Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट 2025; 64 साल पुराना कानून खत्म
Income Tax Act 2025: 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश किया जाना है और उससे पहले इनकम टैक्स को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. सरकार अब इनकम टैक्स कानून में ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है. इसका नाम इनकम टैक्स एक्ट 2025 रखा गया है, जो 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा. यह नया कानून करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा.
क्यों लाया जा रहा नया इनकम टैक्स एक्ट?
अब तक इनकम टैक्स को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यही रही है कि कानून बहुत जटिल है. कौन सा सेक्शन कब लगेगा, कितना टैक्स देना होगा और रिटर्न कैसे भरना है- यह सब आम आदमी के लिए समझना मुश्किल हो गया था. खासतौर पर नौकरीपेशा लोग, छोटे कारोबारी और सीनियर सिटीजन सबसे ज्यादा परेशान रहते थे. सरकार मानती है कि इसी वजह से टैक्स विवाद, नोटिस और कोर्ट केस बढ़ते चले गए.
टैक्स स्लैब और दरों में बदलाव नहीं
सरकार ने साफ किया है कि नए कानून में टैक्स स्लैब और टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपकी जेब पर कोई नया बोझ नहीं पड़ेगा. यह कानून पूरी तरह रेवेन्यू न्यूट्रल है, यानी सरकार की कमाई पर भी इसका असर नहीं होगा. बदलाव सिर्फ सिस्टम और भाषा में किया गया है, ताकि टैक्स भरना आसान हो सके.
नए इनकम टैक्स में क्या बदला गया?
सरकार के अनुसार नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 करीब 50 फीसदी छोटा है. इसमें कठिन कानूनी भाषा को हटाकर सरल और आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया गया है. कई गैर-जरूरी और पुराने सेक्शन को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जिनका अब कोई मतलब नहीं रह गया था. एक बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि अब प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे उलझाऊ शब्दों को हटा दिया गया है. उनकी जगह सिर्फ एक शब्द होगा- टैक्स ईयर. इससे टैक्स की गणना और आईटीआर फाइल करना आसान हो जाएगा.
इसके अलावा, अब अगर कोई टैक्सपेयर तय तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करता है, तो उसे टीडीएस रिफंड पाने का अधिकार होगा. पहले लेट रिटर्न फाइल करने वालों को रिफंड मिलने में दिक्कत होती थी. सरकार का मकसद साफ है- टैक्स सिस्टम को सरल बनाना, विवाद कम करना और ईमानदार टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ाना. टैक्स वही रहेगा, लेकिन अब टैक्स का डर कम होगा और नियम समझना ज्यादा आसान हो जाएगा.
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मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स, जानें डॉक्टर मीरा पाठक की राय
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर भारत के घरों में मकर संक्रांति आते ही रसोई की खुशबू कुछ अलग ही हो जाती है। सर्दियों में गाजर, मटर, गोभी या फिर अलग-अलग दालों के मेल से बनी गरमागरम खिचड़ी इस पर्व का खास हिस्सा होती है। खिचड़ी सिर्फ स्वाद या परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेहत से जुड़ा एक गहरा तर्क भी छिपा है।
जनवरी का महीना वैसे भी ऐसा समय होता है जब लोग शादी-पार्टियों, त्योहारों और तरह-तरह के भारी खाने के बाद दोबारा अपने रूटीन में लौटने की कोशिश करते हैं। ऐसे में शरीर खुद-ब-खुद हल्के, सादे और ग्राउंडिंग खाने की ओर आकर्षित होता है। शायद यही वजह है कि इस समय खिचड़ी जैसी डिश हमें सबसे ज्यादा सुकून देती है।
इस बारे में भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने आईएएनएस से खास बातचीत में खिचड़ी के हेल्थ बेनिफिट्स को बेहद आसान भाषा में समझाया। उनका कहना है कि आजकल लोगों के दिमाग में यह गलत धारणा बन गई है कि खिचड़ी सिर्फ बीमार लोगों का खाना है या कमजोरी में ही खाई जाती है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।
डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि खिचड़ी एक टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है और इसे एक संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड्स सही संतुलन में मौजूद होते हैं। दाल में पाया जाने वाला लाइसीन अमीनो एसिड और चावल में मौजूद मिथिओनीन जब साथ आते हैं, तो मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं।
अगर डिटॉक्स डाइट की बात करें, तो खिचड़ी शायद सबसे बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प है। डॉ. मीरा के अनुसार, खिचड़ी पचाने में बहुत हल्की होती है और शरीर व दिमाग को एक तरह का सॉफ्ट रीसेट देती है। जब हम कुछ दिनों के लिए सिंपल और आसानी से पचने वाला खाना खाते हैं, तो हमारी आंतों, लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और रिकवरी का समय मिलता है। यही वजह है कि डिटॉक्स के लिए खिचड़ी को इतना असरदार माना जाता है।
खिचड़ी का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करती है। इससे शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आता, जो आजकल की जूस डाइट या ट्रेंडी डिटॉक्स ड्रिंक्स में अक्सर देखने को मिलता है। डॉ. मीरा का कहना है कि जूस, कोम्बुचा या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में खिचड़ी कहीं ज्यादा बैलेंस्ड और भरोसेमंद विकल्प है, क्योंकि इसमें पोषण की कमी नहीं होती।
इसके अलावा खिचड़ी में हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। अगर शरीर में कहीं सूजन, थकान या अंदरूनी वेयर एंड टियर है, तो खिचड़ी उसे ठीक करने में मदद करती है। यही वजह है कि इसे बीमारी, कमजोरी या रिकवरी के समय दिया जाता है। शायद इसी कारण इसे सिर्फ “बीमारों का खाना” मान लिया गया है, जबकि यह हर उम्र और हर मौसम के लिए फायदेमंद है।
खिचड़ी की सबसे खूबसूरत बात इसकी वर्सटाइल नेचर है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स मिलाए जा सकते हैं, मूंग दाल के साथ दूसरी दालों का इस्तेमाल किया जा सकता है और सब्जियां, पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ पर आधारित है, जिसे आज मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह सपोर्ट करता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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