Responsive Scrollable Menu

गणपति सेलिब्रेशन के बीच गौरव और आकांक्षा का हुआ आमना-सामना, देखकर भी किया अनदेखा, वीडियो वायरल

Akanksha Chamola-Gaurav Khanna: टीवी इंडस्ट्री के जाने-माने एक्टर गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) एक तरफ जहां खतरों के खिलाड़ी 15 से बाहर होने को लेकर चर्चा में हैं तो दूसरी वह अपनी पत्नी आकांक्षा चमोला (Akanksha Chamola) की वजह से भी सुर्खियों में बने हुए हैं. आकांक्षा चमोला ने रियलिटी शो लॉक अप 2 में खुलासा किया था कि वह और गौरव तलाक ले रहे हैं जब से यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है. अब महीनों बाद आकांक्षा और गौरव का गणपति सेलिब्रेशन के दौरान आमना-सामना हुआ लेकिन दोनों में से किसी ने एक दूसरे से बात नहीं की.

गौरव और आकांक्षा का हुआ आमना-सामना

आकांक्षा चमोला ने जब से इस बात का खुलासा किया है कि वह गौरव खन्‍ना से तलाक लेने जा रही हैं तब से दोनों के रिश्‍ते में कड़वाहट घुलती जा रही है. शादी के करीब 10 साल बाद दोनों ने तलाक का फैसला लिया है. इस खुलासे के बाद धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है. शुक्रवार को एकता कपूर के गणेश चतुर्थी सेलिब्रेशन में कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. जिसकी शायद ही दोनों के फैंस ने उम्मीद की हो. सेलिब्रेशन के दौरान दोनों एक ही छत के नीचे मौजूद थे और आमना-सामना हुआ. लेकिन दोनों में से किसी ने न तो एक-दूसरे से बातचीत की और न ही हाय-हेल्‍लो. इसका वीडियो सोशल मीडिया सामने आया है.

सोशल मीडिया पर वीडियो हो रहा वायरल

दरअसल, जानी-मानी प्रोड्यूसर एकता कपूर ने अपने घर गणपति सेलिब्रेशन का आयोजन किया था. इस मौके पर कई सेलेब्स नजर आए थे. लेकिन सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान गौरव और आकांश्रा के ऊपर गया था. इस सेलिब्रेशन में गौरव खन्‍ना और आकांक्षा चमोला अलग-अलग पहुंचे थे. इस दौरान दोनों ने पपाराजी के लिए पोज देते हुए भी नजर आए थे. लेकिन एक-दूसरे से बातचीत करते हुए नजर नहीं आए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों इवेंट में अलग-अलग खड़े थे और एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी. सेलिब्रेशन के दौरान दोनों कुछ पल के दोनों का आमना-सामना भी हुआ था और नजरें मिलीं. दोनों का रूठा हुआ अंदाज अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. 

 ये खबर अपडेट की जा रही है...

ये भी पढ़ें: Bigg Boss 20 से रोहिद खान का हुआ एविक्शन? घर से बेघर होने की ये हैं दो बड़ी वजह

 

 

Continue reading on the app

Explainer: हरी पिचें, स्विंग होती गेंदें..., जानें वो 10 अचूक मंत्र, जिससे न्यूजीलैंड में इतिहास रच सकती है टीम इंडिया

IND vs NZ: भारतीय टीम अगले महीने अक्टूबर में न्यूजीलैंड का दौरा करेगी, जहां पहले दोनों टीमों के बीच टी-20 और वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी. इसके बाद भारत और न्यूजीलैंड के बीच 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी. यह टेस्ट सीरीज टीम इंडिया के लिए बेहद ही अहम है, क्योंकि इस सीरीज में एक भी मैच की हार भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से पूरी तरह से बाहर कर सकती है. ऐसे में टीम इंडिया हर हाल में इस सीरीज के दोनों मैच जीतना चाहेगी, लेकिन न्यूजीलैंड को उसी के घर में टेस्ट सीरीज में हराना भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होने वाला है. न्यूजीलैंड में टेस्ट सीरीज जीतना किसी भी एशियाई टीम के लिए हमेशा से क्रिकेट की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक रहा है. ऐसे में न्यूजीलैंड दौरे पर अगर भारत को टेस्ट सीरीज में ऐतिहासिक जीत दर्ज करनी है, तो उसे अपनी रणनीति, तकनीक और मानसिकता में बड़े बदलाव करने होंगे. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि टीम इंडिया कैसे न्यूजीलैंड की परिस्थितियों पर फतह पा सकती है. 

