Responsive Scrollable Menu

Kashmir Police कर रही मस्जिदों और इमामों का डाटाबेस तैयार, LG प्रशासन पर भड़के MP AGA Syed Ruhullah Mehdi

पिछले वर्ष ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े धार्मिक संस्थानों की विस्तृत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य कट्टरपंथी नेटवर्क पर लगाम कसना है, जबकि राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने इसे संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और निजता के अधिकार पर हमला बताया है।

अधिकारियों के अनुसार, मस्जिदों, मदरसों, इमामों, शिक्षकों और इन संस्थानों की प्रबंधन समितियों के सदस्यों का ब्योरा जुटाने के लिए गांव के नंबरदारों (राजस्व विभाग के ग्राम-स्तरीय कर्मचारियों) को एक प्रपत्र दिया गया है। इस प्रक्रिया में मस्जिदों और मदरसों के वित्तीय मामलों पर खास ध्यान दिया जा रहा है जिसमें निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के तरीकों की जानकारी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि सामान्य जानकारियों के अलावा मदरसा शिक्षकों और इमामों से आधार कार्ड, बैंक खाते, संपत्ति के स्वामित्व, सोशल मीडिया हैंडल, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सिम कार्ड और मोबाइल फोन के मॉडल के साथ उसका आईएमईआई नंबर भी देने को कहा गया है।

इसे भी पढ़ें: 'मनमाने ढंग से नौकरी से निकाल रहे', Jammu Kashmir में 5 कर्मचारियों पर एक्शन से Mehbooba Mufti नाराज

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस अभियान का एक उद्देश्य मस्जिदों, मदरसों और उनसे जुड़े लोगों का एक व्यापक डाटाबेस तैयार करना है। उन्होंने कहा, “नवंबर में जिस ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था, उसकी जांच में सामने आया कि कुछ संदिग्धों को मदरसों या सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बनाया गया था। मौलवी इरफान जैसे कुछ इमामों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।” प्रपत्र में यह जानकारी भी मांगी गई है कि संबंधित मस्जिद या मदरसा किस मुस्लिम पंथ—बरेलवी, देवबंदी, हनफी या अहले हदीस—का पालन करता है। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में व्यापक रूप से अपनाई जाने वाली सूफी परंपरा को नकारने वाले इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को भी घाटी के युवाओं में कट्टरता बढ़ने का एक कारण माना जा रहा है।

इमामों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों से यह भी पूछा गया है कि क्या वे पहले कभी आतंकी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, साथ ही उनसे किसी लंबित मामले या अदालत से हुई सजा का विवरण भी देने को कहा गया है। हम आपको याद दिला दें कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस की मदद से पिछले साल नवंबर के पहले सप्ताह में एक ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में तीन चिकित्सकों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक की बरामदगी हुई थी। यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ा था और कश्मीर, हरियाणा व उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।

दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि पहले से ही सीआईडी, आईबी और अन्य एजेंसियों की निगरानी मौजूद है, ऐसे में धार्मिक संस्थानों पर अतिरिक्त जानकारी संग्रह “धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन” है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मस्जिदों पर नियंत्रण की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। आगा रुहुल्लाह मेहदी ने मेहदी ने कहा, "उनके (पुलिस के) पास आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के रूप में पहले से ही जानकारी मौजूद है। यह जानकारी इकट्ठा करना धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले एक विशेष धर्म के लोगों के एक विशिष्ट वर्ग को डराने-धमकाने का प्रयास है।" सांसद ने कहा, "ऐसा लगता है कि इमामों को भाजपा द्वारा अनुमोदित या शायद आरएसएस द्वारा भेजे गए उपदेश देने के लिए कहा जाएगा।"

इसी तरह, मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने इस कवायद पर “गहरी चिंता” जताते हुए इसे निजता, गरिमा और मौलिक अधिकारों का पूर्ण उल्लंघन बताया है। संगठन ने उपराज्यपाल प्रशासन से इस प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने और धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता का सम्मान करने की मांग की है।

