भारत की प्रतिभा और स्थिर नीतियों पर वैश्विक कंपनियों का भरोसा, सेमीकंडक्टर निवेश में दिख रही जबरदस्त दिलचस्पी: इंडस्ट्री लीडर्स
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। सेमीकॉन इंडिया 2026 के तीसरे और आखिरी दिन शनिवार को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की प्रतिभा और स्थिर नीतियों पर वैश्विक कंपनियों का भरोसा कायम है, साथ ही सेमीकंडक्टर निवेश में जबरदस्त दिलचस्पी देखने को मिली रही है। उन्होंने कहा कि भारत की टैलेंट पूल और नीति समर्थन निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश को लेकर घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बीच जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आने वाले हर निवेश प्रस्ताव का गहन मूल्यांकन किया जाएगा, क्योंकि इसमें सरकार की ओर से महत्वपूर्ण प्रोत्साहन राशि शामिल होती है।
एस. कृष्णन ने आगे कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग होने के कारण सरकार प्रत्येक प्रस्ताव का सावधानीपूर्वक परीक्षण करने के बाद ही प्रोत्साहन देगी।
उन्होंने कहा, बड़ी संख्या में वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश करना चाहती हैं और इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं, पहला भारत की मजबूत प्रतिभा क्षमता और दूसरा सरकार की स्थिर एवं सहयोगी नीतियां। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे निवेशकों को प्रोत्साहित करने और उनके साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एस. कृष्णन ने बताया कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल विकास सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रतिभा का प्रमुख केंद्र है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर भारत में हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने डिजाइन प्रतिभा को विकसित करने पर विशेष जोर दिया है और वर्तमान में लगभग 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ कंपनियों ने भारत में कौशल विकास से जुड़े अपने पायलट कार्यक्रमों में अन्य देशों की तुलना में बेहतर परिणाम मिलने की जानकारी दी है, जो भारत की प्रतिभा क्षमता को दर्शाता है।
इसके अलावा, इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि इस वर्ष सेमीकॉन इंडिया को जो प्रतिक्रिया मिली है, वह उम्मीदों से कहीं बेहतर है।
उन्होंने कहा कि भारत अभी इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत नया खिलाड़ी है और केवल पिछले पांच वर्षों में उसने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि हर साल सेमीकॉन इंडिया का दायरा और प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन इस बार 500 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी और दुनिया भर से आए उद्योग प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे अभूतपूर्व बना दिया है।
पंकज मोहिंद्रू ने आगे कहा, उद्योग, निवेशक, नीति निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ बड़ी संख्या में इस मंच से जुड़ रहे हैं, जो भारत के बढ़ते वैश्विक महत्व को दर्शाता है।
इसके साथ ही, सेमी इंडिया और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) के सीईओ और अध्यक्ष अशोक के. चंदक ने आईएएनएस से कहा कि इस बार एशियाई देशों की भागीदारी विशेष रूप से मजबूत रही है।
उन्होंने बताया कि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों की कंपनियां और प्रतिनिधिमंडल बड़ी संख्या में सम्मेलन में शामिल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जापान, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों के कंट्री पवेलियन लगाए गए हैं, जबकि विभिन्न देशों के साथ विशेष राउंडटेबल चर्चाएं भी आयोजित की गई हैं। यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक कंपनियां और सरकारें भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं।
अशोक के. चंदक ने आगे कहा, पिछले कुछ दिन बेहद दिलचस्प रहे हैं। जाहिर है, लोगों ने आगंतुकों की संख्या पर नजर रखी। पहले दिन कुल 12,000 आगंतुक आए, दूसरे दिन 16,000 और आज भी यह सिलसिला जारी है। इसमें इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवा और छात्र समुदाय दोनों शामिल हैं। पहले दिन बड़ी संख्या में छात्र आए थे। आज सुबह भी मैंने कई छात्रों को आते देखा। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि छात्र समुदाय में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के बारे में ज्ञान और समझ हासिल करने की प्रबल इच्छा है।
--आईएएनएस
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क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन में तेजी से आगे बढ़ता भारत, ये नए युग की शुरुआत : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शनिवार को भारत की पर्यावरण से जुड़ी उपलब्धियों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, "अभी कुछ दिन पहले भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली है और ये दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। ये क्लीन मोबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत है।" प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 सालों में भारत की विंड एनर्जी क्षमता में 3 गुना बढ़ोतरी हुई है। हाइड्रो-एनर्जी क्षमता में भी मजबूत वृद्धि देखी गई है। नया भारत न्यूक्लियर एनर्जी पर भी फोकस कर रहा है।
प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खुल रहे रास्ते
उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में प्राइवेट प्लेयर्स के लिए भी रास्ते खोल रही है। इन प्रयासों से भारत की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ई-मोबिलिटी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत में हर साल केवल 3,000 ई-व्हीकल बिकते थे। पिछले साल करीब 25 लाख ईवी की बिक्री हुई, जो एक अविश्वसनीय वृद्धि है। इससे पर्यावरण को मदद मिल रही है।
टोल बूथ पर इंतजार का समय हुआ
उन्होंने कहा कि फास्टैग से टोल बूथ पर इंतजार का समय और ईंधन की बर्बादी काफी कम हुई है। पीएम मोदी ने बताया कि 2014 तक देश के सिर्फ 5 शहरों में 250 किमी से कम मेट्रो नेटवर्क था। आज देश के 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो चल रही है और भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जिनके पास 1 हजार किमी से ज्यादा का मेट्रो नेटवर्क है।
करोड़ों लीटर डीजल की बचत हुई
उन्होंने कहा कि रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण से करोड़ों लीटर डीजल की बचत हुई है, जिससे पर्यावरण को भी फायदा हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा विकास तेज भी है और सस्टेनेबल भी है। आज जल संरक्षण में भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। 70,000 से ज्यादा अमृत सरोवर बनाए गए हैं। 'कैच द रेन' पहल के तहत देश भर में करीब 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं।
नेचुरल फार्मिंग के क्लस्टर बनाए गए
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग से बड़ा बदलाव आया है। 12.5 लाख हेक्टेयर में नेचुरल फार्मिंग के क्लस्टर बनाए गए हैं। करीब 3,000 किस्म की जलवायु-अनुकूल फसलें विकसित की गई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हम एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देकर कार्बन फुटप्रिंट कम कर रहे हैं। पिछले 12 वर्षों में हमारा बहुत घना वन क्षेत्र 22 प्रतिशत बढ़ा है।
प्लास्टिक वेस्ट की चुनौती पर पीएम मोदी ने कहा कि इसलिए भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाई है। हमने 'रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल' के मंत्र के साथ सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया है। आज भारत में हर रोज हजारों टन कचरे को रीसाइकल किया जा रहा है। गोबरधन योजना के माध्यम से गांवों में गोबर और दूसरे ऑर्गेनिक वेस्ट को भी उपयोगी संसाधन में बदला जा रहा है।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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