न्यूजीलैंड की हरी-भरी पिचें, तेज हवाएं और स्विंग होती गेंदें भारतीय बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा लेती हैं. भारतीय टीम ने इतिहास में सिर्फ कुछ ही बार न्यूजीलैंड की धरती पर टेस्ट सीरीज जीती है, जिसमें आखिरी जीत साल 2009 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में मिली थी. इसके बाद से टीम इंडिया ने कीवी टीम के घर में लगातार टेस्ट सीरीज में संघर्ष किया है. ऐसे में भारत को अगर इस बार सीरीज अपने नाम करनी है, तो उसे काफी मेहनत करनी होगी. 

ओपनिंग जोड़ी की भूमिका,  शुरुआती 15 ओवरों का संकट टालना

न्यूजीलैंड में टेस्ट मैच जीतने की सबसे पहली और बड़ी शर्त एक मजबूत ओपनिंग साझेदारी है, क्योंकि वहां शुरुआती 15 ओवरों का संकट टालना सबसे जरूरी होता है. वहां नई कूकाबुरा गेंद शुरुआती 10 से 15 ओवरों में हवा और पिच पर बहुत ज्यादा स्विंग और सीम होती है, जिससे बचने के लिए भारतीय ओपनर्स को ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंदों को लगातार छोड़ने का अनुशासन दिखाना होगा. साथ ही, बल्लेबाजों को बहुत जल्दी फ्रंट-फुट पर आने से बचना होगा, क्योंकि वहां गेंद उम्मीद से ज्यादा और देर से स्विंग होती है. इसलिए शुरुआत में क्रीज पर टिकना ही जीत की चाबी है. 

देर से और शरीर के पास खेलना

भारत जैसी पिचों पर बल्लेबाजों की आदत गेंद पर पूरी ताकत से बल्ला चलाने की होती है, लेकिन न्यूजीलैंड में यह तरीका बिल्कुल काम नहीं आता. वहां की पिचों पर सफल होने के लिए भारतीय बल्लेबाजों को ढीले हाथों से खेलना होगा. इसका फायदा यह होगा कि अगर गेंद बल्ले का किनारा भी लेगी, तो स्लिप फील्डर्स तक पहुंचने से पहले ही नीचे गिर जाएगी. सीधा सा नियम है कि गेंद को जितना शरीर के करीब आने देंगे और जितना देर से खेलेंगे, आउट होने का खतरा उतना ही कम होगा. 

सीम और स्विंग गेंदबाजों का सही चयन

न्यूजीलैंड की पिचों पर सिर्फ तेज रफ्तार से काम नहीं चलता, बल्कि सही जगह पर टप्पा खिलाकर गेंद को हवा में स्विंग और पिच पर सीम कराना  ज्यादा जरूरी होता है. इसलिए भारत को सिर्फ बहुत तेज फेंकने वाले गेंदबाजों के भरोसे रहने के बजाय ऐसे स्विंग गेंदबाजों को टीम में मौका देना होगा जो गेंद को दोनों तरफ मूवमेंट करा सकें. साथ ही, टीम में ऐसा ऑलराउंडर होना चाहिए जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी उतना ही खतरनाक हो, क्योंकि न्यूजीलैंड की पिचों पर मैच जीतने के लिए अमूमन चार मुख्य तेज गेंदबाजों की जरूरत पड़ती है.

 ट्रेंट ब्रिज जैसी पिचों पर टप्पा पकड़ना

अक्सर भारतीय गेंदबाज विदेशों में ज्यादा उछाल देखकर शॉर्ट-पिच गेंदें फेंकने की गलती कर बैठते हैं, लेकिन न्यूजीलैंड में यह रणनीति पूरी तरह फेल हो सकती है. वहां विकेट लेने का असली मंत्र गेंद को फुल लेंथ पर डालना है, ताकि बल्लेबाज आगे बढ़कर खेलने पर मजबूर हो. गेंद जितनी आगे गिरेगी, उसे हवा में स्विंग होने का उतना ही ज्यादा मौका मिलेगा. चूंकि न्यूजीलैंड के बल्लेबाज अपने घर में खेलने के उस्ताद होते हैं, इसलिए भारतीय गेंदबाजों को लगातार एक ही सटीक जगह पर गेंद डालकर उनके सब्र का इम्तिहान लेना होगा.

स्पिनर्स का चतुर इस्तेमाल और 'कंटेनिंग' रोल

न्यूजीलैंड की पिचों पर मैच के शुरुआती तीन दिनों में स्पिन गेंदबाजों को टर्न या पिच से कोई मदद नहीं मिलती. ऐसे में स्पिनर का काम विकेट चटकाना नहीं, बल्कि एक छोर को संभालकर रनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाना होता है. जब स्पिनर एक तरफ से रन रोककर दबाव बनाएगा, तभी दूसरे छोर से तेज गेंदबाज खुलकर अटैक कर पाएंगे. इसके अलावा, वहां तेज हवाएं चलती हैं, इसलिए स्पिनर्स को हवा का फायदा उठाने के लिए अपनी गेंद की रफ्तार और फ्लाइट का बहुत समझदारी से इस्तेमाल करना होगा.

