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बांग्लादेश: पूर्व पीएम शेख हसीना की सजा-ए-मौत का लिखित फैसला जारी, 457 पेज में कैद पूरी कहानी

ढाका, 13 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को सुनाई सजा-ए-मौत का पूरा लिखित फैसला प्रकाशित कर दिया। 457 पेज में कोर्ट के आदेश की पूरी कहानी है।

स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, कोर्ट ने 2024 के जुलाई-अगस्त में एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई को मानवता के खिलाफ अपराध माना है।

ट्रिब्यूनल-1 के तीन सदस्यीय पैनल ने 17 नवंबर 2025 को मौखिक फैसला सुनाया था, और अब पूरा दस्तावेज ट्रिब्यूनल की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और कमाल को दो मुख्य चार्ज के तहत दोषी ठहराया।

प्रोथोम आलो की खबर के अनुसार, पहला चार्ज तीन घटनाओं से जुड़ा है, जिसमें 14 जुलाई 2024 को गणभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों को रजाकार कहकर उकसाना, ढाका यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर मक्सूद कमाल के साथ बातचीत में छात्रों को फांसी देने का आदेश देना, और रंगपुर में अबू सईद की पुलिस फायरिंग में मौत होना बताया गया।

इनके लिए दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

दूसरा चार्ज भी तीन घटनाओं पर आधारित है, जिसमें 18 जुलाई 2024 को पूर्व ढाका साउथ सिटी कॉर्पोरेशन मेयर फजले नूर तापोश और जसद प्रेसिडेंट हसनुल हक इनु के साथ फोन पर ड्रोन से प्रदर्शनकारियों की लोकेशन ट्रैक करने और हेलिकॉप्टर से घातक हथियारों से मारने का आदेश देना, साथ ही अपराधों को रोकने में विफलता; 5 अगस्त 2024 को चनखरपुल में छह प्रदर्शनकारियों की पुलिस फायरिंग में मौत; और सावर के आशुलिया में छह लोगों की हत्या और शव जलाने की घटना है।

इनके लिए दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई।

ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और कमाल की सभी संपत्तियों को जब्त करने और जुलाई हिंसा के पीड़ितों में वितरित करने का आदेश दिया। पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामुन, जो सरकारी गवाह बन गए थे, उन्हें दोनों आरोपों के तहत पांच साल कैद की सजा सुनाई गई थी।

ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस एमडी गोलाम मोर्तुजा मजुमदार ने कहा कि हसीना को उकसाने, हत्या का आदेश देने और अत्याचारों को रोकने में विफल रहने के तीन मामलों में दोषी पाया गया। शेख हसीना, जो भारत में निर्वासन में हैं, पहले ही इस फैसले को पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बता चुकी हैं।

बांग्लादेश सरकार ने भारत से हसीना और कमाल के प्रत्यर्पण की मांग की है। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच सजा की निंदा कर चुके हैं, इसे मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए ट्रायल को अनुचित ठहराया गया क्योंकि फैसला दोनों की गैरमौजूदगी में सुनाया गया था।

संयुक्त राष्ट्र ने भी मौत की सजा का विरोध करते हुए पीड़ितों के लिए न्याय को महत्वपूर्ण बताया था।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत में 97 प्रतिशत एचआर प्रमुखों को उम्मीद, 2027 तक इंसान और एआई साथ मिलकर काम करेंगे : रिपोर्ट

मुंबई, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 97 प्रतिशत मानव संसाधन प्रमुखों (एचआर लीडर्स) का मानना है कि वर्ष 2027 तक काम करने का तरीका लगभग पूरी तरह बदल जाएगा। उस समय ज्यादातर काम इंसान और एआई मिलकर करेंगे, न कि कभी-कभी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा।

नैसकॉम और इंडीड की रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्नोलॉजी कंपनियों में 20 से 40 प्रतिशत काम पहले ही एआई की मदद से हो रहा है। यह रिपोर्ट देश की 120 से ज्यादा तकनीकी कंपनियों के एचआर प्रमुखों के सर्वेक्षण पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 45 प्रतिशत लोगों ने बताया कि अब 40 प्रतिशत से ज्यादा सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम एआई द्वारा किया जा रहा है।

नैसकॉम की शोध प्रमुख केतकी कर्णिक ने कहा कि जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, नई स्किल्स सीखना और क्षमताएं बढ़ाना बहुत जरूरी हो गया है। इससे कर्मचारी बेहतर काम कर पाएंगे और कंपनियों को अच्छे नतीजे मिलेंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई अब सिर्फ एक सहायक उपकरण नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा के काम, कार्यप्रणाली और फैसले लेने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुका है। इंटेलिजेंट ऑटोमेशन (39 प्रतिशत) और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (37 प्रतिशत) में एआई की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

