उत्तराखंड में RTI के तहत ऐतिहासिक फैसला, अब निचली अदालतों के जजों से जुड़े करप्शन और एक्शन की देनी होगी जानकारी
उत्तराखंड में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है. उत्तराखंड सूचना आयोग ने आदेश दिया है कि अधीनस्थ (निचली) न्यायपालिका के न्यायाधीशों और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए. यह देश में पहली बार होगा, जब इस तरह की जानकारी RTI के तहत उपलब्ध कराई जाएगी. बता दें कि यह फैसला उत्तराखंड सूचना आयोग की मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में दिया गया. आयोग ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के जॉइंट रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेने के बाद शिकायतों से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए. हालांकि, किसी भी न्यायाधीश या अधिकारी का नाम या व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी.
IFS अधिकारी ने की थी अपील
यह मामला भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़ा है, जो वर्तमान में हल्द्वानी में तैनात हैं. उन्होंने 14 मई 2025 को RTI आवेदन दाखिल कर अधीनस्थ न्यायपालिका से जुड़े सेवा नियम, आचरण नियम और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी. साथ ही उन्होंने 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की संख्या और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण भी मांगा था.
In a landmark ruling, Chief Information Commissioner of Uttarakhand SIC, Radha Raturi, has directed the Joint Registrar of the Uttarakhand High Court to furnish the Information on the status of corruption complaints against the subordinate judiciary, after due permission is… pic.twitter.com/yPMo12iiKP
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) January 13, 2026
नैनीताल हाईकोर्ट के लोक सूचना अधिकारी ने यह कहकर जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि यह सूचना गोपनीय है और तीसरे पक्ष से जुड़ी हुई है. इसके बाद संजीव चतुर्वेदी ने पहले विभागीय अपील और फिर सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की.
गोपनीयता के नाम पर जानकारी नहीं रोकी जा सकती- सूचना आयोग
सूचना आयोग में हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने दलील दी कि शिकायतों की संख्या और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक हित से जुड़ी है. वहीं लोक सूचना अधिकारी ने इसे संवेदनशील बताते हुए दोबारा गोपनीयता का हवाला दिया. दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने साफ कहा कि केवल “गोपनीय” कह देने से सूचना रोकी नहीं जा सकती. आयोग ने माना कि शिकायतों की संख्या और कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शिता के दायरे में आती है.
आयोग ने आदेश दिया कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद एक महीने के भीतर यह जानकारी अपीलकर्ता को दी जाए. जानकारों के अनुसार, यह फैसला न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और भविष्य में RTI मामलों के लिए नजीर बनेगा.
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भारत में एआई से जुड़ी नौकरियों में तेजी से वृद्धि के कारण भर्तियों में जबरदस्त उछाल : रिपोर्ट
बेंगलुरु, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में साल 2025 के दौरान एआई से जुड़ी नौकरियां तेजी से बढ़ीं। पिछले साल देश में एआई से जुड़े 2,90,256 पदों की भर्ती की गई। इससे साफ है कि एआई अब सर्विस सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। यह जानकारी मंगलवार को जारी फाउंडइट जॉब सर्च (पूर्व में मॉन्स्टर) की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2026 में एआई से जुड़ी भर्तियां और तेज होंगी। अनुमान है कि अगले साल एआई (आरटीआई) के जरिए होने वाली भर्तियों में साल-दर-साल 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और यह संख्या करीब 3.80 लाख पदों तक पहुंच सकती है।
भारत का रोजगार बाजार साल 2025 के अंत तक फिर से मजबूत होता दिखा। अलग-अलग क्षेत्रों, कामों और शहरों में लगातार भर्तियां हुईं। भर्तियों में महीने-दर-महीने 5 प्रतिशत और सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
फाउंडइट के चीफ प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी ऑफिसर तरुण शर्मा ने कहा कि साल 2025 में भर्तियों में विस्तार भी हुआ और समझदारी भी दिखी। उन्होंने बताया कि एआई अब कोई प्रयोग नहीं रहा, बल्कि कर्मचारियों की योजना का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में नौकरी देने वाली कंपनियां कौशल पर आधारित, अनुभवी लोगों को ज्यादा प्राथमिकता देंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, आईटी-सॉफ्टवेयर और सर्विसेज में सबसे ज्यादा एआई से जुड़ी नौकरियां रहीं, जिनकी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत थी। इसके बाद बैंकिंग और बीएफएसआई क्षेत्र (15.8 प्रतिशत) और मैन्युफैक्चरिंग (6 प्रतिशत) का स्थान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में एआई नौकरियों में 41 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई। वहीं स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स (38 प्रतिशत), रिटेल (31 प्रतिशत), लॉजिस्टिक्स (30 प्रतिशत) और टेलीकॉम (29 प्रतिशत) जैसे क्षेत्रों में भी अच्छी बढ़त देखी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि जनरेटिव एआई और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) से जुड़े कौशल में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिसकी मांग में साल-दर-साल 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका कारण चैटबॉट, स्मार्ट सहायक और कंपनियों में एआई का बढ़ता इस्तेमाल रहा।
एआई नौकरियों के मामले में बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां कुल नौकरियों का 26 प्रतिशत हिस्सा रहा। हैदराबाद ने टियर 1 में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की। तो वहीं जयपुर, इंदौर और मैसूर जैसे छोटे शहरों में भी एआई नौकरियों में अच्छी बढ़त देखने को मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में कंपनियों ने मध्यम और अनुभवी स्तर के कर्मचारियों को ज्यादा नौकरी दी। इसका मतलब है कि कंपनियां ऐसे लोगों को चाहती हैं, जिनके पास काम का अच्छा अनुभव हो।
--आईएएनएस
डीबीपी/एएस
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