबशन क्षेत्र में हल्के कच्चे तेल की सफल खोज की गई है। यह खोज इंडियन ऑयल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सरकार इस क्षेत्र में तेल और गैस की और संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह खोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया मील का पत्थर है। यह सफलता भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत और तकनीकी क्षमता को दिखाती है और इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता और पक्की होती है।
देश के अंदर भी भारत तेल और गैस की खोज के लिए नए कदम उठा रहा है। अभी देश के 7 तलछटी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक से तेल और गैस की खोज की जा रही है।
भारत में तेल और गैस की खोज के लिए मिशन अन्वेषण नामक पहल शुरू की गई है। यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सर्वेक्षण कार्यक्रम है। इसके तहत 20 हजार किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया जाना है, जिसमें से 8 हजार किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र का सर्वे पूरा हो चुका है।
अब 10 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को तेल खोज के लिए खोला गया है और 99 प्रतिशत प्रतिबंधित क्षेत्र हटा दिए गए हैं।
ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत दिए जा रहे तेल और गैस क्षेत्रों में देशी और विदेशी कंपनियां रुचि दिखा रही हैं। आने वाला समय निवेश और भागीदारी के नए रिकॉर्ड बना सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने पहले बताया था कि देश में 25 नए तेल और गैस क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, 154 क्षेत्र सक्रिय हैं, और अब तक 14 नई तेल और गैस खोजें हो चुकी हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
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