देश के सिस्टम पर 6 लोगों का कब्जा, शिक्षा तंत्र हुआ बदहाल: इंदौर में बोले Rahul Gandhi
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को बदहाल करने का आरोप लगाया और कहा कि एक सिस्टम ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया है और वह नहीं चाहता कि छात्र उसके सामने अपने बुनियादी मुद्दों को लेकर सवाल उठाएं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र इंदौर में गांधी ने अपने युवा संपर्क कार्यक्रम छात्रों की गूंज के दौरान ‘सिस्टम बनाम छात्र विषय पर बड़ी तादाद में मौजूद युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने एक दृश्य-श्रव्य प्रस्तुतिकरण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और मुकेश अंबानी व गौतम अदाणी सरीखे शीर्ष उद्योगपतियों की तस्वीरें दिखाते हुए इनके नाम गिनाए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कहा,‘‘पूरे देश पर एक सिस्टम का कब्जा हो गया है जिसके शीर्ष स्तर पर छह लोग हैं।’’ गांधी ने पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में शामिल लोगों पर बल प्रयोग के दौरान कील वाली लाठियों और पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाया और गृह मंत्री शाह की आलोचना की। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा,‘‘सिस्टम अब छात्रों पर आक्रमण कर रहा है।’’ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल पर निशाना साधते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि वह फोन और सोशल मीडिया समेत विभिन्न संचार साधनों पर ‘कब्जा करके बैठे’ हैं और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री तक खुफिया सूचनाएं पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि सिस्टम ने राजनीति से लेकर शिक्षा, कारोबार, नौकरशाही, खेल और मीडिया समेत हर क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है।
गांधी ने कहा, ‘‘ हिंदुस्तान में सचिन तेंदुलकर और कपिल देव जैसे (पूर्व) किक्रेटर हैं, लेकिन सिस्टम ने गृह मंत्री शाह के बेटे को क्रिकेट का पूरा ठेका दे दिया है।’’ उन्होंने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी खूबी होती है-सवाल करना, लेकिन सिस्टम नहीं चाहता कि छात्र उसके सामने अपने बुनियादी मुद्दों को लेकर सवाल उठाएं। गांधी ने कहा कि सिस्टम को छात्रों से खतरा है क्योंकि वे परिवारवाद, कारोबार पर चंद उद्योगपतियों के एकाधिकार, न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग की कमियों को लेकर सवाल करते हैं। उन्होंने कहा,‘‘सिस्टम नहीं चाहता कि छात्र उससे सवाल करें।
इसलिए सिस्टम छात्र नहीं, बल्कि अंधभक्त तैयार करता है। अंधभक्त छात्र विरोधी लोग हैं जो कभी सिस्टम से सवाल नहीं पूछते और अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं। छात्र मोहब्बत की बात करता है, जबकि अंधभक्त नफरत फैलाते हैं।’’ गांधी ने कहा कि शिक्षा विलासिता की कोई वस्तु नहीं, बल्कि छात्रों का हक है और सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रभावकारी शिक्षा तंत्र स्थापित करना चाहिए।
गांधी ने कहा कि 2014 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने बजट का 4.6 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया था, जबकि भाजपा नीत मौजूदा सरकार में यह आवंटन घटकर 2.6 प्रतिशत रह गया है। गांधी ने दावा किया कि देश में एक लाख सरकारी विद्यालय बंद हो गए हैं जिनमें से 55 प्रतिशत शिक्षा संस्थान मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में हैं। गांधी ने ये दावे भी किए कि देश में पिछले 10 साल में 1.5 करोड़ विद्यार्थियों से छात्रवृद्धि का लाभ छीन लिया गया और सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों के 10 लाख पद खाली पड़े हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि छात्र भारत का भविष्य हैं और उनके बिना कोई भी देश मजबूत नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि सिस्टम को लेकर जनता की टूटी उम्मीदें बहाल हों और वह सिस्टम पर फिर से भरोसा करना शुरू कर दे। गांधी ने भाजपा के समर्थकों पर निशाना साधा और कहा,‘‘हम अंधभक्तों का नहीं, बल्कि छात्रों का हिंदुस्तान चाहते हैं।’’ कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों ने ओबीसी आरक्षण, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में घोटालों और अन्य विषयों को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को आपबीती सुनाई और उनसे इन मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की मांग की।
Explainer: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की नजर, भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता खुला; क्या होगा असर?
Russia Sanctions Bill: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है. इस कानून से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ-साथ उन देशों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है, जो बड़े पैमाने पर रूस से तेल और गैस खरीदते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में ऐसे देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है. हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि भारत पर अभी 100% टैरिफ नहीं लगाया गया है. कानून केवल अमेरिकी प्रशासन को ऐसा करने की कानूनी शक्ति देता है.
भारत के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि 2022 के बाद से रूस भारत के कच्चे तेल के बड़े स्रोतों में शामिल हो गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर अमेरिका भारत पर भारी टैरिफ लगाता है तो इसका असर भारतीय कारोबार, रुपये, महंगाई और आम लोगों पर कैसे पड़ेगा.
1. आखिर अमेरिका ने कौन सा कानून बनाया है?
इस कानून का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. इसके तहत रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, रक्षा से जुड़े नेटवर्क और तेल ले जाने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ पर प्रतिबंधों को मजबूत किया गया है.
कानून की एक अहम व्यवस्था अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातक देशों के सामान पर कुछ परिस्थितियों में 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देती है.
इसके अलावा रूस के प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों और संस्थाओं को भी निशाना बनाने का प्रावधान है. ईरान पर लागू कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों को भी पांच साल के लिए बढ़ाया गया है.
2. क्या भारत पर अभी 100% टैरिफ लग गया है?
