आर्मी चीफ बोले- पाकिस्तान बॉर्डर पर 8 आतंकी कैंप एक्टिव:ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, किसी भी दुस्साहस का जवाब दिया जाएगा
आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। भविष्य में किसी भी तरह के आतंकी या सैन्य दुस्साहस के लिए हम पूरी तरह तैयार है। भारत पूरी ताकत से जवाब देगा। जनरल द्विवेदी ने बताया कि बॉर्डर के पास 8 आतंकी कैंप अभी भी सक्रिय हैं। अगर कोई हरकत होती है तो एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर, थलसेना, वायुसेना और नौसेना के तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है। ऑपरेशन सिंदूर में 100 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। रविवार को बॉर्डर के पास ड्रोन देखे जाने के सवाल पर आर्मी चीफ बोले- वे बहुत छोटे ड्रोन हैं। ये लाइट जलाकर उड़ते हैं। बहुत अधिक ऊंचाई पर नहीं उड़ते और बहुत कम ही दिखाई दिए हैं। 10 जनवरी को लगभग 6 ड्रोन देखे गए, जबकि 11 और 12 जनवरी को 2 से 3 ड्रोन दिखाई दिए। आर्मी चीफ बोले- 1963 का पाक-चीन समझौता अवैध आर्मी चीफ ने कहा कि भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 के समझौते को अवैध मानता है। जिसके तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी में अपना क्षेत्र चीन को सौंप दिया था। उन्होंने कहा कि हम वहां किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करते हैं। जहां तक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का सवाल है। हम इसे स्वीकार नहीं करते। हम इसे दोनों देशों की अवैध कार्रवाई मानते हैं। आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी की 5 बड़ी बातें… आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्रिवेदी के पिछले 3 बयान… 22 नवंबर: ऑपरेशन सिंदूर एक भरोसेमंद ऑर्केस्ट्रा जैसा था, हर म्यूजिशियन ने भूमिका निभाई आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 22 नवंबर 2025 को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर एक भरोसेमंद ऑर्केस्ट्रा की तरह था, जहां हर म्यूजिशियन ने एक साथ मिलकर काम करने वाली भूमिका निभाई। भारतीय सेना ने 22 मिनट में 9 आतंकी जगहों को तबाह कर दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले किए और उसके बाद भारत के सभी जवाबी हमले भी ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए। न्यूक्लियर हथियारों से लैस दो पड़ोसियों के बीच करीब 88 घंटे तक चली मिलिट्री लड़ाई 10 मई की शाम को एक समझौते पर पहुंचने के बाद रुक गई। पूरी खबर पढ़ें... 17 नवंबर: एक साल से भारत-चीन संबंधों में सुधार आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 17 नवंबर 2025 को कहा था कि पिछले अक्टूबर से भारत और चीन के संबंधों में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हालिया बैठकों में सामान्य स्थिति बहाल करने और विवादों के समाधान पर सकारात्मक चर्चा हुई है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि 21 अक्टूबर 2024 को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुआ समझौता भारत के लिए फायदेमंद रहा। इस समझौते में सीमा पर गश्त को लेकर बातचीत हुई है। पूरी खबर पढ़ें… 5 नवंबर- आज कोई भी देश अकेले सुरक्षित नहीं आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 5 नवंबर को दिल्ली में हुए ‘इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव 2025’ में कहा कि आज दुनिया में कई तरह के खतरे हैं और ये तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में कोई भी देश अकेले सुरक्षित नहीं रह सकता। अब सबको मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा- रक्षा क्षेत्र में मिलजुलकर की गई खोज (इनोवेशन) ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है। पूरी खबर पढ़ें…
भ्रष्टाचार कानून पर सुप्रीम कोर्ट जज बंटे:जस्टिस नागरत्ना बोलीं- धारा 17A असंवैधानिक, जस्टिस विश्वनाथन बोले- प्रावधान खत्म करना नहाने के पानी के साथ बच्चा फेंकने जैसा
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच से पहले परमिशन लेने की अनिवार्यता पर सुनवाई हुई। जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच ने इस पर स्प्लिट वर्डिक्ट (बंटा हुआ फैसला) सुनाया। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है। इसमें किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच करने से पहले सरकार की परमिशन लेना जरूरी है। इसी को लेकर विवाद है। सुनवाई में जस्टिस नागरत्ना ने कहा- धारा 17A असंवैधानिक है। किसी भी जांच के लिए पहले परमिशन लेना जरूरी नहीं। वहीं, जस्टिस विश्वानाथन ने कहा- धारा 17A संवैधानिक रूप से वैध है। इस प्रावधान को खत्म करने मतलब ‘नहाने के पानी के साथ बच्चे को फेंकने’ जैसा होगा। जस्टिस विश्वनाथन ने यह भी कहा कि उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को खत्म करनाऔर इसका इलाज बीमारी से भी ज्यादा नुकसानदेह साबित होगा। बशर्ते जांच की मंजूरी लोकपाल या राज्य लोकायुक्त के जरिए तय की जाए। CJI सूर्यकांत के पास भेजा गया मामला जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस विश्वनाथन की अलग-अलग राय के चलते अब मामला CJI सूर्यकांत के पास भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चीफ जस्टिस इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच गठित करेंगे, जो अंतिम फैसला देगी। NGO की याचिका पर सुनवाई दरअसल NGO सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) एनजीओ ने जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट ने दलील दी कि यह प्रावधान भ्रष्टाचार विरोधी कानून को कमजोर करता है, क्योंकि सरकार से अक्सर जांच की मंजूरी नहीं मिलती। वहीं केंद्र सरकार की ओर से तुषार मेहता ने पक्ष रखा था।
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