बल्लेबाजी में निचला क्रम का योगदान

भारत और न्यूजीलैंड की मजबूत टीमों के बीच जीत-हार का असली अंतर अक्सर दोनों टीमों के निचले क्रम के बल्लेबाज (नंबर 8 से 11) तय करते हैं. न्यूजीलैंड के टिम साउदी या काइल जैमीसन जैसे पुछल्ले गेंदबाज भी क्रीज पर आकर उपयोगी रन बटोर लेते हैं. भारतीय टीम को अगर मैच जीतना है, तो हमारे नंबर 8 से नंबर 11 तक के बल्लेबाजों को भी क्रीज पर टिकने का जज्बा दिखाना होगा. अगर हमारा निचला क्रम मिलकर बोर्ड पर 40 से 50 अतिरिक्त रन भी जोड़ देता है, तो वह पूरे मैच का पासा पलट सकता है.

मौसम और हवा के साथ तालमेल

न्यूजीलैंड के वेलिंगटन या क्राइस्टचर्च जैसे मैदानों पर बहुत तेज हवाएं चलती हैं, जो सीधे खेल का रुख बदल देती हैं. ऐसे में कप्तान और गेंदबाजों को बहुत दिमाग लगाना पड़ता है कि कौन सा गेंदबाज हवा की दिशा में फेंककर अपनी रफ्तार बढ़ाएगा और कौन हवा के सामने गेंद डालकर स्विंग हासिल करेगा. इस तेज हवा के कारण हवा में गई ऊंचे कैच पकड़ना भी एक बुरे सपने जैसा हो जाता है क्योंकि गेंद हवा में अपनी दिशा बदल लेती है. इस चुनौती से निपटने के लिए भारतीय टीम को प्रैक्टिस सेशन में हवा के रुख को समझकर कैचिंग का खास अभ्यास करना होगा.

DRS का सटीक उपयोग

न्यूजीलैंड की पिचों पर अत्यधिक उछाल के कारण गेंद अक्सर विकेटों के ऊपर से निकल जाती है, या फिर बहुत ज्यादा अंदर आती है. ऐसे में DRS का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना होगा. रीव्यू बेकार न जाए, इसके लिए विकेटकीपर और कप्तान का तालमेल मैदान पर एकदम अचूक होना चाहिए, क्योंकि कीपर को गेंद की सही ऊंचाई और लाइन का सबसे बेहतर अंदाजा होता है. 

यह भी पढ़ें:  'फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा' आज से हो रहा है शुरू, जानिए कहां लाइव देख सकेंगे हिटमैन की 'कॉमेडी'

Continue reading on the app

  Sports

Asian Games 2026: भारत के 10 खिलाड़ी और टीमें, जिनसे गोल्ड की उम्मीद, क्रिकेट से मनु भाकर तक

Asian Games 2026: भारत एशियन गेम्स में अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले इन खेलों में भारतीय दल से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। हांगझोउ एशियन गेम्स 2023 में भारत ने रिकॉर्ड 107 मेडल जीते थे, जिसमें 28 गोल्ड शामिल थे। इस बार भारत के 503 एथलीट 36 खेलों में देश की चुनौती पेश करेंगे।

भारत की नजर अपने अब तक के सबसे बड़े मेडल टैली पर है। कबड्डी और क्रिकेट जैसे खेलों में भारतीय टीमें अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगी, जबकि शूटिंग, आर्चरी, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में भी कई खिलाड़ियों से गोल्ड की उम्मीद होगी। आइए जानते हैं वे 10 खिलाड़ी और टीमें, जिन पर भारत की गोल्ड मेडल की उम्मीदें टिकी हैं।

1. कबड्डी- पुरुष और महिला टीम
एशियन गेम्स में कबड्डी भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल है। पुरुष और महिला दोनों भारतीय टीमों ने हांगझोउ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। दोनों टीमें 2025 कबड्डी वर्ल्ड कप में भी चैंपियन बनीं। एशियन गेम्स में भारत का शानदार रिकॉर्ड और हालिया प्रदर्शन देखते हुए इस बार भी पुरुष और महिला टीमों से गोल्ड की उम्मीद होगी।

2. क्रिकेट- पुरुष और महिला टीम
एशियन गेम्स में क्रिकेट के दोनों वर्गों में भारत डिफेंडिंग चैंपियन है। हांगझोउ में भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद भी दोनों टीमों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन जारी रखा है। ऐसे में आइची-नागोया में भारतीय टीमों के सामने अपने खिताब का बचाव करने की चुनौती होगी।

