विकसित देशों में भारत से 6 गुना ज्यादा प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन, PM मोदी ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक एलायंस को लेकर दिया बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि कार्बन उत्सर्जन की ज़िम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर गलत तरीके से डाली जाती है। नई दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम है। पीएम मोदी ने विज्ञान भवन में मौजूद प्रतिनिधियों से कहा, "हम सभी जानते हैं कि कार्बन उत्सर्जन की ज़िम्मेदारी अक्सर गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाली जाती रही है। 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के मेरे कई साथी यहाँ मौजूद हैं। फिर भी, ऐतिहासिक सच्चाई यह है कि आज भी भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है।
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उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और उसने समय से पहले ही पेरिस (COP-21) जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया है। उन्होंने गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। पिछले 12 सालों में, भारत ने पर्यावरण से जुड़े हर क्षेत्र और हर सेक्टर में ज़बरदस्त तरक्की की है। हमारा मुख्य ध्यान रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) पर रहा है और इसने पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है। भारत G-20 का एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस में हुए COP-21 समिट में किए गए अपने वादों को तय समय से पहले ही पूरा कर लिया है। हम रिन्यूएबल एनर्जी पर ध्यान दे रहे हैं। G20 में हम एकमात्र ऐसे देश हैं जिसने अपने पेरिस (COP 21) के वादों को तय समय से काफी पहले ही पूरा कर लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, "यह नए भारत की ताकत है।
कॉन्फ्रेंस किस बारे में है?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से 19 और 20 सितंबर को दो दिन की कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। यह कॉन्फ्रेंस पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है और इसमें न्यायिक, सरकारी और कानूनी क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हो रहे हैं। उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव भी शामिल हुए। इस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण विशेषज्ञ, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, ज़िला अदालतों के जज, अलग-अलग मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (SEACs), राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणों (SEIAAs), राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 17 देशों के जाने-माने जज और न्यायिक प्रतिनिधि भी एक साथ आएंगे।
DUSU Election Result: अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास 114 वोटों से आगे
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए शनिवार को जारी मतगणना के बीच अध्यक्ष पद के शुरुआती रुझानों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के यश डबास सबसे आगे हैं जबकि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के विजय शंकर मीणा दूसरे स्थान पर हैं। इस चुनाव के नतीजों से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए डूसू के केंद्रीय पैनल की तस्वीर साफ होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय छात्र संगठन (आइसा)-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का वाम गठबंधन देश के सबसे चर्चित छात्र संघ चुनावों में से एक में अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे हैं।
पिछले साल अभाविप ने अध्यक्ष, सचिव एवं महासचिव पद पर जीत हासिल की थी जबकि एनएसयूआई ने केवल उपाध्यक्ष पद जीता था। शनिवार को पहले दौर की मतगणना के बाद डबास को 1,305 मत मिले जबकि मीणा को 1,191 और वाम गठबंधन की उम्मीदवार अनन्या रतूड़ी को 288 मत मिले। पहले दौर में कुल 3,270 मतों की गिनती हुई।
अधिकारियों ने बताया कि अभी मतगणना का केवल एक दौर पूरा हुआ है और दूसरे दौर की मतगणना शुरू हो गई है। केंद्रीय पैनल के चार पदों के साथ-साथ कॉलेज छात्र संघ के प्रतिनिधियों के चयन के लिए मतगणना शनिवार सुबह आठ बजे ‘नॉर्थ कैंपस’ स्थित विश्वविद्यालय खेल स्टेडियम के बहुउद्देश्यीय हॉल में शुरू हुई। प्रश्नपत्र लीक होने के मुद्दे को लेकर हाल में हुए छात्र आंदोलन के मद्देनजर चुनाव में प्रमुख छात्र संगठनों के प्रदर्शन को लेकर काफी उत्सुकता है।
चुनाव के लिए शुक्रवार को कई महाविद्यालयों में मतदान हुआ था। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) लगाई गई थीं, जिनमें से 960 का इस्तेमाल मतदान के लिए किया गया जबकि 40 मशीन को सुरक्षित रखा गया था। ईवीएम को शुक्रवार शाम मतदान समाप्त होने के बाद पुलिस की सुरक्षा में मतगणना स्थल ले जाया गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के 2,000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। प्रमुख सड़कों पर आवाजाही प्रतिबंधित की गई है और मतगणना केंद्र के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस साल चुनाव प्रचार के प्रमुख मुद्दे विद्यार्थियों का कल्याण, परिसर में सुविधाएं, छात्रावास की व्यवस्था और सुरक्षा रहे।
इस महीने की शुरुआत में सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद सुरक्षा का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा में रहा। इस हादसे में विद्यार्थियों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। दिल्ली में जून-जुलाई के दौरान राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ और परीक्षा सुधारों के मुद्दे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्र आंदोलन भी हुआ था।
एक अधिकारी ने बताया कि महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और परिसरों में पैदल गश्ती दल, मोटरसाइकिल दस्ते और पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) के वाहन लगातार गश्त कर रहे हैं। बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रमुख स्थानों पर अर्धसैनिक बलों के जवान भी तैनात किए गए हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जारी परामर्श के तहत लगाए गए यातायात प्रतिबंध शनिवार को नतीजों की घोषणा होने तक लागू रहेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मतगणना प्रक्रिया के दौरान प्रवेश और निकास बिंदुओं, विद्यार्थियों की आवाजाही तथा अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन के साथ समन्वय कर रही है।
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