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है. कानून लागू होने के बाद भारत पर अपने आप 100% टैरिफ नहीं लग गया है. राष्ट्रपति ट्रंप को यह अधिकार मिला है कि कानून में तय शर्तें पूरी होने पर वह इस तरह का टैरिफ लगा सकते हैं.
यानी अभी तीन चीजें अलग-अलग हैं—
- कानून पास होकर लागू हो चुका है.
- राष्ट्रपति को 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति मिली है.
- भारत पर वास्तव में कितना टैरिफ लगेगा, यह अभी तय नहीं हुआ है.
कानून में कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रपति को छूट यानी waiver देने का अधिकार भी दिया गया है. इसलिए आगे का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रंप प्रशासन इन शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह करता है.
3. भारत रूस से इतना तेल क्यों खरीदता है?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने अपने कच्चे तेल पर भारी छूट दी. भारत की रिफाइनिंग कंपनियों ने इस मौके का इस्तेमाल करके रूस से बड़ी मात्रा में क्रूड खरीदना शुरू किया.
युद्ध से पहले भारत के क्रूड आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 55% से ज्यादा थी, जबकि रूस की हिस्सेदारी 15% से कम थी. इसके बाद तस्वीर काफी बदल गई.
CREA के अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस के समुद्री क्रूड निर्यात में चीन की हिस्सेदारी करीब 50% और भारत की 37% रही. यानी भारत रूस के कच्चे तेल का दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है.
भारत हालांकि सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं है. देश अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, वेनेजुएला और अफ्रीकी देशों से भी क्रूड खरीदता है.
4. अगर अमेरिका भारत पर 100% टैरिफ लगाता है तो क्या होगा?
अगर अमेरिका भारतीय सामान पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाता है तो इसका सीधा असर पेट्रोल पंप पर नहीं पड़ेगा. 100% टैरिफ का मतलब होगा कि अमेरिका में भारतीय सामान पहुंचने पर उस पर बहुत ज्यादा आयात शुल्क लग सकता है. इससे अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं और भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है.
इसका असर कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयों, जेम्स-ज्वेलरी और दूसरे निर्यात क्षेत्रों पर अलग-अलग पड़ सकता है. वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका कितना टैरिफ लगाता है, किन उत्पादों को इसमें शामिल करता है और इसे कब लागू करता है.
5. क्या इसका असर रुपये और महंगाई पर भी हो सकता है?
अगर अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात घटता है और डॉलर की आमद पर दबाव पड़ता है, तो रुपये पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर भारत रूस से कम तेल खरीदकर महंगे स्रोतों से ज्यादा क्रूड खरीदता है, तो देश का आयात बिल बढ़ सकता है. इससे भारत के चालू खाते, रुपये और महंगाई पर दबाव बनने की संभावना हो सकती है.
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कानून लागू होते ही पेट्रोल, डीजल या रोजमर्रा की चीजें तुरंत महंगी हो जाएंगी. इसके लिए कई आर्थिक परिस्थितियां एक साथ बदलनी होंगी.
6. क्या रूस से तेल खरीदना बंद करना पड़ेगा?
भारत सरकार लगातार कहती रही है कि उसकी ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य देश की सस्ती, भरोसेमंद और लगातार ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस मामले में आगे के घटनाक्रम पर नजर रख रहा है और अपने व्यापार तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा.
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने भी कहा है कि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा देश की बुनियादी जरूरत है.
7. भारत के लिए असली चुनौती क्या है?
भारत के सामने इस समय दो स्तर पर चुनौती है. पहला, रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका का दबाव और दूसरा, अमेरिका के साथ भारत के बड़े व्यापारिक रिश्ते.
अगर भारत रूसी तेल खरीदना जारी रखता है और अमेरिका भारी टैरिफ लगाता है, तो भारतीय निर्यातकों पर असर पड़ सकता है. वहीं अगर भारत रूसी तेल खरीदना काफी कम कर देता है तो उसे दूसरे देशों से क्रूड खरीदना पड़ सकता है. अगर उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है.
इसी वजह से यह मामला सिर्फ रूस और अमेरिका के बीच प्रतिबंधों का नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार नीति से भी जुड़ा हुआ है.
8. रूस और चीन की क्या प्रतिक्रिया है?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नए कानून का स्वागत किया है और कहा है कि प्रतिबंध रूस पर दबाव बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.
वहीं रूस ने अमेरिकी कदम की आलोचना की है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अतिरिक्त अमेरिकी प्रतिबंधों को रूस के खिलाफ ‘अमित्रतापूर्ण कार्रवाई’ बताया है और कहा है कि इससे यूक्रेन में शांति समझौते की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं.
चीन ने भी रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ के इस्तेमाल का विरोध किया है और इसे अमेरिकी ‘long-arm jurisdiction’ यानी दूसरे देशों के मामलों में अमेरिकी कानून का विस्तार बताया है.
भारत पर अब क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है. नया अमेरिकी कानून सिर्फ ट्रंप प्रशासन को भविष्य में ऐसा कदम उठाने की शक्ति देता है.
आगे भारत पर असर मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करेगा:
- अमेरिका भारत पर टैरिफ लगाने का फैसला करता है या नहीं.
- अगर लगाता है तो टैरिफ की दर कितनी होती है.
- किन भारतीय उत्पादों को इसके दायरे में रखा जाता है.
- भारत रूस से कितना कच्चा तेल खरीदता रहता है.
- रूस के तेल की जगह मिलने वाले वैकल्पिक क्रूड की कीमत क्या रहती है.
- भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है.
यानी अभी इसे ‘भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ लागू’ कहना सही नहीं होगा. फिलहाल कानून ने सिर्फ ऐसा करने का रास्ता खोला है. असली असर अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों और भारत की ऊर्जा व व्यापार नीति पर निर्भर करेगा.
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