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भारत में 97 प्रतिशत एचआर प्रमुखों को उम्मीद, 2027 तक इंसान और एआई साथ मिलकर काम करेंगे : रिपोर्ट

मुंबई, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 97 प्रतिशत मानव संसाधन प्रमुखों (एचआर लीडर्स) का मानना है कि वर्ष 2027 तक काम करने का तरीका लगभग पूरी तरह बदल जाएगा। उस समय ज्यादातर काम इंसान और एआई मिलकर करेंगे, न कि कभी-कभी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा।

नैसकॉम और इंडीड की रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्नोलॉजी कंपनियों में 20 से 40 प्रतिशत काम पहले ही एआई की मदद से हो रहा है। यह रिपोर्ट देश की 120 से ज्यादा तकनीकी कंपनियों के एचआर प्रमुखों के सर्वेक्षण पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 45 प्रतिशत लोगों ने बताया कि अब 40 प्रतिशत से ज्यादा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम एआई द्वारा किया जा रहा है।

नैसकॉम की शोध प्रमुख केतकी कर्णिक ने कहा कि जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, नई स्किल्स सीखना और क्षमताएं बढ़ाना बहुत जरूरी हो गया है। इससे कर्मचारी बेहतर काम कर पाएंगे और कंपनियों को अच्छे नतीजे मिलेंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई अब सिर्फ एक सहायक उपकरण नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा के काम, कार्यप्रणाली और फैसले लेने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुका है। इंटेलिजेंट ऑटोमेशन (39 प्रतिशत) और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (37 प्रतिशत) में एआई की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

हालांकि, आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि कभी-कभी एआई द्वारा दिया गया परिणाम अधूरा या कम गुणवत्ता वाला होता है। इसलिए एआई पर इंसानी निगरानी अभी भी बहुत जरूरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अच्छा तालमेल कार्यक्षेत्र निर्धारण, सिस्टम इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मॉडल डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में देखा जा रहा है।

आने वाले दो से तीन वर्षों में बार-बार होने वाले साधारण कार्य, जैसे बॉयलरप्लेट कोड जनरेशन और यूनिट टेस्ट निर्माण, ज्यादातर एआई के जरिए किए जाएंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनियां भर्ती के समय डिग्री से ज्यादा कौशल पर ध्यान दे रही हैं। 85 प्रतिशत प्रबंधक सर्टिफिकेट्स की तुलना में कौशल आधारित भर्ती को प्राथमिकता देते हैं और 98 प्रतिशत लोगों ने हाइब्रिड और बहु-विषयक कौशल की जरूरत बताई।

वहीं, करीब 83 प्रतिशत एचआर प्रमुखों ने बताया कि उन्होंने अपने काम के तरीकों में बदलाव करते हुए एआई से जुड़े नए पद बनाए हैं।

एआई अपनाने के लिए 79 प्रतिशत कंपनियां अपने कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देने को सबसे अहम रणनीति मान रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत संगठन मिले-जुले तरीके से काम कर रहे हैं, जिसमें ज्यादातर कर्मचारी हफ्ते में तीन या उससे ज्यादा दिन दफ्तर से काम कर रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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US-Iran Tension: अमेरिका से तनाव के बीच ईरान में अब तक 2000 लोगों की मौत, अब्बास अराघची ने ट्रंप को फिर किया चैलेंज

US-Iran Tension: ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है. देश में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक ईरानी अधिकारी ने बड़ा दावा किया है. एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में अधिकारी ने कहा कि मौजूदा आंदोलन के दौरान अब तक करीब 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है. ईरानी सरकार का आरोप है कि इन मौतों के पीछे 'आतंकवादी तत्व' जिम्मेदार हैं, जो हालात को हिंसक बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

अमेरिका को ईरान की सख्त चेतावनी

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान अब किसी भी तरह के दबाव या सैन्य कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है. अराघची ने दो टूक कहा, 'अगर वे फिर से सैन्य विकल्प आजमाना चाहते हैं, जिसे वे पहले भी आजमा चुके हैं, तो इस बार ईरान उसका पूरी ताकत से जवाब देगा.' उनके बयान से साफ है कि तेहरान अब किसी भी संभावित टकराव के लिए खुद को तैयार मान रहा है.

ईरानी दूतावास का बयान: 'हम अपने शत्रुओं को पहचानते हैं'

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने भी अमेरिका और अन्य विरोधी ताकतों को कड़ा संदेश दिया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में दूतावास ने कहा कि सरकार समर्थक प्रदर्शनों ने विदेशी शत्रुओं की साजिशों को नाकाम कर दिया है.

बयान में कहा गया, 'ईरानी राष्ट्र मजबूत, शक्तिशाली और अपने दुश्मनों से भलीभांति परिचित है. अमेरिकी राजनेताओं को छल-कपट और भाड़े के हत्यारों पर भरोसा करना बंद करना चाहिए.'यह बयान ईरान की आक्रामक कूटनीतिक भाषा और आत्मविश्वास को दर्शाता है.

दिसंबर 2025 से जारी आंदोलन

ईरान में यह आंदोलन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुआ था. शुरुआत में यह प्रदर्शन सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों के विरोध तक सीमित थे, लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन इस्लामिक गणराज्य और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ खुले विद्रोह में बदल गया. 

प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर 'तानाशाह मुर्दाबाद', 'खामेनेई हटाओ' जैसे नारे लगा रहे हैं. इसके साथ ही निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की वापसी की मांग भी जोर पकड़ रही है.

बढ़ता टकराव, अनिश्चित भविष्य

ईरान में बढ़ती हिंसा, हजारों मौतों के दावे और अमेरिका को दी गई खुली चेतावनियों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. एक ओर सरकार आंदोलन को विदेशी साजिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे बदलाव की लड़ाई करार दे रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान-अमेरिका तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है, जिससे आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीति और अधिक अस्थिर हो सकती है.

यह भी पढ़ें - Iran Protest: इरफान सुल्तानी को कल फांसी देगी ईरानी सरकार, ईश्वर के खिलाफ हिंसा छेड़ने का आरोप; जानें इनके बारे में

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