हालांकि, आधे से ज्यादा लोगों ने कहा कि कभी-कभी एआई द्वारा दिया गया परिणाम अधूरा या कम गुणवत्ता वाला होता है। इसलिए एआई पर इंसानी निगरानी अभी भी बहुत जरूरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अच्छा तालमेल कार्यक्षेत्र निर्धारण, सिस्टम इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मॉडल डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में देखा जा रहा है।

आने वाले दो से तीन वर्षों में बार-बार होने वाले साधारण कार्य, जैसे बॉयलरप्लेट कोड जनरेशन और यूनिट टेस्ट निर्माण, ज्यादातर एआई के जरिए किए जाएंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनियां भर्ती के समय डिग्री से ज्यादा कौशल पर ध्यान दे रही हैं। 85 प्रतिशत प्रबंधक सर्टिफिकेट्स की तुलना में कौशल आधारित भर्ती को प्राथमिकता देते हैं और 98 प्रतिशत लोगों ने हाइब्रिड और बहु-विषयक कौशल की जरूरत बताई।

वहीं, करीब 83 प्रतिशत एचआर प्रमुखों ने बताया कि उन्होंने अपने काम के तरीकों में बदलाव करते हुए एआई से जुड़े नए पद बनाए हैं।

एआई अपनाने के लिए 79 प्रतिशत कंपनियां अपने कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देने को सबसे अहम रणनीति मान रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत संगठन मिले-जुले तरीके से काम कर रहे हैं, जिसमें ज्यादातर कर्मचारी हफ्ते में तीन या उससे ज्यादा दिन दफ्तर से काम कर रहे हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/एबीएम

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  Sports

BCB बयान से नाराज़ खिलाड़ी, इस्तीफे की मांग के साथ बीपीएल बहिष्कार की चेतावनी

बांग्लादेश क्रिकेट में बड़े टकराव के आसार बनते दिख रहे है। खिलाड़ियों और क्रिकेट बोर्ड के बीच बयानबाज़ी इतनी बढ़ गई है कि देश में चल रही सबसे बड़ी टी20 लीग तक पर असर पड़ने की आशंका बन गई है।
 
बता दें कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के निदेशक और वित्त समिति के अध्यक्ष नज़मुल इस्लाम ने बुधवार को राष्ट्रीय खिलाड़ियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि बोर्ड खिलाड़ियों पर “करोड़ों-करोड़ों टका” खर्च करता है और जरूरत पड़े तो उनसे यह पैसा वापस मांगा जाना चाहिए। मौजूद जानकारी के अनुसार यह बयान ढाका में बीसीबी के एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया था।

इस बयान के कुछ ही घंटों बाद क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश के अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन ने सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस तरह की टिप्पणी ने पूरे क्रिकेट समुदाय को आहत किया है और यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। मिथुन ने स्पष्ट किया कि अगर नज़मुल इस्लाम ने अगला मैच शुरू होने से पहले इस्तीफा नहीं दिया, तो बीपीएल से शुरुआत करते हुए सभी क्रिकेट गतिविधियों का बहिष्कार किया जाएगा।

गौरतलब है कि 15 जनवरी को बांग्लादेश प्रीमियर लीग के दो मुकाबले तय हैं। बताया जा रहा है कि कई टीमों के कप्तानों और कोचों ने इस बहिष्कार आह्वान के साथ एकजुटता भी जताई है, जिससे टूर्नामेंट के आयोजन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

नज़मुल इस्लाम की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बीसीबी के भारत में होने वाले टी20 विश्व कप मुकाबलों में हिस्सा न लेने के फैसले को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। बीसीबी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यह रुख अपनाया है। इसी संदर्भ में नज़मुल ने कहा था कि अगर बांग्लादेश नहीं खेलता तो आर्थिक नुकसान खिलाड़ियों को होगा, बोर्ड को नहीं, और उन्हें किसी तरह का मुआवजा भी नहीं मिलेगा।

विवाद बढ़ने के बाद बीसीबी ने आधिकारिक बयान जारी कर नज़मुल इस्लाम की टिप्पणियों से दूरी बनाते हुए खेद जताया और कहा कि ये उनके निजी विचार हैं, बोर्ड की नीति नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि खिलाड़ियों के प्रति अपमानजनक आचरण पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब नज़मुल इस्लाम विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन्होंने पूर्व कप्तान तमीम इकबाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिससे साफ है कि बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर अब मैदान के बाहर भी दिखने लगा है।
Thu, 15 Jan 2026 22:21:40 +0530

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