इंडियन ऑयल के ज्वाइंट वेंचर को अबू धाबी में मिली बड़ी सफलता, खोजा तेल का भंडार
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को बताया कि भारत की तेल कंपनियों को अबू धाबी में बड़ी सफलता मिली है। वहां कंपनी को जमीन पर स्थित एक तेल और गैस क्षेत्र में तेल का भंडार मिला है।
यह तेल खोज ऊर्जा भारत प्राइवेट लिमिटेड (यूबीपीएल) नाम की कंपनी ने की है, जो इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीसीएल) का संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) है, जिसमें दोनों की बराबर हिस्सेदारी है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि शिलैफ क्षेत्र और हबशन क्षेत्र में हल्के कच्चे तेल की सफल खोज की गई है। यह खोज इंडियन ऑयल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सरकार इस क्षेत्र में तेल और गैस की और संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह खोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया मील का पत्थर है। यह सफलता भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत और तकनीकी क्षमता को दिखाती है और इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता और पक्की होती है।
देश के अंदर भी भारत तेल और गैस की खोज के लिए नए कदम उठा रहा है। अभी देश के 7 तलछटी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक से तेल और गैस की खोज की जा रही है।
भारत में तेल और गैस की खोज के लिए मिशन अन्वेषण नामक पहल शुरू की गई है। यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सर्वेक्षण कार्यक्रम है। इसके तहत 20 हजार किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया जाना है, जिसमें से 8 हजार किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र का सर्वे पूरा हो चुका है।
अब 10 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को तेल खोज के लिए खोला गया है और 99 प्रतिशत प्रतिबंधित क्षेत्र हटा दिए गए हैं।
ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत दिए जा रहे तेल और गैस क्षेत्रों में देशी और विदेशी कंपनियां रुचि दिखा रही हैं। आने वाला समय निवेश और भागीदारी के नए रिकॉर्ड बना सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने पहले बताया था कि देश में 25 नए तेल और गैस क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, 154 क्षेत्र सक्रिय हैं, और अब तक 14 नई तेल और गैस खोजें हो चुकी हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष- 2025 में रिकॉर्ड 38.3 अरब डॉलर, बढ़ती निर्भरता पर अर्थशास्त्रियों की चेतावनी
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशों में काम कर रहे पाकिस्तानियों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एफवाई25 में रेमिटेंस 38.3 अरब डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है।
रेमिटेंस में इस तेज उछाल से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है और ऐसे समय में घरेलू खपत बढ़ाने में मदद मिली है, जब देश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
हालांकि, डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब विदेशों से आने वाली रेमिटेंस देश के वस्तु निर्यात से भी ज्यादा हो गई है। एफवाई-25 में पाकिस्तान का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट केवल मामूली बढ़त के साथ करीब 32.3 अरब डॉलर तक ही पहुंच सका।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थिति पाकिस्तान की आर्थिक संरचना में गहरे असंतुलन की ओर इशारा करती है, जहां व्यापार और उद्योग से होने वाली कमाई की तुलना में विदेशों से भेजा गया पैसा कहीं अधिक अहम भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में उपयोग हो जाता है, न कि दीर्घकालिक निवेश में। इससे अल्पकाल में परिवारों को सहारा मिलता है और अर्थव्यवस्था में गतिविधि बनी रहती है, लेकिन इससे उद्योगों को मजबूती, निर्यात में विस्तार या उत्पादकता में सुधार नहीं हो पाता।
लंबे समय में रेमिटेंस पर अत्यधिक निर्भरता से वास्तविक विनिमय दर ऊंची बनी रह सकती है, जिससे घरेलू उत्पाद वैश्विक बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
इस बढ़ती निर्भरता के सामाजिक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक विदेश में रोजगार करने से परिवारों पर दबाव पड़ता है, खासकर बच्चों और जीवनसाथियों पर जो देश में ही रहते हैं। जिन इलाकों में रेमिटेंस आय का प्रमुख स्रोत है, वहां युवा स्थानीय स्तर पर कौशल विकसित करने, व्यवसाय शुरू करने या देश में ही अवसर तलाशने के बजाय विदेश जाने को प्राथमिकता देने लगते हैं, जिससे स्थानीय आर्थिक गतिविधि कमजोर होती है।
इसके अलावा, रेमिटेंस का असमान क्षेत्रीय वितरण सामाजिक और आर्थिक असमानता को और बढ़ा सकता है।
राजनीतिक स्तर पर भी इसके असर देखे जा रहे हैं। रेमिटेंस पर निर्भर परिवार निजी स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा लेते हैं, जिससे सरकार पर सार्वजनिक सेवाओं में सुधार का दबाव कम हो जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे नीतिगत ढिलाई आ सकती है और जरूरी संस्थागत सुधारों की गति धीमी पड़ सकती है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रेमिटेंस बेहद मूल्यवान है और यह विदेशों में रह रहे लाखों पाकिस्तानियों की मेहनत और त्याग को दर्शाती है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि इसे आर्थिक सुधारों का स्थायी विकल्प नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
डीएससी
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