देखा जाये तो कश्मीर में सुरक्षा कारणों से उठाया गया यह कदम अब एक व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जहां एक ओर प्रशासन इसे कट्टरपंथ के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

Continue reading on the app

King Kohli की बादशाहत फिर कायम, ICC ODI Ranking में एक बार फिर बने World No. 1

वनडे क्रिकेट में विराट कोहली की शानदार फॉर्म ने उन्हें जुलाई 2021 के बाद पहली बार आईसीसी बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया है। कोहली ने रविवार को वडोदरा में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन वनडे मैचों की श्रृंखला के पहले मैच में भारत की जीत की नींव रखते हुए 91 गेंदों पर 93 रनों की तूफानी पारी खेली और अपने साथी खिलाड़ी रोहित शर्मा को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर पुनः कब्जा जमा लिया।
 

इसे भी पढ़ें: India Vs New Zealand Live Update: न्यूजीलैंड ने जीता टॉस, भारत को दिया पहले बल्लेबाजी का न्योता


जुलाई 2021 के बाद यह पहली बार है जब दिग्गज क्रिकेटर ने वनडे रैंकिंग में नंबर 1 स्थान हासिल किया है। कोहली पहली बार अक्टूबर 2013 में शीर्ष पर पहुंचे थे और आईसीसी की वेबसाइट के अनुसार, अब यह उनका 11वां कार्यकाल है। अब तक, उन्होंने शीर्ष पर कुल 825 दिन बिताए हैं - जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा कुल मिलाकर 10वां सबसे अधिक और किसी भारतीय द्वारा सबसे अधिक है। विराट कोहली पिछले साल अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत वनडे श्रृंखला के आखिरी मैच के बाद से शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने अपने पिछले सभी सात 50 ओवर के मैचों में पचास से अधिक का स्कोर बनाया है। उनकी पिछली सात पारियों के स्कोर इस प्रकार हैं: 93, 77 (विजय हजारे ट्रॉफी), 131 (विजय हजारे ट्रॉफी), 65, 102, 135 और 74।
 

इसे भी पढ़ें: IND vs NZ 1st ODI: कोहली का 93, केएल राहुल की फिनिश से जीता भारत


2025 में, कोहली ने 13 वनडे मैचों में 65.10 के शानदार औसत से 651 रन बनाए और कैलेंडर वर्ष में भारत के सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में उभरे। अपने शानदार करियर में कोहली ने 11वीं बार आईसीसी पुरुष वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस प्रारूप में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। पिछले साल अक्टूबर में चैंपियंस ट्रॉफी के बाद अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार दो मैचों में शून्य पर आउट होने के बाद, कोहली ने सिडनी में 74 रनों की शानदार पारी खेलकर भारत को वनडे सीरीज में सांत्वनापूर्ण जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। घरेलू मैदान पर वापसी करते हुए, उन्होंने नवंबर-दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में 135, 102 और नाबाद 65 रन बनाए।

Continue reading on the app

  Sports

प्रयागराज में स्नान के लिए जुटी श्रद्धालुओं की भीड़, कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ी आस्था

मकर संक्रांति के पर्व का हिन्दी धर्म में विशेष महत्व है। सूर्य के उत्तरायण होने का ये पर्व 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों दिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यहां स्नान के लिए घाटों पर भारी भीड़ मौजूद है। मकर संक्रांति … Thu, 15 Jan 2026 08:03:25 GMT

  Videos
See all

AajTak 2 LIVE |आज का राशिफल । Aapke Tare | Daily Horoscope । Praveen Mishra । ZodiacSign।AT2 LIVE #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-15T03:04:27+00:00

ED Raids IPAC in Kolkata: ममता बनर्जी के ऐलान से हिल गया पूरा बंगाल! | Mamata Banerjee | Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-15T03:15:08+00:00

Voting Live Updates: वोटिंग के बीच हो गया बड़ा खेल! | Maharashtra BMC Elections 2026 | MVA |Mahayuti #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-15T03:11:27+00:00

Maharashtra Voting Live Updates: महाराष्ट्र में पलट गए चुनाव के नतीजे BMC Elections 2026 Voting Live #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-15T03:05:39+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers