10 मिनट में अब ‘नो डिलीवरी’… आराम से जाओ! गिग वर्कर्स के लिए बड़ी खुशखबरी
सरकार ने गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर एक अहम फैसला लिया है. अब क्विक कॉमर्स कंपनियों को 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावे अपने विज्ञापनों से हटाने होंगे. श्रम मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ज़ोमैटो और स्विगी जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत हुई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया. दरअसल, तय समय में ऑर्डर पहुंचाने का दबाव डिलीवरी पार्टनर्स के लिए खतरनाक साबित हो रहा था. कई बार वे अपनी जान जोखिम में डालकर तेज रफ्तार में डिलीवरी करते नजर आए. अब इस नियम के हटने से उन्हें राहत मिलेगी और वे ज्यादा सुरक्षित तरीके से काम कर सकेंगे. आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स के लिए बड़ी जीत बताया और सरकार का धन्यवाद किया. वहीं, न्यूज 18 इंडिया की टीम ने दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स से बात की, जिन्होंने कहा कि 10 मिनट डिलीवरी का दबाव हटना अच्छी बात है.
School Admission: स्कूलों में 25% फ्री सीटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, किसे मिलेगा एडमिशन?
School Admission, RTE: सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा में समानता और भाईचारे को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है.कोर्ट ने RTE एक्ट की धारा 12(1)(c) के तहत सभी निजी स्कूलों (unaided neighbourhood schools) में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% फ्री सीटें सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और एएस चंदुरकर की बेंच ने कहा कि संविधान का भाईचारा तभी हासिल होगा जब रिक्शा चलाने वाले का बच्चा और करोड़पति या सुप्रीम कोर्ट जज का बच्चा एक ही क्लास में पढ़े. कोर्ट ने राज्य सरकारों को नियम बनाने का निर्देश दिया है ताकि ये सीटें सही तरीके से भरी जा सकें.
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