बदइंतजामी की हद! कुछ ही घंटों में उड़ान और एशियन गेम्स किट के इंतजार में बैठी भारतीय टीम
भारतीय क्रिकेट टीम को एशियन गेम्स के लिए सही साइज का किट नहीं मिल पाया है. टीम इंडिया को रविवार सुबह रवाना होगा है. टीम इंडिया एशियन गेम्स से पहले जापान के खिलाफ एक मैच खेलेगी. ऐसे में टीम को दो अलग-अलग किट चाहिए. बीसीसीआई ने उम्मीद जताई है कि टीम इंडिया को समय पर किट मिल जाएगा.
Iran Executes Mossad Spy: ईरान ने मोसाद के जासूस हुसैन पेदरान को दी फांसी, मिसाइल ठिकानों की जानकारी लीक करने आरोप
मध्य पूर्व में जारी तनाव और इजराइली जासूसी नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के बीच ईरान ने बड़ी कार्रवाई की है। इजराइल को इस्फ़हान प्रांत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, मिसाइल सेंटर और वहां काम करने वाले अधिकारियों की जानकारी भेजने के दोषी हुसैन पेदरान को फांसी दे दी गई है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उसके द्वारा भेजी गई तस्वीरों और रिपोर्टों का इस्तेमाल इजराइल ने हमलों की रणनीति बनाने में किया था।
डच नंबर, 'बेन' नाम का अफसर और खुफिया जानकारी
ईरानी मीडिया एजेंसी 'मिज़ान' के मुताबिक, हुसैन पेदरान ने शुरुआत में पैसों के लालच में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन वहां से जवाब न मिलने पर उसने मोसाद से संपर्क किया। इसके बाद नीदरलैंड्स के एक व्हाट्सएप नंबर से 'बेन' नाम के मोसाद अधिकारी ने उससे बातचीत शुरू की।
पेदरान को मोसाद की तरफ से एक खास डिवाइस दी गई थी, जिससे वह छिपकर सैन्य परिसरों की तस्वीरें लेता और कोड वाले संदेशों के जरिए भेज देता था। उसने इस्फ़हान के मिसाइल सेंटरों के अलावा वहां काम करने वाले इंजीनियरों और अधिकारियों के फोन नंबर भी मोसाद को सौंप दिए थे।
तेहरान में छिपकर दिए जाते थे पैसे
जासूसी के बदले हुसैन पेदरान को भारी रकम दी जाती थी। मोसाद के लोग तेहरान में एक पुल के सुरक्षा बैरियर के पीछे मैग्नेटिक बॉक्स में या फिर कॉफी शॉप के वॉशरूम में यूरो कैश छिपाकर रख देते थे, जिसे पेदरान चुपचाप उठा लेता था। जांच टीम ने जब उसके घर पर छापा मारा, तो वहां से मिसाइल से जुड़ी एक गोपनीय डायरी और फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए कई सिम कार्ड बरामद हुए।
अदालत का फैसला और ईरान का सख्त कदम
ईरान की रिवोल्यूशनरी कोर्ट में चले मुकदमे के बाद पेदरान को देशद्रोह और विदेशी एजेंसी की मदद करने का दोषी पाया गया। सुप्रीम कोर्ट से उसकी अपील खारिज होने के बाद आखिरकार उसे फांसी की सजा दे दी गई। हालिया सैन्य संघर्षों को देखते हुए ईरान अपने गोपनीय सैन्य ठिकानों और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
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