एक पंखा चलाने पर आया ₹76 हजार का बिल, सरसीवा बिजली दफ्तर का ग्रामीणों ने किया घेराव
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम पिंडरावन में भारी बिजली बिलों और गंभीर लो-वोल्टेज की समस्या से तंग आकर ग्रामीणों का आक्रोश बिजली कार्यालय पर फूट पड़ा. बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर सरसीवा बिजली विभाग पहुंचे और विभागीय कार्यशैली के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया. ग्रामीणों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अत्यधिक बिजली बिलों में कटौती करने, लो-वोल्टेज की समस्या का स्थाई समाधान निकालने और क्षेत्र से स्मार्ट मीटरों को हटाने की मांग रखी. प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया: लो-वोल्टेज से परेशानी: गांव के कई मोहल्लों (विशेषकर झुमका रोड) में वोल्टेज 110 से 120 वोल्ट ही रहता है, जिससे न तो पंखे काम करते हैं और न ही पानी की बोरिंग मशीनें चल पाती हैं.
भारी-भरकम बिजली बिल: एक सामान्य किसान, जो केवल बुनियादी बिजली और पंखे का उपयोग करता है, उसका मासिक बिजली बिल अचानक बढ़कर ₹75,916 से लेकर ₹80,000 तक पहुंच गया है. जबकि पिछले महीनों में उनका बिल औसतन मात्र ₹180 के आसपास आता था. ग्रामीणों का कहना है कि पूरे साल की खेती की उपज बेचने के बाद भी वे इतना बड़ा बिल चुकाने में असमर्थ हैं,
भारत ने जापानी लॉजिस्टिक्स दिग्गज एनएक्स ग्रुप के साथ किया समझौता, सेमीकंडक्टर मिशन को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। भारत सरकार समर्थित इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) और जापान के निप्पॉन एक्सप्रेस ग्रुप की लॉजिस्टिक्स इकाई एनएक्स ग्रुप ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन समाधान विकसित करने संबंधी एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
एक सरकारी बयान के अनुसार, यह समझौता सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान किया गया। इसके तहत दोनों पक्ष सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं, बुनियादी ढांचे और सप्लाई चेन की मजबूती पर जानकारी साझा करेंगे और नियमित चर्चा करेंगे।
इस सहयोग का उद्देश्य सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी लॉजिस्टिक्स चुनौतियों का समाधान तलाशना और भारत में एक मजबूत तथा टिकाऊ सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास को समर्थन देना है।
भारत तेजी से अपनी सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार कर रहा है और एक ऐसा घरेलू इकोसिस्टम विकसित कर रहा है, जो निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं और वैश्विक बाजारों को आपस में जोड़ सके।
सेमीकंडक्टर उद्योग में विशेष उपकरणों, कंपोनेंट्स और कच्चे माल की आवाजाही के लिए अत्याधुनिक और विशेषीकृत लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन ढांचे की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह साझेदारी भारत की उभरती चिप विनिर्माण क्षमता को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
वैश्विक चिप सम्मेलन के दौरान एनएक्स ग्रुप ने अपनी एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स सेवाओं का प्रदर्शन भी किया। इसमें हवाई और समुद्री माल परिवहन, कस्टम क्लीयरेंस, वेयरहाउसिंग, घरेलू परिवहन, फैक्ट्री डिलीवरी, इंस्टॉलेशन सपोर्ट और आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाएं शामिल हैं।
कंपनी ने कहा कि सेमीकंडक्टर लॉजिस्टिक्स में उसका वैश्विक अनुभव और नेटवर्क सरकार की सेमीकॉन 2.0 पहल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे विनिर्माण इकाइयों, आपूर्तिकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित किया जा सकेगा।
एनएक्स ग्रुप के प्रतिनिधि कोबायाशी ने कहा कि कंपनी केवल परिवहन सेवाएं ही नहीं देती, बल्कि पूरे सप्लाई चेन प्रबंधन को शामिल करते हुए एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स समाधान उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि समूह सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में हर संभव सहयोग देगा।
कंपनी के अनुसार, भारत उसके लिए एक रणनीतिक विकास केंद्र और दीर्घकालिक विस्तार योजनाओं का महत्वपूर्ण बाजार है।
इससे पहले सितंबर में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत देश में कम से कम 200 चिप डिजाइन कंपनियां उभरकर सामने आई हैं। उन्होंने कहा था कि यह घरेलू सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने की दिशा में एक गेम चेंजर साबित हो रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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