3. हॉकी- पुरुष और महिला टीम
भारतीय पुरुष हॉकी टीम एशियन गेम्स में पांच बार गोल्ड मेडल जीत चुकी है और 2023 में भी चैंपियन बनी थी। इस बार टीम की नजर छठे गोल्ड पर होगी। पाकिस्तान, मलेशिया, जापान और चीन जैसी टीमें चुनौती पेश कर सकती हैं। महिला टीम की बात करें तो भारत ने एशियन गेम्स में अपना एकमात्र गोल्ड 1982 में जीता था। 2026 वर्ल्ड कप में पांचवें स्थान के साथ अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी करने वाली टीम इस बार लंबे अंतराल के बाद गोल्ड जीतने की कोशिश करेगी।

4. ज्योति सुरेखा वेन्नम- आर्चरी
ज्योति सुरेखा वेन्नम हांगझोउ एशियन गेम्स में तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच चुकी हैं। उन्होंने कंपाउंड व्यक्तिगत, महिला टीम और मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड हासिल किया था। 2025 एशियन आर्चरी चैंपियनशिप में भी उन्होंने व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण जीता। हालिया प्रदर्शन और एशियन गेम्स के अनुभव को देखते हुए ज्योति से एक से ज्यादा पदक की उम्मीद होगी।

5. धीरज बोम्मदेवरा- आर्चरी
धीरज बोम्मदेवरा 2026 में शानदार फॉर्म में हैं। भारतीय रिकर्व तीरंदाज ने आर्चरी वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा और वर्ल्ड कप में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बने। वह 2025 एशियन चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीत चुके हैं। हांगझोउ में सिल्वर जीतने वाले धीरज इस बार पदक का रंग बदलने के इरादे से उतरेंगे।

6. ईशा सिंह- शूटिंग
ईशा सिंह शूटिंग में भारत की प्रमुख गोल्ड मेडल उम्मीदों में शामिल हैं। 2026 में उन्होंने म्यूनिख और हांगझोउ ISSF वर्ल्ड कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड जीता। म्यूनिख में उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कोर भी बनाया। इसके अलावा एशियन चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल का गोल्ड भी उनके नाम रहा। उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए एशियन गेम्स में उन पर खास नजर होगी।

7. मनु भाकर- शूटिंग
पेरिस ओलंपिक में दो मेडल जीतने वाली मनु भाकर भारतीय शूटिंग की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हैं। 2026 में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल में व्यक्तिगत गोल्ड के लिए चुनौती पेश की है, लेकिन अभी इस साल इन स्पर्धाओं में व्यक्तिगत खिताब उनके नाम नहीं आया है। अब मनु की नजर एशियन गेम्स में अपने पहले व्यक्तिगत गोल्ड पर होगी। ईशा सिंह के शानदार प्रदर्शन के बीच मनु का बड़ा अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी अहम होगा।

8. सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी- बैडमिंटन
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी भारत की सबसे बड़ी बैडमिंटन उम्मीदों में शामिल है। दोनों ने हांगझोउ एशियन गेम्स में पुरुष डबल्स का गोल्ड मेडल जीता था। 2026 में चीन मास्टर्स का खिताब जीतकर उन्होंने अपनी मजबूत फॉर्म का संकेत दिया है। आइची-नागोया में दोनों अपने एशियन गेम्स खिताब का बचाव करने उतरेंगे।

9. तजिंदरपाल सिंह तूर- शॉट पुट
तजिंदरपाल सिंह तूर एशियन गेम्स में लगातार तीसरा गोल्ड मेडल जीतने की कोशिश करेंगे। ऐसा करने पर वह पुरुष शॉट पुट में लगातार तीन एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन सकते हैं। चोट की वजह से कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ था, लेकिन 2026 में उनका सीजन बेस्ट 21.03 मीटर रहा है, जो एशिया में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया गया है। ऐसे में उनकी नजर फिर गोल्ड पर होगी।

10. सर्वेश कुशारे- हाई जंप
सर्वेश कुशारे 2026 में अपने करियर की शानदार फॉर्म में हैं। हांगझोउ एशियन गेम्स में 2.26 मीटर की छलांग के साथ चौथे स्थान पर रहने वाले सर्वेश ने इस साल 2.31 मीटर का प्रदर्शन किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने 2.25 मीटर की छलांग के साथ सिल्वर मेडल जीता। एशियन गेम्स में अब तक पदक से दूर रहे सर्वेश इस बार अपना पहला मेडल जीतने की कोशिश करेंगे, जिसमें उनकी नजर गोल्ड पर होगी।

Sat, 19 Sep 2026 20:01:03 +0530

  Videos
See all

Aaj Tak के साथ खास बातचीत में Panchayat के डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा का बड़ा खुलासा #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-19T15:33:21+00:00

Adbhut Avishvasniya Akalpniya With Sweta Singh: कभी देखी है आपने सिर्फ 14 इंच की गाय? | Punganur Cow #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-19T15:33:36+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers