Jharkhand News: झारखंड की बेटियों के लिए बड़ी सौगात; सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना से मिलेंगे 40 हजार रुपये, ऐसे करें आवेदन
Jharkhand News: झारखंड सरकार राज्य की बेटियों को पढ़ाई के लिए आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना चला रही है. इस योजना के तहत 8वीं से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को कुल 40,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यह राशि एक साथ नहीं, बल्कि पढ़ाई के अलग-अलग चरणों में सीधे छात्रा के बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना, बाल विवाह और भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं को रोकना और गरीब परिवारों की बेटियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. साल 2024-25 में ही लाखों छात्राएं इस योजना का लाभ उठा चुकी हैं. तो आइए जानते हैं इस योजना से जुड़ी सारी बातें विस्तार में.
योजना के तहत मिलने वाली राशि
इस योजना में छात्राओं को कक्षा के अनुसार मदद दी जाती है. 8वीं और 9वीं कक्षा में 2,500-2,500 रुपये, 10वीं, 11वीं और 12वीं में 5,000-5,000 रुपये दिए जाते हैं. इसके बाद यदि लड़की 18-19 साल की उम्र तक अविवाहित रहती है, तो उसे 20,000 रुपये एकमुश्त दिए जाते हैं. इस तरह कुल राशि 40,000 रुपये हो जाती है.
राज्य सरकार द्वारा बाल विवाह प्रथा का अंत एवं बालिका शिक्षा व महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना' की शुरुआत की है। इसके तहत कक्षा 8 से 12 एवं 18 से 19 वर्ष की किशोरियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।@HemantSorenJMM @mbhajantri pic.twitter.com/vMrk6YDIQn
— DC Deoghar (@DCDeoghar) October 8, 2022
पात्रता क्या है?
इस योजना का लाभ झारखंड की स्थायी निवासी छात्राएं ले सकती हैं, जो सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में 8वीं से 12वीं तक पढ़ रही हों. छात्रा के माता-पिता सरकारी नौकरी में न हों और आयकर दाता न हों. परिवार के पास राशन कार्ड या अंत्योदय कार्ड होना जरूरी है. अंतिम किस्त के समय छात्रा की उम्र 18-19 साल होनी चाहिए और वह अविवाहित हो.
आवेदन कैसे करें?
इस योजना के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से आवेदन किया जा सकता है. ऑनलाइन आवेदन के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट (https://savitribaipksy.jharkhand.gov.in) पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होता है. मोबाइल नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करने के बाद आवेदन फॉर्म भरना होता है. इसमें छात्रा, माता-पिता और शिक्षा से जुड़ी जानकारी देनी होती है. इसके बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड कर फॉर्म को फाइनल सबमिट करना होता है. वहीं, ऑफलाइन आवेदन के लिए छात्रा अपने स्कूल के प्रिंसिपल या नजदीकी ब्लॉक कार्यालय से संपर्क कर सकती है।
जरूरी दस्तावेज
आवेदन के लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक पासबुक, स्कूल से पढ़ाई का प्रमाण पत्र और अभिभावक का आधार कार्ड जरूरी है. अंतिम किस्त के समय वोटर आईडी भी देना होता है.
पैसा कब मिलेगा?
आवेदन स्वीकृत होने के बाद सरकार द्वारा तय समय पर राशि सीधे छात्रा के बैंक खाते में भेजी जाती है. जैसे-जैसे छात्रा अगली कक्षा में जाती है, वैसे-वैसे अगली किस्त मिलती रहती है. यह योजना झारखंड की बेटियों के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
अब 10 मिनट में नहीं होगी डिलीवरी, सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हटाई टाइम लिमिट की शर्त
Gig Employees: देशभर के गिग वर्कर्स की हड़ताल आज रंग लाई. सरकार ने डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. सरकार के दखल के बाद ऑनलाइन ऑर्डर्स से 10 मिनट डिलीवरी के नियम को हटा लिया गया है. श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे को हटा लिया है. इस मामले में केंद्रीय मंत्री ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अफसरों से चर्चा की. बैठक में डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई. समय सीमा को हटाने की बात को आगे रखा गया.
सरकार का दखल
इस मामले में केंद्रीय मंत्री ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अफसरों से चर्चा की थी. बैठक में डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की समय सीमा को हटाने की बात को कहा गया. सरकार ने कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया कि तेज डिलीवरी के चक्कर में अक्सर डिलीवरी बॉय की जान जोखिम में पड़ती है. ऐसा नहीं होना चाहिए. इसके बाद सभी कंपिनयों ने इस बात पर सहमति जताई कि वे अपने ब्रांड विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्ट से डिलीवरी के टाइम बाउंड को हटाएंगे.
इसलिए लिया ये फैसला
बीते कई दिनों से गिग वर्कर्स हड़ताल पर थे. उन्होंने कंपनियों से कई डिमांड रखी थी. इसमें 10 मिनट की टाइम लिमिट को हटाने की बात कही थी. दरअसल, डिलीवरी बॉय पर अक्सर तेज डिलीवरी का दबाव बना रहता था. इसके कारण सड़क हादसे के साथ सुरक्षा जोखिमों की आशंका थी. डिलीवरी बॉयज ने सरकार से ये अपील की थी कि उनकी सुरक्षा को लेकर कुछ कदम उठाए जाएं. इसके बाद से सरकार कंपनियों से बात कर रही थी.
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